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भांग का पौधा ........इंतज़ार

ये मेरे दिल में जो तूने
एक भांग का पौधा 
बो दिया था
अब वो बड़ा हो गया है
और लत लग गई है मुझे
रोज़ दो पत्ती खाने की...
प्यार के नशे में तेरे
डूबना बड़ा अच्छा लगता है
कहते हैं कि नशा गुनाह है
मगर यहाँ किसे परवाह है
अगर मैं मुजरिम हूँ
तो सिर्फ़ तेरा
तू चाहे जो सज़ा दे दे
मंज़ूर है सब
मगर शर्त ये है कि
कभी कभी इसे सींच देना
अपने एहसासों की बौछार से !! 

***********************************************

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by somesh kumar on June 9, 2015 at 10:57pm

नशा ये प्यार का नशा है - - -बहुत बेजोड़ है ये प्यार की भांग ,बधाई मोहन भाई |

Comment by kanta roy on June 9, 2015 at 11:01am
भाँग का पौधा ..... और प्यार का नशा ..... वाह !!! बेहद सटीक प्रतीक का उपयोग किया है आपने । दो पत्तियाँ रोज खाने की आदत ... हाँ , यह सच है कि भाँग के पौधे की लतर - चतर बेहद सशक्त होती है । एक बार यह पौधा लग जाये तो इसका उन्मूलन असंभव है । यह स्वंय में सींचन लेता रहता है ..... प्रेम के नशे में ही यह जीवित होकर । बधाई आपको इस सुंदर रचना के लिए आदरणीय मोहन सेठी 'इंतजार ' जी
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 9, 2015 at 7:14am

आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी तहे दिल से आपका धन्यवाद ....सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 9, 2015 at 7:12am

आदरणीय shree suneel आप का अभिनन्दन एवं हार्दिक आभार पसन्दगी के लिये ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 9, 2015 at 7:11am

आदरणीय krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी आप के प्रोत्साहन हेतु हार्दिक आभार ....सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 8, 2015 at 6:41pm

आदरणीय मोहन भाई , सुन्दर , मर्मस्पर्शी रचना हुई है , हार्दिक बधाई आपको ।

Comment by shree suneel on June 8, 2015 at 1:41am
क्या बात है! आदरणीय मोहन सेठी जी, सुन्दर कविता हुई. भावपूर्ण प्रस्तुति. हार्दिक बधाइयाँ आपको इस रचना के लिए.
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 7, 2015 at 7:23am

वाह! आ० ऐसी मुहब्बत और विरह के रंग में डूबी ऐसी कल्पनाए! तो बस आप ही कर सकते है!बहुत सुन्दर!

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 7, 2015 at 5:35am

आदरणीया rajesh kumari जी हार्दिक आभार आप की उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिये ....सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on June 7, 2015 at 5:33am

आदरणीय vinaya kumar singh जी हार्दिक आभार पसंदगी के लिये ...सादर 

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