For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Naveen Mani Tripathi's Blog (302)

ग़ज़ल

2122 2122 2122

अपनी  रानाई  पे  तू  मग़रूर  है  क्या ।

बेवफ़ाई  के  लिए  मज़बूर  है  क्या ।।

कम न हो पाये अभी तक फ़ासले भी ।।

तू  बता  उल्फ़त  की  दिल्ली  दूर  है क्या ।।

दूर तक चर्चा है क़ातिल के हुनर की ।

वो ज़रा  सी उम्र में मशहूर  है  क्या ।।

तोड़ देना दिल किसी का बेसबब ही ।

शह्र   का   तेरे  नया  दस्तूर  है  क्या ।।…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 9, 2020 at 3:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल-महफ़िल में वो बाहर जब आकर चली गई

हासिल ग़ज़ल

221 2121 1221 212

बेचैनियों का दौर बढा कर चली गयी ।

महफ़िल में वो बहार जब आ कर चली गयी ।।

उसकी मुहब्बतों का ये अंदाज़ था नया ।

अल्फ़ाज़ दर्दो ग़म के छुपाकर चली गयी।।

उसको कहो न बेवफ़ा जो मुश्क़िलात में ।

कुछ दूर मेरा साथ निभाकर चली गयी ।।

साक़ी भुला सका न उसे चाहकर भी मैं ।

जो मैक़दे में जाम पिलाकर चली गयी ।।

हैरां थी मुझ में देख के चाहत का ये शबाब…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on June 18, 2020 at 1:37pm — No Comments

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

यूँ उसके हुस्न पे छाया शबाब धोका है ।।1

मेरी नज़र ने जिसे बार बार देखा है ।।



वफ़ा-जफ़ा की कहानी से ये हुआ हासिल।

था जिसपे नाज़ वो सिक्का हूजूर खोटा है ।।2

उसी के हक़ की यहां रोटियां नदारद हैं ।

जो अपने ख़ून पसीने से पेट भरता है ।।3

खुला है मैकदा कोई सियाह शब में क्या ।

हमारे शह्र में हंगामा आज बरपा है ।।4

निकल पड़े न किसी दिन सितम की हद पर वो ।

जो अश्क़ मैंने अभी तक सँभाल रक्खा है…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on June 10, 2020 at 9:06pm — 6 Comments

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

दिल सलामत भी नहीं और ये टूटा भी नहीं ।

दर्द बढ़ता ही गया ज़ख़्म कहीं था भी नहीं ।।

काश वो साथ किसी का तो निभाया होता ।

क्या भरोसा करें जो शख़्स किसी का भी नहीं ।।

क़त्ल का कैसा है अंदाज़ ये क़ातिल जाने ।

कोई दहशत भी नहीं है कोई चर्चा भी नहीं ।।

मैकदे में हैं तेरे रिंद तो ऐसे साक़ी ।

जाम पीते भी नही और कोई तौबा भी नहीं ।।

सोचते रह गए इज़हारे मुहब्बत होगा ।

काम आसां है मगर आपसे होता भी नहीं…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on June 7, 2020 at 10:00am — 10 Comments

ग़ज़ल- मृत्यु के अनुरक्ति का अभिसार है क्या

ग़ज़ल

2122 2122 2122

मृत्यु  के अनुरक्ति का अभिसार है क्या ।

मुक्ति पथ पर चल पड़ा संसार है क्या ।।

काल शव से कर चुका श्रृंगार है क्या ।

यह प्रलय का इक नया हुंकार है क्या ।।

आत्माओं  का समर्पण  हो रहा है ।

दृष्टिगोचर मृत्यु का उदगार है क्या ।।…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on May 11, 2020 at 5:39pm — 4 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1222 1222 1222 122

करेगा दम्भ का यह काल भी अवसान किंचित ।

करें मत आप सत्ता का कहीं अभिमान किंचित ।।

क्षुधा की अग्नि से जलते उदर की वेदना का ।

कदाचित ले रहा होता कोई संज्ञान किंचित ।।

जलधि के उर में देखो अनगिनत ज्वाला मुखी हैं।

असम्भव है अभी से ज्वार का अनुमान किंचित।।

प्रत्यञ्चा पर है घातक तीर शायद मृत्यु का अब ।

मनुजता पर महामारी का ये संधान किंचित ।।

चयन…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on May 2, 2020 at 4:23pm — 9 Comments

