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राजस्थानी साहित्य

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राजस्थानी साहित्य

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Location: विश्व
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Latest Activity: Apr 26

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हेली गीत "परदेशाँ जाय बैठ्या"

हेली गीत "परदेशाँ जाय बैठ्या"परदेशाँ जाय बैठ्या बालमजी म्हारी हेली!ओळ्यूँ आवै सारी रात।हिया मँ उमड़ै काली कलायण म्हारी हेली!बरसै नैणां स्यूँ बरसात।।मनड़ा रो मोर करै पिऊ पिऊ म्हारी हेली!पिया मेघा ने दे…Continue

Tags: हेली_गीत

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Apr 26.

जकड़ी गीत "आसरो थारो बालाजी"

जकड़ी गीत "आसरो थारो बालाजी"आसरो थारो बालाजी, काज सब सारो बालाजी।भव सागर से पार उतारो, नाव फंसी मझ धाराँ जी।।जद रावण सीता माता नै, हर लंका में ल्याओ,सौ जोजन का सागर लाँघ्या, माँ को पतो लगायो।आसरो थारो…Continue

Tags: राजस्थानी, जकड़ी

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Apr 26.

गीत (रोज सुणै है कै)

रोज 'सुणै है कै' कै बाळो जद बोल्यो 'सुण धापाँ'।सुणकै मुळकी, हुयो हियो है तब सै बागाँ बागाँ।आज खटिनै से बागाँ माँ ये कोयलड़ी कूकी,पाणी सिंच्यो आज बेल माँ पड़ी जकी थी सूकी,मुख सै म्हारो नाँव सुन्यो तो…Continue

Started by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' Aug 30, 2020.

एक राजस्थानी मुसल्सल ग़ज़ल -यादड़ल्याँ रा घोड़ां ने थे पीव लगावो एड़ |

एक राजस्थानी मुसल्सल ग़ज़ल ***यादड़ल्याँ रा घोड़ां ने थे पीव लगावो एड़ | सुपणे मांयां आय पिया जी छोड़ो म्हासूँ छेड़ | १| ***इंया तो म्हें गेली प्रीतड़ली में थांरी भोत चालूँ थांरे लारे लारे ज्यूँ सीधी सी भेड़…Continue

Started by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' Jan 11, 2019.

सावण सूखो क्यूँ !

सावण सूखो क्यूँ !इबकाळ रामजी न जाण के सूझी, क बरसण क दिनां मं च्यारूँ कान्या तावड़ की  बळबळती सिगड़ी सिलागायाँ बठ्यो है | जठे देखो बठे…Continue

Started by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' Mar 4, 2016.

बिठाऊँ केइया नाव म- - -- - - (राजस्थानी गीत)

बिठाऊँ केइया नाव म- - -- - - छोटी सी या म्हारी  है नाँव,जादू भरया लागे थारा पाँव |मनै डर सता रह्यों है राम,थानै बिठाऊँ केइया नाँव में | म्हारी तो या लकड़ी री नाँव,थे बणाद्यों भाटा न भी नार |ई सूं मनै…Continue

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला Jun 27, 2015.

राजस्थानी कविता उत्सव 26 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित 1 Reply

राजस्थानी साहित्य प्रेमियों को यह जानकार प्रसन्नता होगी कि साहित्य अकादमी, दिल्ली और राजस्थान अध्ययन केंद्र, राजथान यूनिवर्सिटी, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 26 से 28 फरवरी,2015 तक राजस्थान…Continue

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला. Last reply by डिम्पल गौड़ Feb 27, 2015.

धरती रंग सुरंगी ...

धरती रंग सुरंगी सी मन मां रस जगावे रे ऊँचा ऊँचा टीबा इण रांजीवण री आस जगावे रेलहर लहर लहरियों उड़ उड़आसमान पर छावे रेपंछी भी तो गीत धरा का मधुर स्वरां म गावे रे धरती रंग सुरंगी सी मन मां रस जगावे…Continue

Tags: कविता

Started by डिम्पल गौड़ Feb 15, 2015.

कस्तूरी री महक 1 Reply

थारे बिण म्हारो जियो रे  भटके सुण क्यूं न  लेवे   तू म्हारी पुकार म्हाने रात्यां में नींद कोणी  आवे रे थारी ओल्युं ढोला म्हाने जगावे  रे बन मां व्याकुल घुमे रे हिरणीकस्तूरी री महक  लागे मनभावन आ…Continue

Tags: .., रचना, राजस्थानी

Started by डिम्पल गौड़. Last reply by डिम्पल गौड़ Feb 2, 2015.

मीरा बाट जोवे थारी ..... 2 Replies

म्हारी आँख्यां  बाट जोवे थारी ओ  सावरिया म्हारा  गिरधारी मीरा रे मन री  बातां समझे रे कुणआ तो दरस निहारे थारी ओ बनवारीवीणां रां तार बाज्ये जद जद नाच्युं म तो प्रेम म  दिवानी होकर लीलाधर री लीला जाणे…Continue

Started by डिम्पल गौड़. Last reply by डिम्पल गौड़ Jan 31, 2015.

 

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