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सच! विगत वर्ष की तरह.. (अतुकांत)

वर्ष फिर बीत गया

यूँ दे गया, अनुभव

जीने के

लड़ने के,  अंधेरों से

रौशनी के लिए

सत्य से सत्य को

छीन लिया

असत्य से असत्य

 

छोड़े भी और मांग भी लिए

अधिकारों को

थोड़ी सी घुटन में

राहों में चलते रहे

अपनों के साथ

अपनों के ही लिए

 

जान लिया, पहचाना भी

समझ भी तो गये

अँधेरा और दुःख

दोनो ही तो, चाहिए

रौशनी और सुख के साथ-साथ

बड़ा अच्छा लगता है

इनके बीच की

दूरियों को पाटना

अनुभव भी तो मिलता है

पल-पल, पहर दर पहर

सुबह से शाम,  और

शाम से रात तक

ताकि, आती रहें यूँ ही

नयी-नयी सुबहें

नये संघर्ष लेकर,

हर वर्ष

सच!  विगत वर्ष की तरह..

 

  जितेन्द्र पस्टारिया 

(मौलिक व् अप्रकाशित)   

Views: 608

Comment

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 13, 2015 at 11:12am

रचना पर आप सभी की उपस्थिति व् स्नेहिल प्रतिक्रिया हेतु आप सभी का आभारी हूँ.

सादर !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 2, 2015 at 1:13pm

आती रहें यूँ ही

नयी-नयी सुबहें

नये संघर्ष लेकर,

हर वर्ष

सच!  विगत वर्ष की तरह------------------------ ati sundar jeetu bhaiyya .

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 1, 2015 at 11:18pm
साल बिताने में पूरा साल गुजर जाता है,
कितने अनुभव देता जाता है ,
खट्टे - मीठे , हॉट एन कूल,
कभी - कभी , बस बन गए फूल।
जाने दो, नये साल को आने दो ,
अनुभवों को भुनाने दो।
नव वर्ष , नव हर्ष,
सहर्ष , हो उत्कर्ष।
सबका शुभ हो , सबका हो उत्कर्ष।
प्रिय जीतेन्द्र जी, आपकी रचना ने प्रेरित किया , लिख दिया, आपको बहुत बहुत बधाई एक सुन्दर प्रस्तुति पर, शुभ, शुभ।
Comment by somesh kumar on January 1, 2015 at 8:55pm

जान लिया, पहचाना भी

समझ भी तो गये

अँधेरा और दुःख

दोनो ही तो, चाहिए

रौशनी और सुख के साथ-साथ

बड़ा अच्छा लगता है

इनके बीच की

दूरियों को पाटना

अनुभव भी तो मिलता है|

समय पर अच्छा विमर्श है इस कविता में ,रोशनी ऐसे लिखें ,नव वर्ष की आपकी नव प्रस्तुति पर थे दिल से बधाई 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 1, 2015 at 7:48pm

ताकि, आती रहें यूँ ही

नयी-नयी सुबहें

नये संघर्ष लेकर,......बहुत बढ़िया प्रस्तुति

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी, हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 1, 2015 at 7:10pm

आदरणीय जितेन्द्र जी बहुत सुंदर रचना है बहुत बहुत बधाई आपको इस रचना के लिये


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 1, 2015 at 7:07pm
नववर्ष की शुभकामनायें और इस प्रस्तुति हेतु बधाई
Comment by Shyam Narain Verma on January 1, 2015 at 4:12pm

 सुन्दर अभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई।

Comment by khursheed khairadi on January 1, 2015 at 2:07pm

पल-पल, पहर दर पहर

सुबह से शाम,  और

शाम से रात तक

ताकि, आती रहें यूँ ही

नयी-नयी सुबहें

नये संघर्ष लेकर,

हर वर्ष

सच!  विगत वर्ष की तरह..

 आदरणीय जितेंदर जी , नवल भावाभिव्यक्ति है | अतुकांत में भी गीत सा प्रवाह और गति है | आपको नववर्ष की शुभकामना सहित -सादर अभिनन्दन 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 1, 2015 at 10:47am

सच ! विगत वर्ष की तरह, जो कुछ अनुभव दे जाता है, इसीलिए तो जाने वाले की विदाई पर आभार व्यक्त किया जाता है | सुंदर भाव रचना के लिए  हार्दिक  बधाई -

स्वागत हो नव वर्ष का,लेता विदा अतीत,

समय लगे शुभ काज में, सार्थक समय व्यतीत

नए वर्ष का आगमन, खुशिया मिले हजार, 

समय चक्र गतिशील है, समय जायगा बीत |

-लक्ष्मण रामानुज  

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