For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

DR ARUN KUMAR SHASTRI
  • Male
  • Delhi ncr
  • India
Share

DR ARUN KUMAR SHASTRI's Friends

  • Chetan Prakash
  • शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप"
  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • pratibha pande
  • योगराज प्रभाकर
 

DR ARUN KUMAR SHASTRI's Page

Latest Activity

शुचिता अग्रवाल "शुचिसंदीप" and DR ARUN KUMAR SHASTRI are now friends
May 3
DR ARUN KUMAR SHASTRI replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-124
"लेखक डॉ अरुण कुमार शास्त्री [ एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-124 में सहभागिता के लिए विधा *हास्य कविता* शीर्षक -** म्हारो वेलेंटाइन डे ** मैया मन्ने भी मनानो से अंग्रेजी त्यौहार के बोलें से छोरा छोरी प्रेम दिवस की…"
Feb 14
Samar kabeer commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post प्रतिकर्ष
"जनाब डॉ.अरुण कुमार शास्त्री जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post प्रतिकर्ष
"आ. भाई अरुण जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 6
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted a blog post

प्रतिकर्ष

तेरे आकर्षण का पल पल प्रतिकर्ष सताता हैसामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //नदिया के पास जाऊं तो शीतल हो जाऊंसाथ दो अगर तो मैं मुस्कान बन जाऊं //आकर्षक सा छद्म आव्हान मुझे बुलाता है //सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //तुमसे कहने का मैं कोई मौका न छोड़ताबस एक इशारा मिलता तो ही तो बोलता //ऊहा पोह के सागर में अब गोता खाता हूँसामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //दर्द की बात न करूंगा दर्द अब बेमानी हुआचाय की चुस्की में मैं इसको बिसराता हूँ //तुम्हारा साथ पा जाऊँ खुदा से मिल जाऊंसामजिक ताना बाना…See More
Feb 5
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted a blog post

एक नज़्म - बे - क़ायदा

वक़्त मिलता है कहाँ आज के मौसुल में रक़ीबा दर - ब - दर डोलने का हुनर मंद है ये ख़ाक सार इक अदद पेट ही है जिसने न जाने कितनी जिंदगियां लीली है तुखंम उस पर कभी भरता नहीं हर वक्त सुरसा सा मुँह खोल के रखता है न जाने किस कदर इसमें ख़ज़ीली हैं। ईंते ख़ाबां मुलम्मा कौन सा इस पर चढ़ा होगा दिखाई भी तो नहीं देता मगर इक बात मुझको इसके जानिब ये ज़रुर कहनी है। अगरचे ये नहीं होता बा कसम ये दुनिया नहीं होती ये जो फौज इंसानो को दीखती है ना हर कदम जर्रे जर्रे पर बा खुदा ये बिना इसके तो क्या फिर यहाँ होती थी बहुत सोचा…See More
Feb 4
Samar kabeer left a comment for DR ARUN KUMAR SHASTRI
"जनाब अरुण कुमार जी,ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका धन्यवाद ।"
Feb 1
DR ARUN KUMAR SHASTRI left a comment for Samar kabeer
"प्रिय मित्र समीर साहिब जी गज़ब लिखा ख़ास कर ये पंक्तियाँ मुझे बेहद सुकून दे गई आग तो सर्द हो चुकी कब की क्यों अबस राखदान फूँकता है हुक्म से रब के ल'अल मरयम का देखो मुर्दे में जान फूँकता है डॉ अरुण कुमार शास्त्री // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त"
Jan 31
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नज़्म (कृषि बिल पर किसानों के शकूक-ओ-शुब्हात)
"behad khoobsoorat line bn bdi hai aamir saahib  रखेंगे हम ज़ख़ीरा कर ज़मीं उगलेगी जो सोना किसी का बस न कुछ होगा कि ख़ुद-मुख़्तार यारों हम "
Jan 31
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नज़्म (कृषि बिल पर किसानों के शकूक-ओ-शुब्हात)
"janaab ameerudeen  amir sahib aapki nazam bahtreen umdaa lagi mujhe, khoob padan aaiyee   जनाब चेतन प्रकाश जी  ko आदाब karte huye mujhe bhi inko salaam behjnaa hai ye jab likhte hain to ooper neeche daaye baaye kuch nhi dekhte…"
Jan 31
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post निष्ठुर नगर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"नदी सूखी हुई  कहती  है  प्यासे खेत सेतेरे हिस्से का पानी पी गया निष्ठुर नगर।३प्रिय मित्र लक्ष्मण धामी जी गज़ब लिखा ख़ास कर ये पंक्तियाँ मुझे बेहद सुकून दे गई डॉ अरुण कुमार शास्त्री // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त"
Jan 31
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post नज़्म
"आ. भाई अरुण जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jan 31
Samar kabeer commented on DR ARUN KUMAR SHASTRI's blog post नज़्म
"जनाब अरुण कुमार जी आदाब, सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 30
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted a blog post

