For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा पंचक. . . . .

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत इसकी प्यास ।
श्वास-श्वास में आस का, रहता हरदम वास ।।

श्वास-श्वास में  आस का, रहता हरदम वास ।
इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।
जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।
अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत  उदास ।।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत उदास ।
अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत इसकी प्यास ।।

सुशील सरना / 22-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 544

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 27, 2022 at 6:19pm

वाह वाह ! 

आदरणीय सुशील सरनाजी, छंदों के सांगोपांग रूप तो हमने बहुरे देखे-सुने हैं. लेकिन इस दोहा-पंचक ने तो सचमुच ही चकित कर दिया है जो आपकी दोहा पर लगातार सशक्त होती पकड़ का परिचायक है. 

हार्दिक बधाई.. बार-बार बधाई.. 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on June 27, 2022 at 3:40pm

//परम आदरणीय चेतन प्रकाश जी मेरी अक्षम्य त्रुटियों को नजरअंदाज करते हुए जिस विशालता का परिचय दिया है उसके लिए हृदय की असीम गहराईयों से हार्दिक आभार । सुझाव पर थोड़ा और मार्गदर्शन करेंगे तो बन्दा आभारी होगा।//

आदरणीय सुशील सरना जी, आप की उक्त टिप्पणी किस संदर्भ में की गई है, स्पष्ट नहीं है, आ. चेतन प्रकाश जी ने कौन से सुझाव दिये हैं? उनकी ऐसी तो कोई टिप्पणी दृष्टिगोचर नहीं हो रही है। 

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2022 at 1:22pm
परम आदरणीय चेतन प्रकाश जी मेरी अक्षम्य त्रुटियों को नजरअंदाज करते हुए जिस विशालता का परिचय दिया है उसके लिए हृदय की असीम गहराईयों से हार्दिक आभार । सुझाव पर थोड़ा और मार्गदर्शन करेंगे तो बन्दा आभारी होगा ।
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on June 26, 2022 at 5:45pm

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, शानदार अंदाज़ में 'दोहा पंचक' के रूप में प्रस्तुत की गयी आपकी यह रचना बेशक कोई नई विधा नहीं है जैसा कि आपने इसका कोई दावा भी नहीं किया है, लेकिन फिर भी आपकी पाँच दोहों की यह रचना जिस रोचक ढंग से सृजित की गयी है अपने आप में अनूठी है जो काव्य के प्रति आपके वैराग्य और विद्वता का पता देती है। 

अपनी विनम्रता और शिष्टता (सुशीलता) का परिचय तो आप अपने नाम के अर्थों को सार्थक सिद्ध करते हुए आदरणीय चेतन प्रकाश जी को दिये गये प्रत्युत्तर से दे ही चुके हैं।

वैसे भी ओ बी ओ के मंच पर दोहा पंचक के रूप में दोहे पहली बार नहीं रचे गये हैं पूर्व में भी ऐसा हो चुका है, दोहा पंचक ही क्यों इस मंच पर दोहा ग़ज़ल के रूप में भी हम सृजना देख चुके हैं, जो ओ बी ओ जैसे मंच की महानता का परिचायक है। 

यदि आप शोध करें, कुछ और प्रयोग करें और नियम-विधान तय करें तो मेरे विचार में इस प्रकार की सृजना को एक नयी विधा के रूप में विकसित कर पहचान दिला सकते हैं, मेरा भरपूर समर्थन और बधाईयाँ आपको। 

Comment by Sushil Sarna on June 23, 2022 at 1:32pm
परम आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सादर प्रणाम - सर सृजन पर आपकी प्रतिक्रिया के संदर्भ में निवेदन है कि प्रथम मैंने पाँच दोहों को पंचक का नाम दिया ये किसी विधा विशेष का नाम नहीं ।दूसरी बात हर दोहा अपने आप में अलग है बस एक प्रयोग किया इसमें मैंने इस मंच पर कहाँ अराजकता की है । न तो मैंने विधा का अनुशासन तोड़ा है और न ही कोई खिलवाड़ किया है ।
आपके दिल को मेरे सृजन से ठेस पहुंची, इसके लिए क्षमा चाहूँगा । यदि इस सृजन से मंच की गरिमा को ठेस पहुंची है और यदि मंच प्रबंधन मण्डल कहता है तो मैं इस सृजन को बिना किसी तर्क के हटाने को तैयार हूँ । सच कहूँ तो इस प्रतिक्रिया से मेरा सृजन भी आहत हुआ है । आप वरिष्ठ हैं अगर इस अनुज से कोई गलती हो गई हो तो क्षमा करें । सादर नमन सर
Comment by Sushil Sarna on June 23, 2022 at 1:15pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by Chetan Prakash on June 23, 2022 at 12:03am

नमन, आ. सुशील सरना साहब, दोहा पंचक जैसी कोई विधा, पहली बार मैंने देखी जिसके पहले दोहे के दूसरे पद को आप, दूसरे दोहे के प्रथम पद केरूप मे, दूसरे दोहे के अन्तिम पद को तीसरे दोहे के पहले पद की तरह, तीसरे दोहे के दूसरे पद को चौथे दोहे के प्रथम पद जैसा और, चौथे दोहे के दूसरे पद को आप अपने पाँचवे दोहे का प्रथम पद बनाकर, साहित्यिक अराजकता का परिचय, ओ बी. ओ जैसे विशुद्ध काव्यात्मक मंच पर दे रहे हैं, आश्चर्य का विषय है ।
वर्तनी में, वीचियाँ, शब्द पहली बार मैंने पढ़ा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 22, 2022 at 6:32pm

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। दोहों को नये अंदाज में प्रस्तुतीकरण बहुत मनोहारी हुआ है । बहुत बहुत हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
35 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।संबंधों को निभा रहे, जैसे हो दस्तूर…See More
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
yesterday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आजकल खूब हो रहा है ये चलन और कभी कभी विवाद भी। आपकी चिरपरिचित शैली में विचारोत्तेजक लघुकथा। बधाई…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service