For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

coontee mukerji
  • Female
  • Mauritius
Share on Facebook MySpace

Coontee mukerji's Friends

  • gumnaam pithoragarhi
  • M Vijish kumar
  • Madan Mohan saxena
  • RAMESH YADAV
  • D P Mathur
  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • शिज्जु "शकूर"
  • किशन  कुमार "आजाद"
  • Usha Taneja
  • annapurna bajpai
  • Kedia Chhirag
  • Dr. Swaran J. Omcawr
  • ASHISH KUMAAR TRIVEDI
  • केवल प्रसाद 'सत्यम'
  • Savitri Rathore

coontee mukerji's Discussions

ओ.बी.ओ.लखनऊ चैप्टर- समाचार
2 Replies

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की मासिक गोष्ठी रविवार दिनांक 22.06.2014 को 37, रोहतास एंक्लेव, फैज़ाबाद रोड स्थित स्थान पर इस महीने की गोष्ठी का आयोजन किया गया था. आदरणीय मधुकर अष्ठाना जी की अध्यक्षता और कानपुर…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Jun 26, 2014.

ओपन बुक्स ऑनलाईन, लखनऊ चैप्टर समाचार
4 Replies

ओबीओ लखनऊ चैप्टर   "साहित्य समाज का दर्पण होता है " ..लेकिन इंसान जब तक अपनी पूरी गतिविधियों के साथ उसके सम्मुख खड़ा नहीं होता है तब तक उसकी छवि उसमें नहीं झलकती है. एक अच्छा साहित्य एक अच्छे समाज और…Continue

Started this discussion. Last reply by PRAMOD SRIVASTAVA May 29, 2014.

ओ.बी.ओ. लखनऊ चैप्टर की मासिक काव्य-गोष्ठी - अप्रैल 2014, एक प्रतिवेदन
11 Replies

ओ.बी.ओ. लखनऊ चैप्टर की मासिक काव्य-गोष्ठी - अप्रैल 2014, एक प्रतिवेदन      स्कूल में हम बच्चों को एक पेड़ लगाने के लिए कहा गया था. हमने एक पौधा लगा दिया. अध्यापक के कहने पर कि ‘यह तो पौधा है, पेड़…Continue

Started this discussion. Last reply by vandana May 30, 2014.

 

coontee mukerji's Page

Profile Information

Gender
Female
City State
lucknow, uttar pradesh
Native Place
brisee verdiere, mauritius
Profession
housewife
About me
originally from mauritius, married to dr sharadindu mukerji in india, write in hindi

Coontee mukerji's Blog

वह लड़की

वह लड़की!

मैं उसे बदलना चाहती थी

उसे पुराने खोह से निकालकर

पहनाना चाहती थी एक नया आवरण.

उसके बाल लम्बे होते थे

अरण्डी के तेल से चुपड़ी

भारी गंध से बोझिल

वह ढीली-ढाली सलवार पहनती थी

वह उस में नाड़ा लगाती थी

उसके नाखून होते थे मेँहदी से काले

एकाध बार सफ़ेद किनारा भी दिख जाता.

वह चलती थी सर झुकाये.

वह चुप रहती

मगर....उसके मन में सागर की लहरों

का सा होता घोर गर्जन.

आँखों में हरदम एक तूफ़ान लरजता

उसकी…

Continue

Posted on July 22, 2014 at 9:12pm — 10 Comments

गा कोयल...

गा कोयल गा...

गीत प्रेम के

गा कोयल.....



मन के सुप्त तारों को जगा.

प्रकृति के वक्ष के आर-पार

अनु विस्फ़ोटक के सप्त स्वर में

अपनी गायन शक्ति भर

तीव्र सुर में गा कोयल......

ग्रीष्म की तपती धूप है

कर बादलों का आह्वान

बादल कुछ ऐसा बरसे

तरल हो धरती का कण-कण

निकले सीप से मोती

सुख-समृद्धि की बरसात हो

गा कोयल.....

बनी रहे आम्रतरु की जड़ें

वसंत में मंजरी खिली रहे

मिटे घर घर से मौत की…

Continue

Posted on June 4, 2014 at 6:08pm — 10 Comments

तुम और मैं

तुम और मैं कितनी सदियों से

हाँ, कितने जन्मों से,

कितने चेहरे और रूप लिये

कभी भूले से, कभी अंजाने से.

