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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-38 (विषय: "डर")
"बहुत बढ़िया सर, आप की रचनाओं को पढ़कर बहुत कुछ सीखने को मिलता है. बहुत चुटीला तंज करती हुई इस रचना के लिए बहुत बहुत बधाई आपको"
May 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-38 (विषय: "डर")
"फायदा- लघुकथा "अच्छा हरिलाल, कितना कमीशन मिलता है तुमको इस दुकान से", दुकान से निकलकर उसके ऑटो पर बैठते हुए उसने पूछा. आगरा में घूमने के लिए उसने जिस ऑटोवाले को लिया था उसने न सिर्फ पूरा आगरा घुमाया, बल्कि उसके जरा से इशारे पर इस दुकान पर…"
May 31
विनय कुमार replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय गणेश जी बागीजी को जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ "
May 4
विनय कुमार posted a blog post

मजदूर- कविता

एक बार फिर कंधे पर, लैपटॉप बैग लटकाये, वह अलस्सुब्ह निकल पड़ा. रात को देर से आने पर, हमेशा की तरह नींद पूरी नहीं हुई थी, जलती हुई आँखों, और ऐठन से भरे शरीर, को घसीटता हुआ वह, जल्दी जल्दी बस स्टॉप की तरफ भागने की कोशिश कर रहा था. कल रात की बॉस की डांट, उसे लाख चाहने के बाद भी, भुलाते नहीं बन रही थी. कहाँ सोचा था उसने पढ़ते समय, कि यह हाल होगा नौकरी में. कहाँ वह सोचता था कि उसे, मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी, जैसे उसके पिता करते थे और उसे बेहतर बनाने में, अपने शरीर का एक एक बूंद खून जला…See More
May 3
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post मजदूर- कविता
"शुक्रिया आ मुहतरम जनाब समर कबीर साहब, आपके सुझाव पर संसोधन कर देता हूँ. शुक्रिया"
May 3
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post मजदूर- कविता
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,बहुत ही सुंदर और प्रभावी कविता लिखी आपने मज़दूर दिवस पर, इस बढ़िया प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । तीसरी पंक्ति में 'अलसुबह' ग़लत है,सहीह शब्द है "अलस्सुसुब्ह" देखियेगा ।"
May 2
विनय कुमार posted a blog post

मजदूर- कविता

एक बार फिर कंधे पर, लैपटॉप बैग लटकाये, वह अलस्सुब्ह निकल पड़ा. रात को देर से आने पर, हमेशा की तरह नींद पूरी नहीं हुई थी, जलती हुई आँखों, और ऐठन से भरे शरीर, को घसीटता हुआ वह, जल्दी जल्दी बस स्टॉप की तरफ भागने की कोशिश कर रहा था. कल रात की बॉस की डांट, उसे लाख चाहने के बाद भी, भुलाते नहीं बन रही थी. कहाँ सोचा था उसने पढ़ते समय, कि यह हाल होगा नौकरी में. कहाँ वह सोचता था कि उसे, मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी, जैसे उसके पिता करते थे और उसे बेहतर बनाने में, अपने शरीर का एक एक बूंद खून जला…See More
May 1
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"पौराणिक पात्रों को लेकर एक बहुत गंभीर रचना प्रदत्त विषय पर. नारी के पतिव्रत की बहुत सी कहानियां पुराणों में लिखी हुई हैं और यह रचना भी उसे पुष्ट करती है. बहुत बहुत बधाई इस बढ़िया रचना के लिए आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आज के हालात पर बहुत चुटीली रचना, प्रदत्त विषय को बखूबी परिभाषित किया है आपने. बहुत बहुत बधाई आपको आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"बस यही चल रहा है आजकल, लोगों को बनाने का काम. बढ़िया तंज प्रदत्त विषय पर, बधाई आपको आ "
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"प्रदत्त विषय पर बढ़िया प्रस्तुति, रचना का मूल तो स्पष्ट है लेकिन प्रस्तुतीकरण थोड़ी क्लिष्ट हो गयी है जो आसान होने पर शायद ज्यादा ग्राह्य होती. बहुत बहुत बधाई आपको आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"अपने घर के अतिथियों में भी उनकी हैसियत के हिसाब से फ़र्क़ किया जाता है तो बाहर की बात ही अलग है. प्रदत्त विषय पर बहुत बढ़िया और प्रभावी रचना, बधाई आपको आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"प्रदत्त विषय पर लिखने का बढ़िया प्रयास, बधाई आपको आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"आपस में चाहे जितना मनमुटाव हो लेकिन दूसरों के सामने एक ही रहना है, यही सच्चाई है हमारे समाज की. प्रदत्त विषय पर बहुत बढ़िया प्रस्तुति, बहुत बहुत बधाई आपको आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"बस कहने के लिए मेरा भारत महान, वास्तविकता में देश के बारे में कुछ पता नहीं. बहुत बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर, बहुत बहुत बधाई आपको आ"
Apr 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-37 (विषय: भारत)
"बहुत भावपूर्ण रचना प्रदत्त विषय पर, इंडिया और भारत का फ़र्क़ बढ़िया से बताया आपने. बहुत बहुत बधाई इस बढ़िया प्रस्तुति के लिए आ"
Apr 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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मजदूर- कविता

