For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हमें वो वेवफा कह कर बुलाते है सितम देखो
चुरा कर नीद रातो की सताते है सितम देखो

कभी मै देखता भी तो नहीं था जाम के प्‍याले
कसम दे कर मुझे अपनी पिलाते है सितम देखो

बडे अरमान से जिसने  बनाया आशिया मेरा
वही उस आशिये को अब जलाते है सितम देखो

न रूठे वो कभी हमसे हमारे साथ चलते थे
मगर अब साथ गैरो का निभाते है सितम देखो

खुले जो लब कभी जिनके हमारा नाम ही निकले
न जाने क्‍यो वही हमको भुलाते है सितम देखो

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी

Views: 765

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 1, 2014 at 10:36am

आदरणीय अखंड भाई , गज़ल खूब सूरत कही है , बधाइयाँ ॥ आ. शिज्जु भाई , निलेश भाई की बातें का खयाल करें ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 1, 2014 at 10:10am

वाह्ह्ह... बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है अखंड जी मजा आ गया पढ़ के ,आ० नीलेश जी का सुझाव सही है ,वहीँ पर मैं भी अटकी हूँ आशियाना होता है आशिया नहीं. आप इस शेर को यूँ कह सकते हैं ----बडे अरमान से जिसने  बनाया आशियाना था 
वही उस आशियाने को  जलाते   है सितम देखो| ---एक बात और ---उला में जिसने आ रहा है तो जलाते आने से दोष पैदा हो रहा है या तो जलाता आता किन्तु वो काफिये में नहीं आ सकता इसलिए आपको जिसने को ही चेंज करना पड़ेगा ----जैसे कर सकते हैं --बडे अरमान से दिल से  बनाया आशियाना था -----   फिलहाल ढेरों बधाई आपको |

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 1, 2014 at 10:03am

आदरणीय अखंड जी, बहुत सुंदर गजल प्रस्तुति.दिली बधाई आपको


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 30, 2014 at 10:24pm

ग़ज़ल अच्छी लगी, आदरणीयभाई निलेश जी ने बढ़िया सुझाव दिया है, बधाई स्वीकार करें। 

Comment by बृजेश नीरज on June 30, 2014 at 9:05pm
बहुत सुन्दर प्रयास। आपको बधाई।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 30, 2014 at 5:59pm

बहुत खूब ग़ज़ल के लिए बधाई ..
.
वही उस आशिये को अब जलाते है सितम देखो... इस आशिए में थोड़ी उलझन है 
वही उस आशियाने को जलाते है सितम देखो... ऐसा बेहतर होगा शायद 
सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 30, 2014 at 3:19pm

आदरणीय अखंड भाई मेहनत आपकी रचनाओं में नज़र आ रही है बहुत बहुत बधाई
एक बात और जाम और प्याला समानार्थी शब्द हैं।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 30, 2014 at 12:41pm

गहमरी जी

अति सुन्दर  i बेहतरीन i

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 30, 2014 at 11:32am

आ० भाई गहमरी जी , ग़ज़ल अच्छी हुई इसके लिए हार्दिक बधाई कबूलें l दूसरे शेर में संभवत्यः कसम की जगह कमस हो गया है इसे दुरस्त कर लें l शुभ -शुभ ....  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service