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बहुत गहरा गए हैं अंधेरे हर सू

बहुत गहरा गए हैं अंधेरे हर सू

रोशनी की किरन अब कहां खोजें

 

गुम हो गई है कहां दुनिया में

आओ मिल के हम वफा खोजें

 

खतावार जब कि थे हम दोनों ही

क्यूं न इक जैसी ही सजा खोजें

 

जीत जाएं न कहीं दूरियां हमसे

आओ मिल के अपनी खता खोजें

 

नफरतों के वास्ते न जगह बाकी हो

पूरे जहान में एसा कोई पता खोजें

-----प्रियंका

 

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment

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Comment by vijay nikore on August 18, 2014 at 2:24am

 

 भाव बहुत सुन्दर हैं। बधाई, आदरणीया प्रियंका जी।

 

 

Comment by Meena Pathak on August 13, 2014 at 3:01pm

क्या बात !!

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2014 at 9:29am
गुम हो गई है कहां दुनिया में
आओ मिल के हम वफा खोजें
प्रभावशाली , सुन्दर , बधाई .
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 13, 2014 at 9:27am

बहुत सुंदर रचना ..बधाई आपको आदरणीया प्रियंका जी

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