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मखमल के गद्दों पे गिरगिट सोए हैं (नवगीत 'राज')

मखमल के गद्दों पे गिरगिट सोए हैं

कंठ चीर तरु सरकंडों के

अल्गोज़े की बीन बनी है

अंतड़ियों के बान पूरकर

तिलचट्टों ने खाट बुनी है

मजबूरी ने कोख में फ़ाके बोए हैं

 

लूट खसोट के दंगल भिड़तु

किसने लूटी किसकी जाई

बुक्का फाड़ देवियाँ रोती

सनी लहू में साँजी माई

कंधों पे संयम के मुर्दे ढोए हैं

 

छल के पैने नाखूनों से

देह खुरचते जात धरम की

मक्कारी की आरी लेकर

लाश बिछाते लाज शरम की

प्रश्न भरोसे की  आँखों से रोये हैं

 

रिश्तों की चिल्मों के भीतर

ओछेपन की आग भरी है

जिव्हा के पनघट के ऊपर

धरी डोलची जहर भरी है

काँव काँव में तेरे मेरे खोए हैं

 

गुड्डे गुडिया छुपम छुपाई

आट्टे बाट्टे लल्ला लोरी

गिट्टे कंचे इक्क्ल दुक्कल

गुल्ली डंडा डंडा डोली

कम्प्यूटर मोबाइल ने सब धोए हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 26, 2018 at 5:03pm

आद० बृजेश कुमार बृज जी आपको ये नवगीत पसंद आया दिल से बहुत बहुत शुक्रिया .

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 24, 2018 at 10:09pm

बहुत ही शानदार सृजन किया है आदरणीया...सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 24, 2018 at 9:34pm

आद० सतविन्द्र भैया आपको नवगीत पसंद आया मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत ब्बहुत आभारी हूँ 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 24, 2018 at 8:59pm

वाहः वाहः वाहः,अद्भुतnvgeet सर्जना हुई है। बहुत बहुत बहुत बधाई आदरणीय राजेश दीदी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 24, 2018 at 7:10pm

आद० लक्ष्मण भैय्या आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 24, 2018 at 7:10pm

आद महेंद्र कुमार जी आपको नवगीत पसंद आया दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 24, 2018 at 7:09pm

आद०  बलराम जी ,नवगीत आपको पसंद आया दिल से बहुत बहुत शुक्रिया .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 24, 2018 at 5:05pm

आ. राजेश दी, वर्तमान हालातों को उजागर करता बेहतरीन गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Mahendra Kumar on January 23, 2018 at 8:02pm

बढ़िया नवगीत है आ. राजेश मैम. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Balram Dhakar on January 23, 2018 at 6:24pm
बहुत बढ़िया नवगीत, आ. राजेश जी। बधाई स्वीकार करें।
सादर।

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