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बेहिसाब बरसो ......इंतज़ार

मेरे जीवन में तुम आके बरसो
आसमानी बादल बन के ना बरसो
पास आ सैलाब बन के बरसो
पुरवाई का झोंका बन के ना बरसो
प्यार की अंगार बन के बरसो
मिलन की आस बन के ना बरसो
बोसों की बौछार बनके बरसो
चांदनी बन के ना बरसो
चकोरी की प्यास बन के बरसो
उमंगों के आकाश से
एहसासों की बारात बन के बरसो
तनहाइयाँ बहुत हुईं
एक मिलन की रात बन के बरसो
अब जैसे भी बरसो ....
मगर कुछ ऐसे बरसो
कि बेहिसाब हो के बरसो !!

******************************************

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by vijay nikore on June 9, 2015 at 10:18am

अति सुन्दर ! हार्दिक बधाई।

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 7, 2015 at 5:38am

आदरणीया rajesh kumari उत्साहवर्धन के लिये हार्दिक आभार ....सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 7, 2015 at 5:36am

आदरणीय maharshi tripathi जी बहुत बहुत धन्यवाद ...सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 6, 2015 at 7:21pm

सुन्दर प्रस्तुति आ० मोहन सेठी जी,हार्दिक बधाई | 

Comment by maharshi tripathi on June 5, 2015 at 7:23pm

सुन्दर भाव अभीव्यक्ति पर सादर बधाई आ. Mohan Sethi 'इंतज़ार' जी |

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 5, 2015 at 4:21pm

आदरणीय :

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी 

Sushil Sarna जी 

krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी 

Samar kabeer जी 

आप सबका हार्दिक आभार एवं शुभकामनाएं....सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 5, 2015 at 2:23pm

अच्छे कविता है  सेठी जी , सादर

Comment by Sushil Sarna on June 5, 2015 at 1:41pm

तनहाइयाँ बहुत हुईं
एक मिलन की रात बन के बरसो
अब जैसे भी बरसो ....
मगर कुछ ऐसे बरसो
कि बेहिसाब हो के बरसो

बहुत खूब आदरणीय … दिल के अहसासों को आपने बड़ी खूबसूरती से कागज़ पर उतारा है आपने .... हार्दिक बधाई।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 5, 2015 at 12:03pm

पूर्णता की आशा लिए सुंदर रचना! हार्दिक बधाई आ० इन्तजार सर!

Comment by Samar kabeer on June 5, 2015 at 10:53am
जनाब मोहन सेठी इंतज़ार जी,आदाब,सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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