For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मौसम को .....

सुइयाँ
अपनी रफ्तार से चलती रहीं
समय
घड़ी के बाहर खड़ा खड़ा काँपता रहा
मौसम
समय के काँधे पर
अपनी उपस्थिति की दस्तक देता रहा

बदले मौसम की बयार को छूकर
झुकी टहनियाँ
स्मृतियों में
पिछले मौसम के स्पर्श का रोमांच
सुनाती रहीं
मौसम को

वायु वेग से
रेत पर छोड़े पाँव के निशान
उड़- उड़ कर
अपनी व्यथा सुनाने लगे
मौसम को

झील के पानी में निस्तब्धता
दिखाती रही
वीचियों पर सोये हुए
समय के मौन प्रतिबिम्ब
मौसम को

ठहर गया ठिठक कर मौसम
वृक्ष से
मिट्टी में  गिरे हुए 
असहाय
एक पीले पत्ते को देख कर
एक दर्द की नदी बहने लगी
मौसम के अन्तस में

मौसम ने
समय को देखा
समय ने
घड़ी को
मौसम , समय , घड़ी
तीनों मौन
विधि के विधान के आगे
तीनों मजबूर
चलते ही रहना है
घड़ी ,समय
मौसम को

सुशील सरना /2-8-21

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 364

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 9, 2021 at 2:23pm

आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on August 9, 2021 at 12:13pm
ठीक है सर । हार्दिक आभार सर ।
Comment by Samar kabeer on August 7, 2021 at 2:46pm

मेरी जानकारी में तो सहीह शब्द 'सूई' है, आप देख लें ।

Comment by Sushil Sarna on August 7, 2021 at 1:31pm
आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार सर । आप की शंका काबिले तारीफ है । मेरे विचार से भाव अपने आप में स्पष्ट है । अतः इसमें संशोधन की आवश्यकता महसूस नहीं होती । आपने समय दिया इसके लिए हार्दिक आभार आदरणीय । आपका मार्गदर्शन अमूल्य है ।सादर नमन
Comment by Sushil Sarna on August 7, 2021 at 1:23pm
आदरणीय समीर कबीर साहब , आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार सर । सर मेरे विचार से दोनों ही सही हैं ।शब्दकोश में दोनों का अर्थ /भाव एक ही है ।शेष आप जैसा कहें मैं स्वीकार कर लूँगा । सादर आभार
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on August 4, 2021 at 9:31am

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। 

"वायु वेग से

रेत पर छोड़े पाँव के निशान

उड़- उड़ कर

अपनी व्यथा सुनाने लगे

मौसम को"                  जनाब वाक्य विन्यास की दृष्टि से क्या यहाँ "छोड़े" के स्थान पर  बने, पड़े या 'छोड़े गये' जैसा कुछ नहीं होना चाहिए? 

Comment by Samar kabeer on August 3, 2021 at 6:59pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

'सुइयाँ' या "सूइयाँ"?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनिता मौर्य जी आदाब, अच्छे अशआर कहे आपने, दाद क़ुबूल फ़रमाएं। समर कबीर साहिब से सहमत हूँ।…"
2 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on vijay nikore's blog post श्रध्दांजलि
"आदरणीय विजय निकोर जी , आपकी लेखनी के साथ साथ आपके विचार बहुत गंभीर होते हैं और भावनाएं मानवता से…"
6 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post अपने दोहे .......
"आदरणीय सुशील सरना जी , सच्ची पूजा का नहीं, समझा कोई अर्थ ।बिना कर्म संंसार में,अर्थ सदा है व्यर्थ…"
6 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"अच्छा है , बधाई , सादर."
6 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनिता मौर्य जी आदाब, अच्छे अशआर कहे आपने, दाद क़ुबूल फ़रमाएं। समर कबीर साहिब से सहमत हूँ।…"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Anita Maurya's blog post एक साँचे में ढाल रक्खा है
"मुहतरमा अनीता मौर्य जी आदाब, ओबीओ पर आपकी ये पहली रचना है शायद । अच्छे अशआर हैं, इसे ग़ज़ल इसलिये…"
8 hours ago
Anita Maurya posted a blog post

एक साँचे में ढाल रक्खा है

२१२२ १२१२ २२ फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन एक साँचे में ढाल रक्खा है हम ने दिल को सँभाल रक्खा हैतेरी…See More
8 hours ago
Samar kabeer and Anita Maurya are now friends
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"//अजदाद आदत के रूप में भी हम में रहते हैं// ये तो बच्चे भी जानते हैं, आप मुझे ये समझाइये कि किसी की…"
10 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post हे राम (लघुकथा)-
"हार्दिक आभार आदरणीय रक्षिता जी।"
16 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post हे राम (लघुकथा)-
"हार्दिक आभार आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी।"
16 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - फिर ख़ुद को अपने ही अंदर दफ़्न किया
"मुहतरम अमीरुद्दीन अमीर साहब आदाब, ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया,…"
16 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service