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ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )

ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
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(फऊलन-फऊलन-फऊलन-फऊलन)

चलाओ न तीरे नज़र तीरगी में |
निकल कर तो आओ कभी रोशनी में |

कमी दर्दे दिल में तो अब भी नहीं है
मज़ा आ रहा है तुम्हें दिल लगी में |

मेरी ही नहीं है यह सबकी ज़ुबा पर
लुटे क़ाफ़िले सब तेरी रहबरी में |

करूँ फ़ख़्र मैं क्यूँ न क़िस्मत पे अपनी
दिवाना हुआ हूँ तुम्हारी गली में |

यूँ ही कोई तुझ पर नहीं मर मिटा है
कोई बात तो है तेरी सादगी में |

कभी मेरी बालीं पे सज धज के आओ
क़ियामत भी मैं देख लूँ ज़िंदगी में |

लगा कर गले मुझको तस्दीक़ उसने
नई रूह फिर फूँक दी दोस्ती में |

तीरगी --अंधेरा , बालीं--सिरहाने

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 24, 2018 at 11:52am

जनाब महेन्द्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 24, 2018 at 11:51am

जनाब बलराम साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mahendra Kumar on January 23, 2018 at 7:32pm

बढ़िया ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आ. तस्दीक़ जी. सादर.

Comment by Balram Dhakar on January 23, 2018 at 6:28pm
आदरणीय तस्दीक जी, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल।
हार्दिक बधाई।
सादर।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 23, 2018 at 9:47am

जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by नाथ सोनांचली on January 23, 2018 at 4:35am

आद0 तस्दीक अहमद साहिब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 22, 2018 at 9:53am

जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on January 22, 2018 at 9:04am
जनाब तस्दीक़ साहब,
हर एक शेर ख़ूबसूरत वाह क्या कहने मुबारक़बाद क़ुबूल करें.
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 20, 2018 at 8:19am

मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब आदाब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on January 20, 2018 at 7:57am

आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,

                          बहुत ही प्यारी ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

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