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C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"
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C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"माँ पर लिखी गई एक बेहतरीन ग़ज़ल | बधाई स्वीकारें लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर  जी | "
20 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,सुन्दर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार | इसी तरह प्रेम बनाए रखिएगा | "
May 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आ. आकांशी जी, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
May 8
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सबसे बड़े डॉक्टर (लघुकथा): डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, आपकी सार्थक लघुकथा पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई | वर्तमान में इस प्रकार के लेखन की जरूरत है ताकि लोगों का गिरा हुआ मनोबल उठाया जा सके | - शून्य आकांक्षी "
May 7
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" and Pratibha Pandey are now friends
May 7
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||. कभी धूप कुहरा घना, कभी दुखी मुस्कान | खेल खेलती जिंदगी, कभी मान अपमान ||. कोस रहा क्यों भाग्य को, बहा रहा क्यों नीर | 'शून्य' मार्ग श्रम का पकड़, बदलेगी तक़दीर ||.घन छाए साहित्य पर, कलम सहे अपमान । लेन-देन से हो रहा, कवि, शायर, सम्मान ॥.हो उमंग नूतन चले, कलम इस तरह यार । फूले छंदों का सकल, सनातनी परिवार ॥. - शून्य आकांक्षी  . ( मौलिक एवं अप्रकाशित )See More
May 7
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion आयास चाहती है दोहे की सिद्धि    :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"वाह वाह श्रीवास्तव जी | आपने बहुत सुन्दर व्याख्या की है खास तौर से तीसरे त्रिकल को बहुत सरलता से समझाया है | प्रायः दोहाकारों से यहाँ ही गलती होती है | आपको बधाई और धन्यवाद भी |  - शून्य आकांक्षी "
Jun 2, 2020
नाथ सोनांचली commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
"आद0 शून्य आकांक्षी जी सादर अभिवादन।  कुछ बातों पर गौर कीजिए। मगर को म+गर या मग+र में किस तरह पढ़ते हैं।  इस पर गौर कीजिए। जब आप पढ़ेगी तो देखेगी की मगर को म+गर अर्थात इसकी मापनी 12 हुई। इसी तरह आपको अभी अभ्यास करना है। लेखन के लिए बधाई…"
Nov 28, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
"आ. शून्य आकांक्षी जी,रचना का प्रयास अच्छा है। हार्दिक बधार्ई स्वीकार करें । साथ ही भाई समर जी की बात पर पुनः विचार करें। मगर की मापनी १२ है इसे 'किन्तु' करके ठीक किया जा सकता है। भटकना' भी 122 है इसे प्रतिस्थापित करने का प्रयास…"
Nov 27, 2019
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
" आदरणीय  Samar kabeer साहब सादर प्रणाम | आपने मेरी लिखी सरस्वती वंदना पढ़ी, मुझे बहुत प्रसन्नता हुई | आपने मेरे प्रयास को सराहा और बधाई दी | आपका हार्दिक आभार सर |  दी गई मापनी पर मैं अपने विचार आपके सामने रखने की…"
Nov 27, 2019
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
"आदरणीय  Samar kabeer  साहब सादर प्रणाम | आपने मेरी लिखी सरस्वती वंदना पढ़ी, मुझे बहुत प्रसन्नता हुई | आपने मेरे प्रयास को सराहा और बधाई दी | आपका हार्दिक आभार सर |  दी गई मापनी पर मैं अपने विचार आपके सामने रखने की कोशिष…"
Nov 27, 2019
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
"आदरणीय    साहब सादर प्रणाम | आपने मेरी लिखी सरस्वती वंदना पढ़ी, मुझे बहुत प्रसन्नता हुई | आपने मेरे प्रयास को सराहा और बधाई दी | आपका हार्दिक आभार सर |  दी गई मापनी पर मैं अपने विचार आपके सामने रखने की कोशिष कर रहा हूँ…"
Nov 27, 2019
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
"आदरणीय  Samar kabeer  साहब सादर प्रणाम | आपने मेरी लिखी सरस्वती वंदना पढ़ी, मुझे बहुत प्रसन्नता हुई | आपने मेरे प्रयास को सराहा और बधाई दी | आपका हार्दिक आभार सर |  दी गई मापनी पर मैं अपने विचार आपके सामने रखने की कोशिष…"
Nov 27, 2019
Samar kabeer commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post सरस्वती वंदना
"जनाब शून्य आकांक्षी जी आदाब,रचना का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मगर रचना प्रस्फुटित होती न इस संसार में' 'भटकते कमजोर पीड़ित लेखनी बल दीजिए' ये पंक्तियाँ दी गई मापनी पर नहीं हैं,देखियेगा ।"
Nov 25, 2019
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" posted a blog post

