For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सपनों का सच--डा० विजय शंकर

यूँ तो सपनों का सच से
कोई वास्ता नहीं होता है |
सच सामने से
ज्यों ज्यों गुजरने लगता है ,
सपनों से डर लगने लगता है ॥
सपने जब टूटने लगते हैं ,
सच से डर लगने लगता है ॥
फिर भी कोई सपने देखना
छोड़ नहीं पाता है ।
रोज सपनों के सच होने के
सपने सजाता है ॥
सपने एक आशा हैं ,
एक उम्मीद हैं ,
कुछ पाने की , कुछ होने की
किसी चिर प्रतीक्षित
अभिलाषा के पूरी होने की |
क्योंकि यही तो जीवन है ,
यही तो जीवन का सच है ||

मौलिक एवं अप्रकाशित.

Views: 439

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 23, 2014 at 7:20pm
बहुत बहुत धन्यवाद , आदरणीय खुर्शीद खैरादी जी .
Comment by khursheed khairadi on September 23, 2014 at 10:36am

सपने एक आशा हैं ,
एक उम्मीद हैं ,
कुछ पाने की , कुछ होने की
किसी चिर प्रतीक्षित
अभिलाषा के पूरी होने की |

आदरणीय विजयशंकर जी बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ हुई हैं ,आस जगाती काव्य पंक्तियों का सादर अभिनन्दन ,हार्दिक बधाई 

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 21, 2014 at 4:00pm
सपने भविष्य की सुखद कल्पना होते हैं , आपसे सहमत हूँ मैं , इसीलिये प्रेरित करते हैं।
बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय हरी वल्लभ शर्मा जी .
Comment by harivallabh sharma on September 21, 2014 at 1:54pm

बहुत सुन्दर रचना आदरणीय...सपने ही हैं जो इंसान को आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं..सफलताओं के सारे सोपान इन्हीं में बसे होते...सुन्दर भाव बधाई आपको.

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 20, 2014 at 10:28pm
आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , इस छोटी सी कविता को मान देने के लिए आभार , बधाई के लिए सादर धन्यवाद .
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 20, 2014 at 1:55pm

विजय सर !
बहुत सार्थक बात कही आपने खासकर-

सपने एक आशा हैं ,
एक उम्मीद हैं ,
कुछ पाने की , कुछ होने की
किसी चिर प्रतीक्षित
अभिलाषा के पूरी होने की

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 20, 2014 at 12:19pm
प्रिय जीतेन्द्र जी इन पंक्तियों के लिए आपने समय दिया , उन्हें स्वीकार किया , बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 20, 2014 at 8:38am

यही जीवन है और यही तो जीवन का सच भी है. यही सार है और यही केंद्र बिंदु भी. बहुत अच्छी रचना प्रस्तुति आदरणीय डा. विजय जी, बहुत-२ बधाई आपको

Comment by Dr. Vijai Shanker on September 19, 2014 at 12:31pm
रचना को स्वीकृति प्रदान करने लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विजय प्रकाश शर्मा जी .
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 18, 2014 at 11:26pm

आ ० डॉ. विजय शंकर जी,
सपने सच हों न हों पर आशा का दीप जलाये रखते हैं.
इस रचना पर बधाई स्वीकारे.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
12 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service