ग़ज़ल - जो दिल तुझसे वो तेरा मांगता है

1222 1222 122



निगाहों से हुई कोई ख़ता है ।

जो दिल तुझसे वो तेरा मांगता है ।।

रवानी जिस मे होती है समंदर ।

उसी दरिया से रिश्ता जोड़ता है ।।

हमारी ज़िन्दगी को रफ्ता रफ्ता ।

कोई सांचे में अपने ढालता है ।।

तुम्हारे हुस्न के दीदार ख़ातिर ।

यहाँ शब भर ज़माना जागता है ।।

कभी तुम हिचकियों से पूछ तो लो ।

तुम्हे अब कौन इतना चाहता है ।।

ठहर जाती हैं नज़रें…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on April 25, 2020 at 12:35pm — 4 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 212

जाने कैसी तिश्नगी है ज़िंदगी ।

ख्वाहिशों की बेबसी है जिंदगी ।।

हर तरफ़ मजबूरियों का दौर है ।

ज़ह्र कितना पी रही है जिंदगी ।।

फ़िक्र किसको है सियासत तू बता ।

भूख से दम तोड़ती है जिंदगी ।।

दर्दो ग़म मत पूछिए मेरा सनम ।

बेवफ़ा सी हो गयी है ज़िन्दगी ।।

इस वबा के जश्न में तू देख तो ।

क्यूँ बहुत सहमी हुई है ज़िन्दगी ।।

है तबाही का नया मंज़र यहां…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on April 25, 2020 at 12:27pm — 1 Comment

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

हमारे इल्म  का  वो  क़द्रदान  थोड़ी है ।

हमें  दे  रोटियां  कोई  महान  थोड़ी है ।।

उसे है बेचना हर ईंट इस इमारत की ।

हुज़ूर मुफ़्त में वो मिह्रबान थोड़ी है ।।

विकास सब का हो और साथ भी रहे सबका ।

ये राजनीति है पक्की ज़ुबान थोड़ी है ।।

लुढ़क रहे हैं ख़ज़ाने ये फ़िक्र कौन करे…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on December 17, 2019 at 2:49pm — 1 Comment

ग़ज़ल

2122 1212 22

.

मत  कहो  आप  दौरे   गुरबत   है ।

चश्मेतर  हूँ  ये   वक्ते  फुरकत  है ।।

कुछ तो भेजी खुदा ने  आफ़त है ।

ये  तबस्सुम  है  या  क़यामत  है ।।

उसकी किस्मत को दाद  देता  हूँ ।

जिसको हासिल तुम्हारी कुर्बत है ।।

अलविदा  मत  कहें  हुजूर  अभी ।

बज़्म   को  आपकी  ज़रूरत  है ।।

इश्क़  में  क्या …

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on December 16, 2019 at 12:30pm — 1 Comment

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

कुछ मुहब्बत कुछ शरारत और कुछ धोका रहा ।

हर अदा ए इश्क़ का दिल तर्जुमा करता रहा ।।

याद है अब तक ज़माने को तेरी रानाइयाँ ।

मुद्दतों तक शह्र में चलता तेरा चर्चा रहा ।।

पूछिए उस से भी साहिब इश्क़ की गहराइयाँ ।

जो किताबों की तरह पढ़ता कोई चहरा रहा ।।

वो मेरी पहचान खारिज़ कर गया है शब के बाद ।

जो मेरे खाबों में आकर गुफ्तगू करता रहा ।।

साजिशें रहबर की थीं या था मुकद्दर का कसूर ।

ये मुसाफ़िर…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on December 9, 2019 at 12:33am — No Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर इक सू से सदा ए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।

