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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सवालों का ऐसे बता हल किधर है.
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 30
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मानता हूँ तम गहन सरकार लेकिन-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  अत्यंत मार्मिक गज़ल हुई है, बधाई स्वीकारें "
Apr 29
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

सवालों का ऐसे बता हल किधर है.

 मापनी १२२ १२२ १२२ १२२ नदी का वो बहता हुआ जल किधर है.सवालों का ऐसे बता हल किधर है.  घुसी जा रहीं आज खेतों में सडकें,डराता था हमको वो जंगल किधर है.  कहाँ से पवन अब बहे मंद शीतल, चमेली, ये बेला, ये संदल किधर है. न बालों में गजरे, न मेहँदी की खुशबू,महावर, ये पायल, ये काजल किधर है.   कभी पौंछ दे आंसुओं को हमारे,बता दे मुझे माँ वो आँचल किधर है.  धरा की तपन को मिटा दे जरा सा,पता ही नहीं कुछ वो बादल किधर है. पली आस कब से है अच्छे दिनों की, न देता दिखाई कि वो कल किधर है."मौलिक एवं अप्रकाशित" See More
Apr 29
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"आदरणीय  Aazi Tamaam जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Apr 27
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई का दिल से शुक्रिया "
Apr 27
Aazi Tamaam commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीय बसंत जी सुंदर ग़ज़ल है सादर"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है नयी रदीफ के साथ । हार्दिक बधाई ।"
Apr 26
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख लगी है इनमें जो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल )
"सादर  नमस्कार आदरणीय धामी जी  अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकारें "
Apr 26
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल

एक ग़ज़ल  चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है. सिंदूर भर के मांग में सजना बसंत है. चारों तरफ घिरी रहें यादों की बदलियाँ, फिर उनके साथ रात में जगना बसंत है.  बिखरी हुई हो चाँदनी नदिया के तीर पर,फिर चाँद का चकोर को तकना बसंत है. मौसम का क्या उसे तो बदलना है उम्र भर,हर पल तुम्हारे साथ में रहना बसंत है. पूछा ‘बसंत’ क्या है? तो राधा ने यह कहा,  माला किशन के नाम की जपना बसंत है."मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
Apr 24
बसंत कुमार शर्मा commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार  बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको "
Apr 21
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं - ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाफजाई का शुक्रिया "
Apr 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं - ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन। खूबसूरत सदाबहार गजल के लिए हार्दिक बधाई।"
Apr 20
बसंत कुमार शर्मा commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने कहीं पे लौट आ बचपन क्या लिख दिया-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय धामी जी सादर नमस्कार  अद्भुत गजल हुई है आदरणीय  आनंद आ गया "
Apr 20
बसंत कुमार शर्मा commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय सादर नमस्कार, उत्तम दोहे हुए हैं आपके, बधाई  एक दोहे में लय भंग हो रही है, यदि उचित लगे तो यों कर सकते हैं  केसे मन का हो भला , बुझे न मन की प्यास ।4।"
Apr 20
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं - ग़ज़ल
"आदरणीय Aazi Tamaam जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
Apr 20
Aazi Tamaam commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं - ग़ज़ल
"भाव पूर्ण सुंदर ग़ज़ल है सादर प्रणाम अदर्णीय बसंत जी बधाई स्वीकार करें"
Apr 20

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

सवालों का ऐसे बता हल किधर है.

 मापनी १२२ १२२ १२२ १२२ 

नदी का वो बहता हुआ जल किधर है.

सवालों का ऐसे बता हल किधर है. 

 

घुसी जा रहीं आज खेतों में सडकें,

डराता था हमको वो जंगल किधर है. 

 

कहाँ से पवन अब बहे मंद शीतल, 

चमेली, ये बेला, ये…

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Posted on April 29, 2021 at 9:26am — 1 Comment

चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल

एक ग़ज़ल 

 

चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है. 

सिंदूर भर के मांग में सजना बसंत है.

 

चारों तरफ घिरी रहें यादों की बदलियाँ, 

फिर उनके साथ रात में जगना बसंत है. 

 

बिखरी हुई हो चाँदनी नदिया के तीर…

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Posted on April 22, 2021 at 8:28pm — 4 Comments

यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं - ग़ज़ल

मापनी  १२२२ १२२२ १२२२ १२२ 

 

धवल हैं वस्त्र, नीयत के मगर गंदे बहुत हैं 

चिरैया देख! दाने कम उधर फंदे बहुत हैं 

 

मचा है शोर मँहगाई का चारों ओर लेकिन 

यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं 

 …

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Posted on April 19, 2021 at 12:35pm — 4 Comments

रश्मियाँ दिखतीं नहीं - ग़ज़ल

मापनी  २१२२ २१२२ २१२२ २१२ 

उपवनों में फूल कलियाँ तितलियाँ दिखतीं नहीं 

रोज कोयल खोजती अमराइयाँ दिखतीं नहीं 

 

हो गई आँखों से ओझल ऋतु बसंती प्यार की

तप रहा मन का मरुस्थल बदलियाँ दिखतीं नहीं

 

कौन सा यह आवरण ओढ़ा हुआ है आपने…

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Posted on April 16, 2021 at 1:19pm — 10 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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