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Madan Mohan saxena
  • Male
  • Mumbai.Maharashtra
  • India
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Latest Activity

रामबली गुप्ता commented on Madan Mohan saxena's blog post जिंदगानी लुटाने की बात करते हो
"अच्छा प्रयास है। वह्र क्या है इस गज़ल में?"
Sep 30, 2016
Madan Mohan saxena posted a blog post

जिंदगानी लुटाने की बात करते हो

किस ज़माने की बात करते हो रिश्तें निभाने की बात करते होअहसान ज़माने का है यार मुझ पर क्यों राय भुलाने की बात करते होजिसे देखे हुए हो गया अर्सा मुझे दिल में समाने की बात करते होतन्हा गुजरी है उम्र क्या कहिये जज़्बात दबाने की बात करते होगर तेरा संग हो गया होता "मदन "जिंदगानी लुटाने की बात करते होमौलिक और अप्रकाशितमदन मोहन सक्सेनाSee More
Sep 27, 2016
Ashok Kumar Raktale commented on Madan Mohan saxena's blog post कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है
"आदरणीय मदन मोहन सक्सेना जी सादर, सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है किन्तु आदरणीय गिरिराज भंडारी जी का प्रश्न तो अपनी जगह है ही. सादर."
Aug 7, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Madan Mohan saxena's blog post कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है
"आदरणीय मदन मोहन भाई , रचना के भाव अच्छे लगे , हार्दिक बधाई । किस विधा की रचना है ये नही समझ पाया ।"
Aug 6, 2016
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Madan Mohan saxena's blog post कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है
"कहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम जुबां से दिल की बातो को है कह पाना बहुत मुश्किल ज़माने से मिली ठोकर तो अपना हौसला बढता अपनों से मिली ठोकर तो सह पाना बहुत मुश्किल वाह । बहुत खूब ।हार्दिक बधाई आदरणीय"
Aug 4, 2016
Madan Mohan saxena posted a blog post

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किलख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है समय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किलकहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम जुबां से दिल की बातो को है कह पाना बहुत मुश्किलज़माने से मिली ठोकर तो अपना हौसला बढता अपनों से मिली ठोकर तो सह पाना बहुत मुश्किलकुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है क्या खोया और क्या पाया कह पाना बहुत मुश्किलकुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है "मौलिक व अप्रकाशित" मदन मोहन सक्सेनाSee More
Aug 4, 2016
डॉ. सूर्या बाली "सूरज" commented on Madan Mohan saxena's blog post चंद शेर आपके लिए
"अच्छे खयाल से भरपूर आशआर ! दाद कुबूल हो "
Jun 9, 2016
Madan Mohan saxena commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post न हम मंदिर बनाते हैं न हम मस्जिद बनाते
"इबादत के लिए उसकी हमारा दिल ही काफी है, न हम मंदिर बनाते हैं न हम मस्जिद बनाते हैं॥ ग़रीबों की गली में क़त्ल अरमानों का होता है, जहां पर ख़्वाब पलने से ही पहले टूट जाते हैं॥"
Jun 8, 2016
Madan Mohan saxena commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post आशियाने दिल में आख़िर आजकल ठहरा है कौन
"आ रहे होंगे इलेक्शन मुझको लगता है क़रीब, वरना इतनी सादगी से आजकल मिलता है कौन॥ सब यहीं रह जाता है अच्छा बुरा ऐ दोस्तों, ज़र ज़मीं जागीर लेकर साथ में जाता है कौन॥"
Jun 8, 2016
Madan Mohan saxena commented on डॉ. सूर्या बाली "सूरज"'s blog post क्या पता था इश्क़ मे ये हादसा हो जाएगा
"रफ़्ता रफ़्ता ज़िंदगी भी बेवफ़ा हो जाएगी रफ़्ता रफ़्ता इस जहां में सब फ़ना हो जाएगा कौन 'सूरज' है पराया कौन अपना है यहाँ ओढ़ लो थोड़ा सा ग़म तो सब पता हो जाएगा बेहतरीन गज़ल"
Jun 8, 2016
Madan Mohan saxena commented on JAWAHAR LAL SINGH's blog post देश में रहकर मुहब्बत देश से करते चलो!
"आपको हार्दिक बधाई इस रचना पर आदरणीय ,जवाहरलाल सिंह जी दूर के भी देश देखो, अब हमें वो मानता है, पग हमारे बढ़ चले हैं, शत्रु भी पहचानता है. पास में जो हैं पड़ोसी, धिनक धिन करते चलो. देश में रहकर..........."
Jun 8, 2016
Rahila and Madan Mohan saxena are now friends
May 15, 2016
Madan Mohan saxena commented on जयनित कुमार मेहता's blog post मातृ-दिवस पर एक ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल बदलते बक्त में मुझको दिखे बदले हुए चेहरे माँ का एक सा चेहरा , मेरे मन में पसर जाता नहीं देखा खुदा को है ना ईश्वर से मिला मैं हुँ मुझे माँ के ही चेहरे मेँ खुदा यारों नजर आता मुश्किल से निकल आता, करता याद जब माँ को माँ कितनी दूर हो फ़िर भी…"
May 10, 2016
Madan Mohan saxena commented on munish tanha's blog post सांस उनको देख कर के है इधर चलने लगी
"सांस उनको देख कर के है इधर चलने लगी कब मिले वो रोज मुझको आरजू रहने लगी"
May 6, 2016
Madan Mohan saxena commented on Dr.Prachi Singh's blog post हार कर भी जीत जाने का भला क्या अर्थ है? ....ग़ज़ल// डॉ. प्राची
"मंज़िलें सबकी अलग सबके अलग हैं रास्ते, फिर किसी का साथ पाने का भला क्या अर्थ है अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।"
Apr 1, 2016
Sushil Sarna commented on Madan Mohan saxena's blog post चंद शेर आपके लिए
"समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारोंरिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है ..... आदरणीय शे'रों का ये गुलदस्ता बहुत मन भाया ... हार्दिक बधाई।"
Feb 25, 2016
Madan Mohan saxena commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल
"नज़र का ग़म जो ग़ज़ल में भर दे हुनर ये हासिल किसी किसी को नहीं है मुमकिन जो शाइरी तो तू दिल में भारत महान लिखना"
Feb 25, 2016
Madan Mohan saxena commented on Rahul Dangi's blog post ग़ज़ल-मुझे फिर लगे आज तानों के पत्थर।
"वाह ! बहुत खूब,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 25, 2016
Madan Mohan saxena commented on Dr.Prachi Singh's blog post तुम्हे जीतने की अदा चाहती हूँ (ग़ज़ल)...... //डॉ. प्राची
"हुनर है सँजोना ये रिश्तों की पूँजी बुज़ुर्गों से ये सीखना चाहती हूँ। पता है मुझे तुम गज़ब पारखी हो तुम्हें जीतने की अदा चाहती हूँ।"
Feb 25, 2016
Madan Mohan saxena commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - जब किसी लब पे कोई दुआ ही नहीं -- गिरिराज भंडारी
"जीत उसको मिली जो लड़ा ही नहीं कौन सच में लड़ा ये पता ही नही साजिशों से अँधेरा किया इस क़दर कब्र उसकी बनी जो मरा ही नहीं बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई"
Feb 25, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Shahjahanpur
Profession
Writer &Poet.
About me
Writer &Poet.