सुना है इस वतन को बेटियां अच्छी नहीं लगतीं ।।

न जाने कितने क़ातिल घूमते हैं शह्र में तेरे ।

यहाँ कानून की खामोशियाँ अच्छी नहीं लगतीं ।।

सियासत के पतन का देखिये अंजाम भी साहब ।

दरिन्दों को मिली जो कुर्सियां अच्छी नहीं लगतीं।।

वो सौदागर है बेचेगा यहाँ बुनियाद की ईंटें ।

बिकीं जो रेल की सम्पत्तियां अच्छी नहीं लगतीं ।।

बिकेगी हर इमारत…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on December 4, 2019 at 2:02am — 7 Comments

ग़ज़ल

122 122 122 122

न जाने किधर जा रही ये डगर है ।

सुना है मुहब्बत का लम्बा सफर है ।।

मेरी चाहतों का हुआ ये असर है ।

झुकी बाद मुद्दत के उनकी नज़र है ।।

नहीं यूँ ही दीवाने आए हरम तक ।

इशारा तेरा भी हुआ मुख़्तसर है ।।

यहाँ राजे दिल मत सुनाओ किसी को ।

ज़माना कहाँ रह गया मोतबर है ।।

है साहिल से मिलने का उसका इरादा ।

उठी जो समंदर में ऊंची लहर है ।।

है मकतल सा मंजर हटा जब से चिलमन…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 14, 2019 at 5:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल -

1212 1122 1212 22/112

न पूछिये कि वो कितना सँभल के देखते हैं ।

शरीफ़ लोग मुखौटे बदल के देखते हैं ।।

अज़ीब तिश्नगी है अब खुदा ही खैर करे ।

नियत से आप भी अक्सर फिसल के देखते हैं ।।

पहुँच रही है मुहब्बत की दास्ताँ उन तक ।

हर एक शेर जो मेरी ग़ज़ल के देखते हैं ।।

ज़नाब कुछ तो शरारत नज़र ये करती है ।

यूँ बेसबब ही नहीं वो मचल के देखते हैं ।।

गुलों का रंग इन्हें किस तरह मयस्सर हो…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on November 6, 2019 at 2:51pm — 2 Comments

ग़ज़ल - कुबूल है

1212 1212 1212 1212

शराब जब छलक पड़ी तो मयकशी कुबूल है ।

ऐ रिन्द मैकदे को तेरी तिश्नगी कुबूल है ।

नजर झुकी झुकी सी है हया की है ये इंतिहा ।

लबों पे जुम्बिशें लिए ये बेख़ुदी कुबूल है ।।

गुनाह आंख कर न दे हटा न इस तरह नकाब ।

जवां है धड़कने मेरी ये आशिकी कबूल है ।।

यूँ रात भर निहार के भी फासले घटे नहीं ।

ऐ चाँद तेरी बज़्म की ये बेबसी कुबूल है ।।

न रूठ कर यूँ जाइए मेरी यही है…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on September 24, 2019 at 9:30pm — 2 Comments

लेती है इम्तिहान ये उल्फ़त कभी कभी

221 2121 1221 212

लेती है इम्तिहान ये उल्फ़त कभी. कभी ।

लगती है राहे इश्क़ में तुहमत कभी कभी ।।

आती है उसके दर से हिदायत कभी कभी ।

होती खुदा की हम पे है रहमत कभी कभी ।।

चहरे को देखना है तो नजरें बनाये रख ।

होती है बेनक़ाब सियासत कभी कभी ।।

यूँ ही नहीं हुआ है वो बेशर्म दोस्तों ।

बिकती है अच्छे दाम पे गैरत कभी कभी ।।

मुझ पर सितम से पहले ऐ क़ातिल तू सोच ले ।

देती सजा ए मौत है कुदरत कभी कभी…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on August 14, 2019 at 6:42pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

जब से ख़ामोश वो सिसकियां हो गईं ।

दूरियां प्यार के दरमियाँ हो गईं ।।

कत्ल कर दे न ये भीड़ ही आपका ।

अब तो क़ातिल यहाँ बस्तियाँ हो गईं ।।

आप ग़मगीन आये नज़र बारहा ।

आपके घर में जब बेटियां हो गईं ।।

कैसी तक़दीर है इस वतन की सनम ।

आलिमों से खफ़ा रोटियां हो गईं ।।

फूल को चूसकर उड़ गईं शाख से ।

कितनी चालाक ये तितलियां हो गईं ।।

दर्दो गम पर…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 28, 2019 at 12:17am — 2 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

.