नज़्म

बेबाक दिलबरी का आलम न पूँछिये। हम से मोहब्बत का बस हुनर सीखिये ।दिल में लगी हो आग तो सेक लीजिये। वरना लगा के दाग यूँ सितम न कीजिये। तारीफ़ कीजिये या के इलज़ाम दीजिये। गोया के रह-बरी में शिरक़त तो कीजिये। आलम ये आशिकी का चला नजाए फ़ुज़ूल। दो चार मिसल दो चार मिसल हाय अल्लाह। एय सनम अबके साल तो छाप ही दीजिए। किसी के गम में ग़मख्वार होना कोई बुरी बात नहीं। लेकिन फ़नाह होकर के क्या उखाड़ लीजिये बेबाक दिलबरी का आलम न पूँछिये। हम से मोहब्बत का बस हुनर सीखिये।  दिल में लगी हो आग तो सेक लीजिये। वरना लगा के दाग…See More
Jan 28
DR ARUN KUMAR SHASTRI commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- रूह के पार ले जाती रही
"गजल में आपकी सादगी का गुमां मुझको हुआ है //लम्हा लम्हा हरफ ब हरफ बानगी से जुडा हुआ है // दीद का अचरज उफनता इसके पहले //  शिष्टता ने रोक मुझको लिया है  // एक अबोध बालक // अरुण अतृप्त "
Jan 25
DR ARUN KUMAR SHASTRI posted blog posts
Jan 21

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI NCR
Native Place
DELHI
Profession
EMINENT CONSULTANT
About me
LOVE THY GOD AND HUMANITY VASUDHAIV KUTUMBKAM

