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दो कवितायें

 

दोस्त

जब मेरे पास दोस्त थे

तब दोस्तों के पास कद हद पद नहीं थे

और जब दोस्तों के पास पद हद कद थे

मेरे पास दोस्त नहीं

 

धन 

 जब मेरे पास धन नहीं था

तब समझते थे सब मुझे बदहाल

पर मैं खुश था , बहुत खुश था

और जब मेरे पास है अकूत सम्पति

दुनिया मुझे खुशहाल समझती है

और मैं  तडपता हूँ बिस्तर पर

नींद के सुकून से भरे एक झोंके के लिए 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 21, 2017 at 4:51pm

आदरणीय भाई सुरेन्द्र जी आप द्वारा मुझे सतत हौसला मिलता है आपका स्नेह यूं ही सदैव मिलता रहे इस कामना के साथ सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 21, 2017 at 4:50pm

आदरणीय समीर सर ..मुझे अपनी हर रचना पर आपका मार्गदर्शन मिलता है जिससे रचनाधर्मिता की बारीकियों को सीखने में बड़ी मदद मिलती है आपको रचना पसंद आयी ये मेरे लिए आशीर्वाद है सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 21, 2017 at 4:48pm

आदरणीय अशोक सर रचना पर आपकी प्रतिक्रिया से बड़ा सुकून मिला आप सब के मार्गदर्शन से लिखने की ऊर्जा मिलती है सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 21, 2017 at 4:47pm

आदरणीय भाई ब्रिजेश जी रचना को आपका अनुमोदन मिलने से मैं आश्वस्त हूँ सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 21, 2017 at 4:47pm

आदरणीय आरिफ जी .रचना पर उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया के लिए ह्रदय से आभारी हूँ सादर 

Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 8:40am
भाई आशुतोष मिश्र जी बेहद उम्दा सर्जन, यथार्थ के बेहद करीब, बधाई।
Comment by Samar kabeer on April 19, 2017 at 9:36pm
जनाब डॉ.आशुतोष मिश्रा जी आदाब,दोनों रचनाएं अच्छी लगीं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 19, 2017 at 8:51pm

आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा जी सादर,  दोस्त होने के लिए जहां किसी पद या कद की जरूरत नहीं होती है वैसे ख़ुशी पाने के लिए रुपियों पैसों की ही जरूरत नहीं होती.दोनों ही क्षणिकाएं बहुत सुंदर हुई है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर.

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 19, 2017 at 8:31pm
उत्तम..सत्य का यथार्त चित्रण..सादर
Comment by Mohammed Arif on April 18, 2017 at 5:50pm
आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी आदाब, बहुत सरल अभिव्यक्ति कर दी इपने दोनों कविताओं में । न प्रतीक, न बिम्ब । बधाई स्वीकार करें ।

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