पूछिये मत कि हादसा क्या है ।

पूछिये दिल मेरा बचा क्या है।।

दरमियाँ इश्क़ मसअला क्या है।

तेरी उल्फ़त का फ़लसफ़ा क्या है

सारी बस्ती तबाह है तुझसे ।

हुस्न तेरी बता रजा क्या है ।।

आसरा तोड़ शान से लेकिन ।

तू बता दे कि फायदा क्या है ।।

रिन्द के होश उड़ गए कैसे ।

रुख से चिलमन तेरा हटा क्या है।।

बारहा पूछिये न दर्दो गम ।

हाले दिल आपसे छुपा क्या है ।।



फूँक कर…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 16, 2019 at 12:00am — 2 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 212

दुश्मनी हमसे  निकाली  जाएगी ।

बेसबब इज्ज़त उछाली जाएगी ।।

नौकरी मत  ढूढ़  तू इस मुल्क में ।

अब तेरे हिस्से की थाली जाएगी ।।

लग रहा है अब रकीबों के लिए ।

आशिकी साँचे में ढाली जाएगी ।।

चाहतें   अब  क्या  सताएंगी   उसे ।

जब कोई ख़्वाहिश न पाली जाएगी ।।…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 11, 2019 at 12:12am — 4 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

मुद्दत के बाद आई है ख़ुश्बू सबा के साथ ।

बेशक़ बहार होगी मेरे हमनवा के साथ ।।

शायद मेरे सनम का वो इज़हारे इश्क था ।

यूँ ही नहीं झुकी थीं वो पलकें हया के साथ ।।

वह शख्स दे गया है मुझे बेवफ़ा का नाम ।

जो ख़ुद निभा सका न मुहब्बत वफ़ा के साथ ।।

माँगी मदत जरा सी तो लहज़े बदल गए ।

अब तक मिले जो लोग हमें मशविरा के साथ ।।

आँखों में साफ़ साफ़ सुनामी की है…

Continue

Added by Naveen Mani Tripathi on July 8, 2019 at 11:00am — 10 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash posted a blog post

रोटी.....( अतुकांत कविता)

रोटी का जुगाड़ कोरोना काल में आषाढ़ मास में कदचित बहुत कठिन रहा आसान जेठ में भी नहीं था. पर, प्रयास…See More
3 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी,  प्रदत्त विषय पर सुंदर सर्जन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
13 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय मनन कुमार जी, प्रदत्त विषय पर अति सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।"
16 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत विषय पर अति सुंदर दोहों के लिए बधाई स्वीकार करें।"
19 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"रोटी पर गज़ल खेल रोटी का निराला है बहुत संसार मेंरोटी सबको चाहिए इस भूख के बाजार में जो कभी झुकता…"
25 minutes ago
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post रोटी
"बहुत बहुत शुक्रिया जी,पहले मुझे पता नहीं था ,जैसे ही पता चला मैंने वहां पोस्ट कर दी,"
26 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आद0 चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन। विषयानुकूल बढ़िया हाइकू और कुण्डलिया सृजित हुए हैं। बधाई स्वीकार…"
35 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको

था सब आँखों में मर्यादा का पानी याद है हमको पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको।भले खपरैल छप्पर…See More
35 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। बढ़िया विषयानुकूल दोहे हुए हैं। बधाई स्वीकार कीजिये"
36 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"धन्यवाद सुरेन्द्र नाथ जी। कर लिया है गौर।"
39 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Neeta Tayal's blog post रोटी
"आद0 नीता त्यागी जी सादर अभिवादन। आपको यह रचना ओ बी ओ के आयोजन में पोस्ट करनी थी,, आपने यहाँ पोस्ट…"
40 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post ग़ज़ल-सफलता के शिखर पर वे खड़े हैं -रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली जी सादर अभिवादन। हिंदी उर्दू शब्दो से मिश्रित शब्दों से उम्दा ग़ज़ल कही है आपने। बधाई…"
42 minutes ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service