For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तू यार हवा गर है तो मानन्द-ए-सबा रह(९३ )

221 1221 1221 122 

तू यार हवा गर है तो मानन्द-ए-सबा रह

तू है दुआ तो एक असर वाली  दुआ रह

**

तू अब्र है तो बर्क़ से झगड़ा न किया कर

हर हाल में पाबंद-ए-रह-ए-रस्म-ए-वफ़ा रह

**

तू शम'अ है तो ताक़  में रह कर ही  जला कर

तूफ़ान है तो दिल में मेरे यार उठा रह

**

तू याद किसी की है तो हिचकी में समा जा

तू ज़ख़्म अगर दिल का है दिन रात हरा रह

**

आज़ाद तेरे इश्क़ से हो पाऊँ न जानाँ

मेरे लिए ता-ज़िंदगी ज़िन्दान बना रह

**

औरों के सहारे नहीं चलता कभी जीवन

पैरों पे बशर  अपने लगातार खड़ा रह

**

इक बार गरेबाँ में भी है झाँकना बेहतर

इलज़ाम तू दुनिया पे लगाने से बचा रह

**

किरदार को ख़ुर्शीद की मानन्द बना ले

तू हो के पुराना भी शब-ओ-रोज़ नया रह

**

मंज़िल का सफ़र हो मेरा आसान 'तुरंत'आज

तू बन के मेरी राह में नक़्श-ए-कफ़-ए-पा रह

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 495

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 3, 2020 at 1:03pm

आदरणीय Samar kabeer  साहेब , आदाब , आपकी पारखी नज़र की दाद देता हूँ और हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ | 'तू है दुआ तो एक क़ुबूली-सी दुआ रह' में मुझे भी कुछ ग़लत लग रहा था ,लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था |  कर के  वाली आपकी बात भी सही है , सदा लगातार वाला मिसरा भी मुझे कमजोर लग रहा था | इस्लाह के हार्दिक आभार | 

Comment by Samar kabeer on May 3, 2020 at 12:38pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

'तू है दुआ तो एक क़ुबूली-सी दुआ रह'

इस मिसरे में 'क़ुबूली-सी दुआ' वाक्य विन्यास ठीक 

नहीं है,इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:-

'तू एक दुआ है तो असर वाली दुआ रह'

'तू शम'अ है तो ताक में रह कर के जला कर'

इस मिसरे में 'ताक' को "ताक़" कर लें,और यहाँ 'कर' के साथ 'के' का प्रयोग उचित नहीं,मिसरा यूँ कर सकते हैं:-

"तू शम'अ है तो ताक़ में रह कर ही जला कर'

'पैरों पे सदा अपने लगातार खड़ा रह'

इस मिसरे में 'सदा' और 'लगातार' शब्द खटक रहे हैं,'सदा' की जगह "यहाँ" शब्द उचित होगा ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 2, 2020 at 7:03pm

सुन्दर एवं प्रेरक शब्दों के लिये दिल से आभार ,आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी | सेवानिवृत आदमी के लिए कुछ काम धाम तो करना होता है नहीं , बस पढ़ना और किसी न किसी बह्र में रोज़ लिखना यही काम है आजकल | जो तुक्कामारी होती है उसे मित्रों के सामने प्रस्तुत कर देता हूँ बस | 

Comment by नाथ सोनांचली on May 2, 2020 at 6:50pm

आद0 गिरधर सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। मैं तो आश्चर्य चकित हो जाता हूँ कि आप किस तरह इतनी ग़ज़ल कह पाते हैं वह भी प्रतिदिन। आपके शेर भी गजब के होते हैं। बधाई स्वीकार कीजिए।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 2, 2020 at 11:37am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी ,

आपकी पसंद प्रतिक्रिया उत्साहवर्धन के लिए अंतस से आभार संग नमन |

 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 2, 2020 at 11:31am

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Jan 17
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Jan 17
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service