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सपने फिर सजाऐं.......//डॉ० प्राची

साल इक जाए प्यास देकर,
साल इक आए आस लेकर,
संग हम इनके
खिलखिलाएं,
आओ चलो
सपने फिर सजाऐं...

कोई यादों की खिड़कियों से
आए औ' धड़कन मुस्कुरा दे,
बिन कहे कहने जब लगे वो
अपने दिल के सारे इरादे,

ऐसा इक मीठा सा तराना
अनसुना करने का बहाना,
छोड़ कर
धुन ये गुनगुनाएं,
आओ चलो
सपने फिर सजाऐं...

तोड़ कर बंधन रोज भागें
थाम कर उँगली कब चली हैं,
इनका अम्बर ही है ठिकाना
ख्वाहिशें कितनी मनचली हैं,

इनको उड़ने दें पंख लेकर,
सब दुआओं के शंख लेकर,
मन्नतें इनकी
अब उठाऐं,
आओ चलो
सपने फिर सजाऐं...

रूठ जाऐं तो ये मना ले
जाने क्यों फिर भी रूठती है,
छूट जाऐं तो थाम ले ये
थामते हैं तो छूटती है,

जैसे मिसरी की इक डली हो
ज़िन्दगी साँसों में घुली हो,
बाहों में इसकी
झूल जाऐं,
आओ चलो
सपने फिर सजाऐं...

मौलिक और अप्रकाशित 

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Comment by अलका 'कृष्णांशी' on February 5, 2017 at 3:09pm

आदरणीया प्राची सिंह जी सुंदर गीत लिखा है आपने , नव वर्ष की शुभकामनाये


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 23, 2017 at 1:55am

आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी 

मन में कोई भी भाव लयात्मकता के साथ आए और उसे प्रयोगात्मक तरह से गीत में ढालने का ये एक प्रयास मात्र है 

इस गीत को मैंने वजन पर आधारित लिखा है 

मूल पंक्ति "आओ चलो सपने फिर सजाएं" को छोड़ कर 

२१२२२  २१२२ पूरे गीत में इसी वजन का निर्वहन करने का प्रयास किया है 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 10:52pm

नए और बीते वर्ष को लेकर सुंदर गीत रचा है प्रिय प्राची जी बहुत बहुत बधाई 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 3, 2017 at 11:07pm
आदरणीया प्राची जी सुंदर गीत लिखा है आपने अपनी जानकारी के लिए पूछ रहा हूँ इस गीत में मात्राओं का निर्धारण किस तरह किया गया है हर गीत अलग तरह का लगता है जिससे मैं दुबिधा की स्थिति में हूँ सादर प्रणाम के साथ
Comment by जयनित कुमार मेहता on January 3, 2017 at 8:52pm
आदरणीया प्राची जी, सघन अनुभूतियों से परिपूर्ण इस मनभावन रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको।
Comment by नाथ सोनांचली on January 3, 2017 at 12:50pm
आद0 प्राची सिंह जी गीत पर बधाई आपको, नव वर्ष की शुभकामनाये

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 3, 2017 at 10:06am

आदरणीया प्राची जी , नये और पुराने साल को ले कर बहुत अच्छी गीत रचना हुई है । आपको हार्दिक बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 2, 2017 at 11:47pm

आदरणीया डॉ. प्राची सिंह जी, नए वर्ष और बीते वर्ष की सीमा पर खड़े होकर एक बहुत अच्छा गीत लिखा है आपने। इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। सादर।

Comment by Mahendra Kumar on January 2, 2017 at 9:42pm
आदरणीया प्राची जी, इस सुन्दर गीत के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।
Comment by Samar kabeer on January 2, 2017 at 2:14pm
मोहतरमा डॉ.प्राची सिंह साहिबा आदाब,सुंदर गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
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