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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय आज़ी तमाम जी ग़ज़ल तक आने के लिए तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभार ‌"
21 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।फेयर में ठीक कर लेती हूँ।"
21 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।फेयर में ठीक कर लेती हूँ।"
23 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'भाई नमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।"
23 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय कृष मिश्रा जी ंंनमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।"
23 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"वाह सादगी भरी खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। नये से बिम्ब देखने को मिले हैं, ढेरों मुबारकबाद आ. रचना जी।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आ. रचना बहन ,सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Monday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ, 'समंदर ख़ूूूब ख़ारे हो रहे हैं'  इस मिसरे में  'ख़ारे'  से नुक़्ता हटा लीजिए।  सादर। "
Monday
Aazi Tamaam commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"सादर प्रणाम आदरणीय रचना जी बेहद खूबसूरत लयबद्ध ग़ज़ल है"
Monday
Rachna Bhatia posted a blog post

हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं

1222 1222 1221हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं सनम को जाँ से प्यारे हो रहे हैं 2 बसा कर दिल में शोहरत की तमन्ना फ़लक के हम सितारे हो रहे हैं 3 नवाज़ा है खुदा ने हर खुशी से बड़े अच्छे गुज़ारे हो रहे हैं 4 गिला शिकवा नहीं है अब किसी से सभी दिल से हमारे हो रहे हैं 5 तुम्हारी आँखों के इन मोतियों से समंदर ख़ूूूब ख़ारे हो रहे हैं 6 भरी महफ़िल में 'निर्मल' आज कैसे निगाहों से इशारे हो रहे हैंमौलिक व अप्रकाशितSee More
Monday
Rachna Bhatia commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आदरणीय कृष मिश्रा जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। वाह वाह वाह। आदरणीय मक़्ते में 'तुझको' के बदले 'तेरी' अधिक अच्छा लगा मुझे। सादर।"
Friday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी नमस्कार।जी सहीह कहा आपने ।सर् की इस्लाह सच में बेमिसाल होती है। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभार।"
Feb 19
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर्,इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय: । सर् 'ले' के लिए आगे से ध्यान रखूँगी। सभी सुधार फेयर में कर लेती हूँ । मक़्ता सहीह करके दिखाती हूँ। सादर।"
Feb 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया। बधाई...आदरणीय समर जी की इस्लाह हमेशा की तरह गौर करने लायक है।सादर"
Feb 18
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'जाने लुग़त कहाँ से ले आए निकाल के लिक्खे जहाँ प माइने उल्टे विसाल के' इस शैर के ऊला में 'ले' शब्द को 1 पर लेना उचित नहीं,पहले भी बताया जा चुका है,और सानी…"
Feb 18
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। "
Feb 18

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Native Place
Delhi
Profession
Teacher
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nothing special... just start my journey ....

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हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं

1222 1222 122

1

हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं

सनम को जाँ से प्यारे हो रहे हैं

2

बसा कर दिल में शोहरत की तमन्ना

फ़लक के हम सितारे हो रहे हैं

3

नवाज़ा है खुदा ने हर खुशी से

बड़े अच्छे गुज़ारे हो रहे हैं

4

गिला शिकवा नहीं है अब किसी से

सभी दिल से हमारे हो रहे हैं

5

तुम्हारी आँखों के इन मोतियों से

समंदर ख़ूूूब ख़ारे हो रहे हैं

6

भरी महफ़िल में 'निर्मल' आज कैसे

निगाहों से इशारे हो रहे…

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Posted on February 19, 2021 at 9:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल- तिफ़्ल कमाल के

221 2121 1221 212      

1

हैं आजकल के तिफ़्ल भी यारो कमाल के

रखते नहीं हैं दिल ज़रा अपना सँभाल के

2

जाने लुग़त कहाँ से ले आए निकाल के

लिक्खे जहाँ प माइने उल्टे विसाल के

3

अपनी शराफ़तों ने ही मजबूर कर दिया

वरना जवाब देते तुम्हारे सवाल के

4

नाज़ुक ज़रूर हूँ नहीं कमज़ोर मैं मगर

अल्फ़ाज़ लाइएगा ज़ुबाँ पर सँभाल के

5

कुछ तो जनाब बोलिए इस बेयक़ीनी पर

कहिए तो हम दिखा दें दिल अपना निकाल…

Continue

Posted on February 14, 2021 at 11:20am — 8 Comments

ग़ज़ल सँभालना है मुझे

2122/1212/22

1
साँप बनकर जो डस रहा है मुझे
दोस्त कह कर पुकारता है मुझे
2
उसका लहज़ा बता रहा है मुझे
अब न पहले सा चाहता है मुझे
3
दिल के चैन ओ सुकून की खातिर
ख़ुद को ख़ुद में ही ढूँढना है मुझे
4
हर घड़ी जिसको दिल में रखता हूँ
वो ही अंजान कह रहा है मुझे
5
क्यों पराया हुआ मैं अपनों में
यह सवाल अब भी सालता है मुझे
6
मय-कदे से उठा वो यह कह कर
घर भी 'निर्मल' सँभालना है मुझे

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on February 13, 2021 at 10:46am — 12 Comments

ग़ज़ल-वफ़ा नहीं मिलती

2122 1212 22

1

खा के क़समें वफ़ा नहीं मिलती

ज़ख़्मी दिल की दवा नहीं मिलती

2

बाँध ले बात गाँठ तू यारा

दर्द देकर दुआ नहीं मिलती

3

गाँव की तरह् शह्र में हमको

यार बाद-ए-सबा नहीं मिलती

4

साँस फेरेगी आँख ख़ुद ही सनम

चाहने से कज़ा नहीं मिलती

5

वस्ल की रात ओढ़कर घूँघट

आजकल क्यों हया नहीं मिलती

6

गुनगुना ले जो धड़कनों के सुर

ऐसी नग़्मा-सरा नहीं…

Continue

Posted on January 25, 2021 at 3:54pm — 6 Comments

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"आदरणीय नीलेश जी नमस्कार खूब ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार कीजिए।"
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