For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2212 2212 2212 2212

मैं ठोकरें खाता रहा मुझ पर तरस आता था कब ।
इस ज़िंदगी पर सच बताएं आपका साया था कब ।।1

जीता रहा मैं बेखुदी में मुस्कुरा कर उम्र भर।
अब याद क्या करना कि मैंने होश को खोया था कब ।।2

वो कहकशां की बज़्म थी, उन बादलों के दरमियां ।
मुझको अभी तक याद है वो चाँद शर्माया था कब ।।3

जलते रहे क्यूँ शमअ में परवाने सारी रात तक ।
तू वस्ल के अंज़ाम का ये फ़लसफ़ा समझा था कब ।।4

जो अश्क़ में डूबा मिला था दौरे उल्फ़त में सदा ।
वो कह रहा था फ़ख्र से, मैं इश्क़ में रोया था कब ।।5

कुछ तो ख़तायें थीं अदा की शक़ ये पुख़्ता हो गया ।
उसने कहा जब जुल्म दिल पर बे सबब ढाया था कब ।।6

दीवाने दे देते तुम्हें हर प्रश्न पर अपना जवाब ।
तुमने सवालातों को उनसे बाअदब पूछा था कब ।।7

तुझको भुला कर जी सके हालात तो ऐसे न थे ।
तेरे बिना उसको सुकूँनो चैन भी मिलता था कब ।।8

रोशन हुआ है घर मेरा बस आपके आने के बाद ।
कोई चरागां इससे पहले इस तरह जलता था कब ।।9

मौलिक अ प्रकाशित

डॉ नवीन मणि त्रिपाठी।

Views: 364

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष यादव on August 5, 2020 at 1:48pm

एक बार फिर से आपकी एक और बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली। दिली मुबारकबाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 5, 2020 at 1:24pm

आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"

Comment by Naveen Mani Tripathi on August 4, 2020 at 11:34pm

आ0 बृजेश कुमार ब्रज जी बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2020 at 10:15pm

खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय त्रिपाठी जी...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"आ. भाई शेख शहजाद जी, अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"तब इसे थोड़ी दूसरी तरह अथवा अधिक स्पष्टता से कहें क्योंकि सफ़ेद चीज़ों में सिर्फ़ ड्रग्स ही नहीं आते…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"आदाब। बहुत-बहुत धन्यवाद उपस्थिति और प्रतिक्रिया हेतु।  सफ़ेद चीज़' विभिन्न सांचों/आकारों…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"रचना पटल पर आप दोनों की उपस्थिति व प्रोत्साहन हेतु शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी और आदरणीया…"
8 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख़ शहज़ाद जी।"
8 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक आभार आदरणीय प्रतिभा जी।"
9 hours ago
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक आभार आदरणीय महेन्द्र कुमार जी।"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"समाज मे पनप रही असुरक्षा की भावना के चलते सामान्य मानवीय भावनाएँ भी शक के दायरे में आ जाती हैं कभी…"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"हार्दिक बधाई इस लघुकथा के लिए आदरणीय तेजवीर जी।विस्तार को लेकर लघुकथाकार मित्रों ने जो कहा है मैं…"
9 hours ago
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"//"पार्क में‌ 'सफ़ेद‌ चीज़' किसी से नहीं लेना चाहिए। पता नहीं…"
10 hours ago
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"अच्छी लघुकथा है आदरणीय तेजवीर सिंह जी। अनावश्यक विस्तार के सम्बन्ध में आ. शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी से…"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-107 (विषय: इंसानियत)
"टुकड़े (लघुकथा): पार्क में लकवा पीड़ित पत्नी के साथ वह शिक्षक एक बैंच की तरफ़ पहुंचा ही था कि उसने…"
10 hours ago

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service