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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर्, आदाब।  सर् हौसला अफ़ज़ाई के लिए तथा इस्लाह  के लिए आपकी बेहद आभारी हूँ।  सर् आपकी इस्लाह के अनुसार सुधार कर लेती हूँ। सादर। "
20 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । मतले के सानी को ऊला और ऊला को सानी करना उचित होगा । 'ताबिश-ए-ख़्वाब के लिए दिलबर' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'तेरी तस्वीर में मेरे दिलबर' 'ख़ूँ पसीने की…"
23 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार "ब्रज जी  ,हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ।"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया...बधाई"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आ. रचना जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Saturday
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल

2122-1212-221 आदमी कब ख़ुदा से डरता हैअपनी हर बात से मुकरता है2जब सर-ए-शाम ग़म सँवरता हैआइना टूटकर बिखरता है3आज का काम आज ख़त्म करेंवक़्त किसके लिए ठहरता है4ताबिश-ए-ख़्वाब के लिए दिलबररंग मेरे लहू से भरता है5शर्म की तोड़कर ही दीवारेंआदमी हद को पार करता है6है अजीब-ओ-गरीब अपना सफ़र रोज़ मक़्तल प आ ठहरता है7जितनी तहज़ीब मैं दिखाता हूँ उतना ही मुझ प वो बिफरता है8आँसुओं से ख़ुतूत लिख कर ही संग-ए-दिल पर निशाँ उभरता है9ख़ूँ पसीने की रोज़ी रोटी सेनक़्श-वादी-ए-जाँ निखरता है10एक सन्नाटा आज भी 'निर्मल'दिल…See More
Friday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी बेहद शुक्रिय:।"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीया...बधाई"
Nov 17
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर् आदाब। जी सर्, 'पर शिकायत किसी से न की दोस्तो' रख लेती हूँ। बेहद शुक्रिय: सर्।"
Nov 12
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"'आह भी इक न उसने भरी दोस्तो' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'आह भी इक न हमने भरी दोस्तो' या 'पर शिकायत किसी से न की दोस्तो'"
Nov 12
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर् आदाब।सर् ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ। आठवें में कहना चाह रही थी कि 'मुँह से उफ़ भी नहीं निकली '। शायद मैं अपनी बात ठीक से कह नहीं पाई। सर्,सुधार के लिए क्या यूँ कह सकते हैं 'आह भी इक न…"
Nov 10
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें । 8वें शैर का सानी समझ में नहीं आया ।"
Nov 10
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणिय समर कबीर सर् आदाब। आपने लाजवाब ग़ज़ल कही। हर अश्आर पर दाद क़ुबूल करें। हर अश्आर अपने में बेजोड़ है। हार्दिक बधाई।"
Nov 9
Rachna Bhatia commented on anjali gupta's blog post ग़ज़ल
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई।सर् द्वारा दी गई इस्लाह से भी सीखने को मिला।रदीफ़ बहुत अच्छी ली आपने, बधाई।"
Nov 9
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल

212 212 212 2121दोस्तों के बिना ज़िन्दगी दोस्तो इक कहानी उदासी भरी दोस्तो 2 बीच में फ़ासले ला के दौलत के क्योंआज़माने लगी दोस्ती दोस्तो3हाथ में हाथ डाले खड़ी दोस्तीगर्दिश-ए-दौराँ से लड़ के भी दोस्तो4कारवाँ अज़्म का रोके रुकता नहींराह चाहे हो मुश्किल भरी दोस्तो5हार बैठे हैं दिल कू-ए-उल्फ़त में हमअब न खेलेंगे बाजी नई दोस्तो6सुब्ह होते ही बेहिस जहाँ के सितमढूँढ लेंगे हमारी गली दोस्तो7लब से कुछ भी नहीं कह सके थे मगरफिर भी समझा था वो अनकही दोस्तो8दर्द सहते रहे अश्क बहते रहेपर नहीं ला सके लब प सी…See More
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"बहुत बढ़िया आदरणीया रचना जी...आदरणीय समर साहब की इस्लाह शानदार है।"
Nov 3

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल

2122-1212-22

1

 आदमी कब ख़ुदा से डरता है

अपनी हर बात से मुकरता है

2

जब सर-ए-शाम ग़म सँवरता है

आइना टूटकर बिखरता है

3

आज का काम आज ख़त्म करें

वक़्त किसके लिए ठहरता है

4

ताबिश-ए-ख़्वाब के लिए दिलबर

रंग मेरे लहू से भरता…

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Posted on November 20, 2020 at 12:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

1

दोस्तों के बिना ज़िन्दगी दोस्तो

इक कहानी उदासी भरी दोस्तो

2

बीच में फ़ासले ला के दौलत के क्यों

आज़माने लगी दोस्ती दोस्तो

3

हाथ में हाथ डाले खड़ी दोस्ती

गर्दिश-ए-दौराँ से लड़ के भी दोस्तो

4

कारवाँ अज़्म का रोके रुकता नहीं

राह चाहे हो मुश्किल भरी दोस्तो

5

हार बैठे हैं दिल कू-ए-उल्फ़त में हम

अब न खेलेंगे बाजी नई दोस्तो

6

सुब्ह होते ही बेहिस जहाँ के सितम

ढूँढ लेंगे हमारी गली…

Continue

Posted on November 9, 2020 at 1:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल

,12122 12122 12122 12122

1

लगा के ठोकर वो पूछते हैं उठा के सर क्या चला करेंगे

पलट दी बाजी ये कह के हमने ख़ुदा के दम पर बढ़ा करेंगे

2

सजा के महफ़िल मेरी तबाही की पूछते हैं कि क्या करेंगे…

Continue

Posted on October 31, 2020 at 3:47pm — 3 Comments

दरवाजा (लघुकथा)

" माँ,रोटी पर मक्खन तो रखा नहीं।हाँ,देती हूँ।" 

बेटे की रोटी पर मक्खन रखते हुए अचानक बर्तन माँजती बारह साल की बेटी छुटकी को देख सुधा के हाथ पल को ठिठके और फिर चलने लगे।वापसी में छुटकी की पीठ थपथपा काम में लग गई ।

माँ बेटी अभी थाली लेकर बैठीं थी कि पति की आवाज़ आई,

" कहां हो?पानी तो पिलाओ।खाने का कोई समय है कि नहीं जब तब थाली लिए बैठ जाती हो।यही छुटकी सीख रही है।" 

पिता की आवाज़ सुनते ही छुटकी ने जल्दी से थाली वापिस सरका दी।

सुधा ने भी जवाब के लिए तैयार होठों…

Continue

Posted on October 27, 2020 at 11:00pm — 6 Comments

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2122 -1122-1122-22याद तेरी को ऐसे दिल में लगा रक्खा है ।ढूंढ  पाये  तेरा तो  जेब    पता रक्खा है…See More
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"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । मतले के सानी को ऊला और ऊला…"
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"मुहतरमा वीना गुप्ता जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
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"जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । मतला कमज़ोर…"
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"जनाब डॉ. अरुण कुमार शास्त्री जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
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"जनाव सुशील सरना जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
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करोना -योद्धा  सखी    के नाम   सुनो ! अपना ध्यान रखना हरगिज़ हरगिज़ न डिगना हौसलों को हिम्मत बँधाते…See More
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212 212 212 2राज़ आशिक़ के पलने लगे हैं फूल लुक-छिप के छलने लगे हैउनके आने से जलने लगे हैं…See More
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