For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
Share

Amit Kumar "Amit"'s Friends

  • kamal pahuja
  • Vivek Jha
  • Nilesh Shevgaonkar
  • मोहन बेगोवाल
  • Dr.Prachi Singh
  • Ashok Kumar Raktale
  • राज़ नवादवी
  • Tilak Raj Kapoor
  • Saurabh Pandey
  • Rana Pratap Singh
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

Amit Kumar "Amit"'s Page

Latest Activity

Amit Kumar "Amit" commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'तेरे-मेरे मन की बातें' (लघुकथा)
"अजी वाह आदरणीय शहजाद उस्मानी जी बहुत ही सही बात कही आपने किताबें इंसान की सच्ची दोस्त होती हैं। लेखक भी और पाठक भी बाली बात भी बहुत सुंदर है। बधाईयां"
Feb 4
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय समर कबीर सर वाकई ग़ज़ल और समय चाहती है वैसे भी मैं सोच रहा था की ग़ज़ल पोस्ट ना करूं फिर भी मन नहीं माना तो पोस्ट कर दी आपके कहे पर ध्यान करूंगा धन्यवाद घाटे तमाम इश्क के क्यों तुमने रख लिए।हक मार के ये मेरे नफाएं मुझे न दो' इस शैर में…"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ० राजेश कुमारी जी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत बधाइयां स्वीकार करें। जीता रहा फ़रेब के साए में आज तक जाते हुए तुम इतनी वफाएँ मुझे न दो........ बहुत ही उम्दा शेर"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आ० अंजलि जी एक उम्दा ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय तस्दीक जी एक अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"बीमार इश्क का हूं, दबाएँ मुझे न दो।मर जाउंगा कि और, दुआएं मुझे न दो।।१।। बेखौफ बेवजह वो करता रहा खता।उसकी नदानियों की सजाएं मुझे न दो।।२।। टूटे हुऐ चराग को कैसे जलाओगे।बेकार कोशिशें ये हवाएं मुझे ना दो।।३।। घाटे तमाम इश्क के क्यों तुमने रख लिए।हक…"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय वासुदेव जी बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाइयां स्वीकार करें"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय शिज्जू भाई बहुत ही बेहतरीन उम्दा ग़ज़ल हुई बधाइयां स्वीकार करें"
Jan 25
Samar kabeer commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
""मातम कुनाँ" मातम करना,मातम करने वाले ।"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"आदरणीय ये कुनाँँ का अर्थ समझ नही आया।"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय नादिर जी बहुत खूबसूरत भावपूर्ण गजल लिखने के लिए बधाइयां। दिल से न दे सको वो  दुआएँ मुझे न दो इस ऊला में 'वो' की जगह 'तो' कर ले तो और भी अच्छा हो जाए।    "
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय समर सर जी बहुत ही उम्दा गजल। बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय महेन्द्र जी बहुत खूबसूरत भावपूर्ण गजल लिखने के लिए बधाइयां"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय अशफाक अली जी बहुत खूबसूरत भावपूर्ण गजल लिखने के लिए बधाइयां"
Jan 25
Samar kabeer commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"//आदरणीय इस ऊला को ऐसे कर लूं तो ठीक है क्या? दर-ओ-दीवार हैं मातम सभी इस बात पे साक़ी// ये मिसरा ठीक नहीं प्रिय अनुज ।"
Jan 25
Amit Kumar "Amit" commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"आदरणीय रवि शुक्ला सर जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर"
Jan 25

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"इस कदर फित्नो में उलझे कि ये हम भूल गएकिस तरफ चल पड़े हम, और किधर जाना था जनाब शिज्जु साहब उम्दा बात…"
3 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"यार,ख़ुशबू का मुक़द्दर ही यही है उसकोजिस तरफ़ लेके हवा जाए उधर जाना था...जनाब आसिफ ज़ैदी साहब उम्दा गज़ल…"
6 minutes ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मोहतरम जनाब मिर्ज़ा जावेद बेग साहब आदाब ख़ूबसूरत ग़ज़ल की ढेर सारी मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएं सादर"
27 minutes ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय कृपया मार्गदर्शन करते हुए इन्ही भावों को व्यक्त करते हुए गजल कैसे बन पाएगी बताएं।"
35 minutes ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय कबीर साहब, मैं मानता हूँ यह गजल के मापदंडों पर सम्भवतः यह खरी ना उतरे। आप लोग सिखाएंगे तो…"
43 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब राकेश गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बह्र,शिल्प,व्याकरण पर आपको अभी बहुत अभ्यास की…"
57 minutes ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"अंतिम लाइन का पहला शब्द मुझको पड़ा जाए, मझको नही , टायपिंग मिस्टेक है। सादर"
57 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"अच्छा सुझाव है ।"
1 hour ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"ऊला में 'उठकर' शब्द भर्ती का है,ऊला यूँ कर लें:- 'आप ने कह तो दिया है,मुझे घर जाना…"
1 hour ago
rakesh gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"तूने ठाना आदिल, तुझको उधर जाना था, उनकी चाहत थी, तुझको मर जाना था। ** पाले पत्थरबाज, होली खून की वो…"
1 hour ago
Asif zaidi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मोहतरम जनाब SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" साहब आदाब बहुत ख़ूबसूरत अशआर, ग़ज़ल के लिए…"
1 hour ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service