एक युग में कभी तृण बन के

अमृत जल से बरसे कहीं,

नभ में तारे बन के चमके कभी

कितनी कहानियाँ सुनी अनसुनी रहीं.

किसका सफ़र था जो हवा बन के

गुज़र रहा था पात पात

एक गुलाब खिला था वन में

कुछ महक थी बसी मकरंद में.

एक एहसास था मन के कोने में

वह ढूँढ़ रहा था एक ठाँव,

कितने बसेरे मिले थे…

Continue

Posted on May 31, 2014 at 1:00pm — 9 Comments

गोधूली में

गोधूली में

बहुत ही कोमल स्वर में

दर्द से भरे हुए,

सूरज जब डूब रहा होता है

मैं जानती हूँ ज़िंदगी!

तुम मेरे लिये गाती हो.

छत से सूखे कपड़े उठाती हुई

बेचैन

मैं ठिठक जाती हूँ.

कुछ पल, कुछ अनबूझे सवाल

मंडराते हैं मेरे आस पास

चिड़ियों की तरह

जो दाना चुगकर, गाना गाकर

लौट जाते हैं अपने घोंसले में.

सांझ

रह जाती है कुँवारी

रात घिर आती है ज़मीं पर

गगन से उतरता है एक चाहत भरा धुंध

और-

पसर जाता है सरसों के खेत…

Continue

Posted on May 5, 2014 at 2:00pm — 10 Comments

Comment Wall (20 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:55am on January 25, 2014, RAMESH YADAV said…

बहुत ही अच्छी रचनाएं है. बधाई

At 7:08pm on January 21, 2014, Alka Gupta said…

बहुत ही सुन्दर समस्त रचनाएँ है ...कुंती मुखर्जी जी

..............सादर वन्दे 

At 9:49pm on January 4, 2014, नादिर ख़ान said…

अदरणीया कुंती जी, जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं!

At 11:36am on January 4, 2014, vijay nikore said…

जन्म दिन मुबारक ! आपका हर दिन मंगलमय हो।

 

सादर,

विजय निकोर

At 10:27am on January 4, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 9:30am on January 4, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें आदरणीया आपको"

At 5:25pm on December 13, 2013, Dr Dilip Mittal said…

 क्षणिकाये पसंद आने के लिये  धन्यवाद 

At 5:53pm on December 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

 सादर आभार 

At 7:39am on June 17, 2013, D P Mathur said…

आदरणीया कुंती जी आपको रचनाएं पसंद आई , आपका धन्यवाद !

At 9:13am on June 1, 2013, annapurna bajpai said…

हमारी मित्र मंडली मे आपका स्वागत है कुंती जी ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manan Kumar singh posted a blog post

असली चेहरा

फिर जंगल का राजा हाथी ही बना है।पर, अब उसके साथ बिल्लियाँ, भेड़ें आदि हैं। भेड़ियों की बहुतायत…See More
7 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted blog posts
7 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (तुम्हारी एक अदा पर ही मुस्कराने की)
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"आदरणीय बृजेश कुमार जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
8 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- दर्द है तो कभी दवा है ये
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय नीलेश जी..."
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
" हिंदी शब्दों को पिरोते हुए अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गाड़ी निकल रही है
"सरस और नव प्रवाह से सम्मोहित करती हुई रचना ...हार्दिक बधाई आदरणीय"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"वाह बहुतख़ूब बहुतख़ूब आदरणीय... बधाई"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ‘गुनगुन करता गीत नया है’
"आदरणीय अशोक जी बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण गीत के लिए बधाई..."
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on AMAN SINHA's blog post लडकपन
"भाव अच्छे हैं क्योंकि लेखक की आपबीती लग रही...बधाई"
10 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (तुम्हारी एक अदा पर ही मुस्कराने की)
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय अमीरुद्दीन जी बधाई..."
10 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post आजकल(लघुकथा)
"लघुकथा आपको अच्छी लगी,अच्छा है। आ.समर जी,आपका शुक्रिया।नमन।"
13 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service