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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मोहतरमा रक्षिता सिंह जी गजल का अच्छा प्रयास हुआ है प्रयासरत रहें। मुशायरे में शिरकत करते रहें इस मंच से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।  मुद्दत से रूठे बैठे हैं किसको कौन मनाये अबएक ज़रा सी ज़िद ने आख़िर दोनों को बरबाद किया..... बहुत ही सुंदर…"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मोहतरमा रिचा यादव जी गजल का अच्छा प्रयास पर बहुत-बहुत बधाई हो समर सर की सलाह पर ध्यान दो गजल निखर जाएगी"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय दंड पानी नाहक जी अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। अपने अपने मैं को लेकर वो भी चुप थे हम भी चुप'एक ज़रा सी ज़िद ने आख़िर दोनों को बर्बाद किया '...... बहुत ही खूबसूरत शेर।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी अच्छी ग़ज़ल हुई बहुत-बहुत बधाइयां"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय नीलेश भाई जी बहुत खूबसूरत गजल कही बधाइयां स्वीकार करें"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"धन्यवाद"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मोहतरमा रचना भाटिया जी गजल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। उनका और उसका दोनों ही शब्द यूज किए जा सकते हैं"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी ग़ज़ल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय समर कबीर सर जानकारी और समस्या समाधान के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आभार"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय सालिक भाई जी गजल का अच्छा प्रयास हुआ बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें गुनी जनों की बातों पर ध्यान दें।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मोहतरमा दीपांजलि दुबे ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बहुत-बहुत बधाइयां गुरुजनों की सलाह पर ध्यान दें ग़ज़ल निखर जाएगी।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"जो हैं पड़ोसी/ प्यार की भाषा/ आपस में सब / भूले हैं 22122      21222            2222          222 कृपया मात्राओं के बारे में समझाइए क्या यह सही तरीका है?"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय लक्ष्मण भाई जी ग़ज़ल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सही फरमा रहे हैं मैं इसे सुधार करने का प्रयास करूंगा।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय रिचा यादव जी गजल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद । जी, गुनी जनों के कहे अनुसार गजल को सुधार करने का प्रयास करूंगा।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय दंड पानी नाहक जी ग़ज़ल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Oct 28
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय समर कबीर सर हौसला अफजाई ऑफिशल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी टिप्पणी की हमेशा प्रतीक्षा रहती है जो मेरी ज्ञान वर्धन में कैटालिस्ट का काम करती है कृपया आशीर्वाद बनाए रखें। सौती काफिया - आज पहली बार सुना इसके बारे में कृपया व्हाट्सएप…"
Oct 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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