DR ARUN KUMAR SHASTRI's Photos

  • Add Photos
  • View All

DR ARUN KUMAR SHASTRI's Blog

प्रतिकर्ष

तेरे आकर्षण का पल पल प्रतिकर्ष सताता है

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

नदिया के पास जाऊं तो शीतल हो जाऊं

साथ दो अगर तो मैं मुस्कान बन जाऊं //

आकर्षक सा छद्म आव्हान मुझे बुलाता है //

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

तुमसे कहने का मैं कोई मौका न छोड़ता

बस एक इशारा मिलता तो ही तो बोलता //

ऊहा पोह के सागर में अब गोता खाता हूँ

सामजिक ताना बाना मिरी उलझन बढ़ाता है //

दर्द की बात न करूंगा दर्द अब बेमानी हुआ

चाय…

Continue

Posted on February 2, 2021 at 4:45pm — 2 Comments

एक नज़्म - बे - क़ायदा

वक़्त मिलता है कहाँ

आज के मौसुल में

रक़ीबा दर - ब - दर

डोलने का हुनर मंद है

ये ख़ाक सार

इक अदद पेट ही है

जिसने न जाने कितनी

जिंदगियां लीली है

तुखंम उस पर कभी भरता नहीं

हर वक्त सुरसा सा

मुँह खोल के रखता है

न जाने किस कदर

इसमें ख़ज़ीली हैं।

ईंते ख़ाबां मुलम्मा कौन सा

इस पर चढ़ा होगा

दिखाई भी तो नहीं देता

मगर इक बात मुझको

इसके जानिब ये ज़रुर कहनी है।

अगरचे ये नहीं होता

बा कसम ये दुनिया नहीं होती

ये जो…

Continue

Posted on February 2, 2021 at 4:30pm

नज़्म

बेबाक दिलबरी का आलम न पूँछिये। 

हम से मोहब्बत का बस हुनर सीखिये ।

दिल में लगी हो आग तो सेक लीजिये। 

वरना लगा के दाग यूँ सितम न कीजिये। 

तारीफ़ कीजिये या के…

Continue

Posted on January 25, 2021 at 10:00pm — 2 Comments

आणविक अनुप्रस्थान

आणविक अनुप्रस्थान लघु कथा



वेदना से संवेदना हो तो मानवीय प्रकल्प उपजता है ऐसा मेरा सोचना था , तुम क्या सोचती हो इसी विषय में मैं अनभिज्ञ था , फिर एक दिन तुम बिना बताये कहीं चली गई। आभास था जाओगी और वो आभास प्रकटतः घटित भी हुआ। मुझे लेकिन इस अजन्मे विरह का अभ्यास किंचित न था सो मैं खिन्नता से खिसियानी बिल्ली अर्थात बिल्ले सा भ्रमित मन से एकांत में उतर गया। अब तक अपने…

Continue

Posted on January 12, 2021 at 3:29am

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:52pm on February 1, 2021, Samar kabeer said…

जनाब अरुण कुमार जी,ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका धन्यवाद ।

At 12:39pm on September 12, 2020,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

कृपया अपनी रचना यहाँ पोस्ट करें:

http://www.openbooksonline.com/forum/topics/119-1?xg_source=activity&xg_raw_resources=1

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी नमस्कार।  प्रदत्त विषय पर अनुकूल छंद रचना के लिए बहुत बहुत…"
4 minutes ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया दीपांजलि दुबे जी नमस्कार,  प्रदत्त चित्र एवं छंद पर बढ़िया प्रयास है।  बाकी आदरणीय…"
2 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"नदी हो गया है यहाँ एक रस्ता  यही सोचती पीठ पे लाद बस्ता  यहाँ मैं खड़ी हूँ वहाँ…"
2 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब दयाराम मेठानी जी आदाब, प्रदत्त चित्र पर सुंदर छंद रचे हैं, बधाई स्वीकार करें । 'कहे क्या…"
6 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरमा दीपांजलि दुबे जी आदाब, प्रदत्त चित्र पर छंदों का अच्छा प्रयास हुआ है,लेकिन कहीं कहीं…"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी दूसरी प्रस्तुति ने तो एकबारगी चकित कर दिया है. कथ्य, शिल्प, भाव तीनों…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश भाई, आपने प्रदत्त चित्र के अनुरूप सार्थक प्रयास किया है.  अंतिम दो पंक्तियों का…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका आग्रह बाल सुलभ है, आदरणीय. हृदय पुलकित हो रहा है.  आशय यह है कि जो जैॊा है, उसे वैसे ही…"
7 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"सभी सम्मानित पाठकगण से सादर निवेदन है कि चूंकि गुणी और विद्वज्जनों की टिप्पणियों और सुझावों के आलोक…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई आशीष जी, सादर अभिवादन। दूसरी प्रस्तुति पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद."
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। इस प्रस्तुति की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई समर जी, कोई बात नहीं। आप अग्रज और अनुभवी हैं। क्षमा मागकर शर्मिंदा न करें। मेरे लिए यही बहुत…"
8 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service