For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रखकर जो नाम राम का -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/२२२/१२१२

**

जो भी वतन में दोस्तो दिखते कलाम हैं
हर वक्त उसकी शान में कहते सलाम हैं।१।

**
दुत्कार उनको हम रहे केवल सुनो यहाँ
जयचन्दी नीयतों में  जो  रहते इमाम हैं।२।

**
उनका भी मान है  नहीं  केवल लताड़ है
रखके जो नाम राम का रावण से काम हैं।३।

**
नेता  सभी  हैं  एक  से  जो  फूट चाहते
समझेंगे क्या कभी इसे जो लोग आम हैं।४।

**
भाई भरत सा बनके ढब रहना कुबूल है
आगे तो आइए सभी जितने भी राम हैं।५।

**
नेता हुए हैं अब तलक जितने भी देश में
ये  मान  बैठे  हैं  हमें  इन  के  गुलाम हैं।६।

**
मौलिक.अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'

**
*इमाम - अगुआ/नेतृत्वकर्ता

Views: 108

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2020 at 11:06am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2020 at 11:05am

आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार।

Comment by TEJ VEER SINGH on February 15, 2020 at 12:10pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'जी। बेहतरीन गज़ल।

नेता हुए हैं अब तलक जितने भी देश में
ये  मान  बैठे  हैं  हमें  इन  के  गुलाम हैं।६

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on February 14, 2020 at 4:33pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई, आदाब। बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है आपने, हार्दिक बधाई क़ुबूल करें।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 11, 2020 at 12:03pm

आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।

Comment by vijay nikore on February 9, 2020 at 4:15pm

नमस्ते, मित्र लक्ष्मण जी, गज़ल अच्छी कही। बधाई।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 8, 2020 at 6:39pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार ।

Comment by Samar kabeer on February 8, 2020 at 3:18pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on Dimple Sharma's blog post वहाँ एक आशिक खड़ा है ।
"हार्दिक बधाई आदरणीय डिंपल शर्मा जी।अच्छी गज़ल। गुलाबों में कांटे बहुत है ।गुलाबों से मन भर रहा है…"
13 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post अपराध बोध - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय डिंपल शर्मा जी।अच्छा विश्लेषण किया आपने लघुकथा का।"
16 minutes ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post अपराध बोध - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदब।"
19 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"//हिन्दी वर्णमाला में आज भी नुक्ता वाले अक्षर नहीं हैं। मैंने आम बोलचाल में आने वाले शब्दों का…"
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय Ram Awadh VIshwakarma साहिब, आपको ग़ज़ल की पेशकश पर बधाई। जनाब मैं ये समझने में पूरी तरह…"
9 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post करेगा तू क्या मिरी वकालत (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, जी नहीं नहीं, मैं भी नौ-मश्क़ शाइर ही हूँ, इसलिए कई बार…"
10 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, ग़ज़ल तक आने के लिए और अपनी अमूल्य उत्साहवर्धक टिप्पणी देने…"
10 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जो तेरी आरज़ू (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, आपकी हौसला-अफ़ज़ाई के लिए तह-ए-दिल से आपका आभारी हूँ! आप जिस…"
10 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय दयाराम जी आदाब। ग़ज़ल पसन्द करने के लिए सादर आभार"
10 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीया डिम्पल शर्मा जी आदाब। ग़ज़ल सराहना एवं उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
10 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी। सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर टिप्पणी एवं उत्साह वर्धन के लिए हृदय से आभार"
10 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service