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Vasudha Nigam
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Vasudha Nigam's Blog

घुट-घुट के जीना सीख लिया

रिश्तों की मर्यादा में हमने घुट-घुट के जीना सीख लिया,

औरों को खुशियाँ देने को, छुप-छुप के रोना सीख लिया।

 

ताने उलाहने सुन कर हम बने रहे हर बार अंजान,

वो यूं ही सताते रहे हमे समझा न कभी हमे इंसान।

मेरी आंखो के सागर का बूंद-बूंद तक लूट लिया और,

रिश्तों की मर्यादा में हमने घुट-घुट के जीना सीख लिया।

 

मेरे मन की गहराई मे अब उलझनों का घेरा हैं

हर रात बीते रुसवाई मे, बेबस हर सवेरा है।

मौसम की कड़ी तपन मे घावों को सीना सीख लिया…

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Posted on September 3, 2013 at 9:51pm — 17 Comments

मोहब्बतों की दुनिया

मत लुटना मीठी मुसकानों पर,

ये जिस्मों की एक बनावट हैं,

कंकरीले-पथरीले रास्तों का हैं सफर,

ऊपर फूलों की बस सजावट हैं,…

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Posted on September 27, 2012 at 1:30pm — 1 Comment

शायरी

रिहा कर खूबसूरत दिखने की चाह की कैद से मुझे,

ए आईने मेरी सादगी को ज़मानत दे दे।  

...................

हम समता करना सीख गए सुख और दुख के हर रंग में,…

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Posted on July 27, 2012 at 11:30am — 12 Comments

माँ की व्यथा (लघुकथा)

एक अलसाई सी सुबह थी, सब काम निबटा कर बस बैठी ही थी मैं मौसम का मिजाज लेने। कुछ अजीब मौसम था आज का, हल्की हल्की बारिश थी जैसे आसमान रो रहा हो हमेशा की तरह आज न जाने क्यो मन खुश नहीं था बारिश को देखकर, तभी मोबाइल की घंटी बजी, दीदी का फोन था ‘माँ नहीं रही’। सुनकर कलेजा मुह को आने को था दिल धक्क, धड़कने रुकने को बेचैन, कभी कभी हम ज़ीने को कितने मजबूर हो जाते है जबकि ज़ीने की सब इच्छाएँ मर जाती है। मेरी माँ मेरी दोस्त मेरी गुरु एक पल में मेरे कितने ही रिश्ते खतम हो गए और मैं ज़िंदा उसके बगैर…

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Posted on July 17, 2012 at 3:30pm — 12 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 9:40am on September 24, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आदरणीया वसुधा जी.....कहानी को पसंद करने के लिये आपका हार्दिक आभार.........

At 6:42am on September 22, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आदरणीया वसुधा जी.....कहानी को सराहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद........

At 10:10am on July 31, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…
वसुधा निगम जी 
बहुत सुन्दर नाम.....

मित्रता के लिए शुक्रिया कुछ हमसे सीखिए कुछ हमें सीखिए....जो दुनियाँ के काम आए

दीपक कुल्लुवी
09350078399
At 11:08am on July 30, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

sundar rachnayen..............

kuluvi

At 2:22pm on July 28, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

मुझे आपके साथ दोस्ती करने में हर्ष हो रहा है,

स्वागत है आपका आदरणीय वसुधा निगम जी 

At 8:23pm on July 27, 2012, Rekha Joshi said…

आपके संरक्षण मे खुद को सुरक्षित महसूस करती हूँ मै,

यूं ही पूरा जीवन मुझे सुरक्षित महसूस, पापा कराओगे न।,पापा की प्यारी वसुधा जी आपका स्वागत है ,बेहद खुबसुरत रचना ,बधाई 

 

At 3:38pm on July 19, 2012, अरुन 'अनन्त' said…

वसुधा जी मेरी रचना पसंद करने के लिए शुक्रिया.

At 10:19am on May 25, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

अच्छी रचना लगी वसुधा जी। आपको बहुत बहुत बधाई !

At 10:06am on July 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 5:59pm on June 29, 2011, Santosh Kumar Thakur said…
very nice
 
 
 

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