नजर

धर्म निर्पेक्षता का नारा बुलंद करने बाले
आम आदमी का नाम लेने बाले
किसान पुत्र नेता
दलित की बेटी
सदी के महा नायक
क्रिकेट के भगबान
सत्यमेब जयते की घोष करने बाले
घूम घूम कर चैरिटी करने बाले सेलुलर सितारें
अरबों खरबों का ब्यापार करने बाले घराने
त्रासदी के इस समय में
पीड़ित लोगों को नजर
क्यों नहीं आ रहे .

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At 7:05pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 5:24pm on October 8, 2015, narendrasinh chauhan said…

सुक्रिया आप का

At 11:17am on April 27, 2015, pratibha tripathi said…

स्वागत है आपका आदरणीय मदन मोहन जी नमस्कार 

At 9:51pm on January 27, 2014, Vindu Babu said…

आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीय सक्सेना जी।

सादर

At 9:25am on January 24, 2014, कल्पना रामानी said…

आदरणीय, मेरी मित्र सूची में आपका हार्दिक स्वागत है

Madan Mohan saxena's Blog

जिंदगानी लुटाने की बात करते हो

किस ज़माने की बात करते हो
रिश्तें निभाने की बात करते हो

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर
क्यों राय भुलाने की बात करते हो

जिसे देखे हुए हो गया अर्सा मुझे
दिल में समाने की बात करते हो

तन्हा गुजरी है उम्र क्या कहिये
जज़्बात दबाने की बात करते हो

गर तेरा संग हो गया होता "मदन "
जिंदगानी लुटाने की बात करते हो

मौलिक और अप्रकाशित

मदन मोहन सक्सेना

Posted on September 27, 2016 at 12:00pm — 2 Comments

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर

बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल

ख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है

समय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किल

कहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम

जुबां से दिल की बातो को है कह पाना बहुत मुश्किल

ज़माने से मिली ठोकर तो अपना हौसला बढता

अपनों से मिली ठोकर तो सह पाना बहुत मुश्किल

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

क्या खोया और क्या पाया कह पाना बहुत मुश्किल

कुछ…

Continue

Posted on August 4, 2016 at 1:03pm — 3 Comments

चंद शेर आपके लिए

चंद शेर आपके लिए

एक।

दर्द मुझसे मिलकर अब मुस्कराता है
जब दर्द को दबा जानकार पिया मैंने

दो.

वक्त की मार सबको सिखाती सबक़ है
ज़िन्दगी चंद सांसों की लगती जुआँ है

तीन.

समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारों
रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है

चार.

जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी
बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था

"मौलिक व अप्रकाशित"
प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

Posted on February 24, 2016 at 12:09pm — 3 Comments

अब समाचार ब्यापार हो गए

अब समाचार ब्यापार हो गए

किसकी बातें सच्ची जानें
अब समाचार ब्यापार हो गए

पैसा जब से हाथ से फिसला
दूर नाते रिश्ते दार हो गए

डिजिटल डिजिटल सुना है जबसे
अपने हाथ पैर बेकार हो गए

रुपया पैसा बैंक तिजोरी
आज जीने के आधार हो गए

प्रेम ,अहिंसा ,सत्य , अपरिग्रह
बापू क्यों लाचार हो गए

सीधा सच्चा मुश्किल में अब
कपटी रुतबेदार हो गए

मौलिक और अप्रकाशित

मदन मोहन सक्सेना

Posted on October 8, 2015 at 2:30pm — 2 Comments

 
 
 

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