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लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's Blog – February 2013 Archive (8)

मन मोहे सरकार

 सन्दर्भ :-रेल बजट 
-लक्ष्मण लडीवाला 
 
पवन एक्सप्रेस आ गई, लेकर के सौगात,
उम्मीदे हजार बढ़ी,  सुविधाओं की बात । …

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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 28, 2013 at 10:11am — 18 Comments

रस की हो बरसात

नेता जन नायक बने, उत्तम हो पहचान,      

अभिनेता नेता बने, रखे हास्य का मान ।

************************************** 
खलनायक नेता बने,रखे विरोधी शान,     
नेता अभनेता बने, माइक पर ही ध्यान। 
***************************************
संसद में गर कवि रहे,छंदों में हो बात,    …
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 25, 2013 at 5:00pm — 20 Comments

मिला राज्य सम्मान

मिला राज्य सम्मान- (दोहे)

-लक्ष्मण लडीवाला

तामस सात्विक राजसी, तीनो ही अभिमान, 

रावण और कुम्भ करण, तामस राजस जान।

सात्विक मन से आदमी, करे प्रभु गुणगान,

देख विभीषण को जरा, वे इसके  प्रतिमान ।

कुम्भ करण सोता रहा, दिल में भरा प्रमाद, 

अहंकार था तामसी, जीवन भर अवसाद ।

राजसी अहंकार वश, आजाये अभिमान,

अभिमानी…

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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 17, 2013 at 12:00pm — 28 Comments

सात सुरों में साज

  बसंत ऋतु पर दोहे
- लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
 

ऋतु बसंत का आगमन,खुशियों का उन्माद,

खुशबु है मन भावन सी,मधुर-मधुर सा स्वाद।
 
ऋतु बसंत दस्तक करे, जाड़े का…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 14, 2013 at 10:26pm — 14 Comments

कुण्डलियाँ छंद

रूखासूखा खाय के, मन प्रसन्न हो  जाय,
छाव तले  सुस्ताय ले, ठंडा जल मिल जाय।
ठंडा जल मिल जाय,ध्यान रखे परिजनों का,
अपनेपन का भाव रख, भरता उदर औरो का…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 11, 2013 at 12:30pm — 3 Comments

मृत्यु तुझे सलाम है

दुःख के रास्ते सुख आता है,
अनुभवों में यह पलता है  
दूर क्षितिज तक जाम है।
जीवन सुख का धाम है,
मृत्यु तुझे सलाम है ।


अटके प्राण स्वजनों में, …
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 6, 2013 at 11:29am — 15 Comments

मज़बूरी की कविता

सोना पड़ा है वहां,अच्छी खुशखबरी है 
थकते चलते जाना कैसी मज़बूरी है ।
-  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -
अगर हाथ न आये फल लोमड़ी के,
फल खट्टे है कहना ये मज़बूरी है ।
-   -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  - -
हैसियत नहीं कान्वेंट में पढ़ाने की,    
देखादेखी दाखिला दिलाना मज़बूरी है। 
-  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  -  - --
नहीं उठा सकता मै गाडी का खर्च, 
दहेज़ में…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 4, 2013 at 10:00am — 9 Comments

ढलकते आँसुओ को सहेजना चाहते है

ढलकते आँसू  (गीत)
लक्ष्मण लडीवाला
आँसू चाहे गम के हो, ख़ुशी के हो कपोलों को भिगोते है 
देखने वाले चाहेजो समझे, ख़ुशी या गम मगर रिझाते है ।
 
आँसू जब ढलकते है, ग़मों को कम करते राहत दिलाते है, 
ढलकते आँसू बेहद ख़ुशी से पड़ते दिल के दौरे से बचाते…
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Added by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 2, 2013 at 12:30pm — 17 Comments

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