सरस्वती वंदना

(2122 2122 2122 212 ).वाग्देवी माँ हमें अपनी शरण में लीजिए | ज्ञान के जलने लगें माता हृदय में अब दिए ||   दर्द का सागर डुबाता है हमें मझधार में |  मगर रचना प्रस्फुटित होती न इस संसार में | भटकते कमजोर पीड़ित लेखनी बल दीजिए | ज्ञान के जलने लगें माता हृदय में अब दिए ||     शब्द में हो शक्ति दिल में पाक मैया भावना | प्रेम की गंगा बहे निष्पाप तन-मन कामना | द्वेष के बादल छँटें नहिं घृणा से कोई जिए | ज्ञान के जलने लगें माता हृदय में अब दिए ||  गिरि बहुत ऊँचे हुए माँ शारदा व्यवधान के | वन सघन षड्यंत्र…See More
Nov 20, 2019
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति का संत्रास ...
"Sushil Sarna जी,सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें | "
Aug 14, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Kota, Rajasthan
Native Place
Mathura
Profession
Retired from Indian Railways
About me
Reading & Writing Literature.

C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s Blog

दोहे

देना दाता वर यही, ऐसी हो पहचान | 
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख सब, बोलें यह इंसान ||
कभी धूप कुहरा घना, कभी दुखी मुस्कान | 
खेल खेलती जिंदगी, कभी मान अपमान ||…
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Posted on May 6, 2021 at 4:00pm — 2 Comments

सरस्वती वंदना

(2122 2122 2122 212 )
.
वाग्देवी माँ हमें अपनी शरण में लीजिए | 
ज्ञान के जलने लगें माता हृदय में अब दिए ||  
 …
Continue

Posted on November 19, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

मुक्तक

ललालाला ललालाला ललालाला ललालाला

.

न मंदिर में मिले ईश्वर,  गुफाओं में न जाने से .

न भूखे  पेट रहने से, न गंगा ही नहाने से .

उसे पाना अगर सच में, हृदय में झाँक कर देखो ,

मिले रैदास, मीरा - प्रेम की बगिया खिलाने से .

.

कभी है धूप जीवन में, कभी मिलते यहाँ साए.

सहारे को नहीं ढूँढ़ो, मिले या फिर न मिल पाए. 

गिराती शाख कैसे फल, धरा पर सीख लो…

Continue

Posted on August 3, 2019 at 2:00pm — 2 Comments

दुर्मिल सवैया

सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा 
----------
जबसे वह जीत चुनाव लिए, तब से नित रौब जमावत हैं | 
उनके चमचे घर आकर के,…
Continue

Posted on July 17, 2019 at 7:30pm — 3 Comments

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At 12:35am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय शुन्य आकांक्षी जी प्रणाम एवम् बहुत बहुत धन्यवाद् ! आभारी हूँ आपका
At 3:49pm on March 14, 2014, Omprakash Kshatriya said…

शून्य आकांक्षी जी जोरदार दोहों के लिए मेरी बधाई स्वीकार करे 

 
 
 

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"खूबसूरत ग़ज़ल के लिए सहृदय शुक्रिया आ धामी सर बेहद खूबसूरत ग़ज़ल है माँ पर"
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