एक बार फिर कंधे पर,

लैपटॉप बैग लटकाये,

वह अलस्सुब्ह निकल पड़ा.

रात को देर से आने पर,

हमेशा की तरह

नींद पूरी नहीं हुई थी,

जलती हुई आँखों,

और ऐठन से भरे शरीर,

को घसीटता हुआ वह,

जल्दी जल्दी बस स्टॉप की तरफ

भागने की कोशिश कर रहा था.

कल रात की बॉस की डांट,

उसे लाख चाहने के बाद भी,

भुलाते नहीं बन रही थी.

कहाँ सोचा था उसने पढ़ते समय,

कि यह हाल होगा नौकरी में.

कहाँ वह सोचता था कि उसे,

मजदूरी नहीं करनी…

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Posted on May 1, 2018 at 4:30pm — 2 Comments

स्टेटस--लघुकथा

"सबको इस रिक्शे पर बैठना है और मन किया तो घूमना भी है", एक तरफ से आती आवाज सुनकर रवि ने उधर देखा. शादी के उस मंडप में वह विशिष्ट दर्जा प्राप्त व्यकि था, आखिर दामाद जो ठहरा. सामने कुछ दूर पर खड़ा रिक्शा दिख गया, वही सामान्य रिक्शा था, बस उसको खूब सजा दिया गया था. साफा बांधे एक आदमी भी वहां खड़ा था जिसे लोगों को घुमाने की जिम्मेदारी दी गयी थी. रवि ने वहां से जाने की कोशिश की लेकिन पत्नी ने हाथ पकड़ लिया "अरे सब बैठ रहे हैं तो हमको भी बैठना पड़ेगा".

बारी बारी से लोग रिक्शे पर बैठते, कोई थोड़ा…

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Posted on February 19, 2018 at 3:14pm — 10 Comments

यक़ीन क़ायम है—लघुकथा

“लगता है आपने दुनियाँ नहीं देखी और खबरों से दूर रहते हैं आप”, ज़हूर भाई ने अपनी बात तेज आवाज मे कही, गोया वह आवाज के ज़ोर पर ही अपनी बात सही बताना चाहते थे. वह नए नए पड़ोसी बने थे रफ़ीक़ के और हाल मे ही हुए कौमी दंगों पर बहस कर रहे थे. रफ़ीक़ उनको लगातार समझाने की कोशिश कर रहे थे कि वक़्त का तक़ाज़ा इन चीजों से ऊपर उठकर सोचने का है.

“आप जितनी तो नहीं देखी लेकिन कुछ तो देखी ही है ज़हूर भाई, दुनियाँ इतनी भी बुरी नहीं है. आज भी इंसानियत जिंदा है और मोहब्बत का खुलूस कायम है”, रफ़ीक़ ने मुसकुराते हुए जवाब…

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Posted on February 13, 2018 at 4:41pm — 8 Comments

जरुरत- लघुकथा

आज वह बहुत खुश थी, सारे गुलाब बिक गए थे. रात काफी हो चली थी और एक आखिरी गुलाब को पास रखकर वह पैसे गिनने में तल्लीन थी तभी एक कार उसके पास रुकी.

"वो गुलाब देना", अंदर से एक नवयुवक ने आवाज लगायी. उसने एक उड़ती हुई नजर युवक पर डाली और उसकी बात अनसुना करते हुए वापस पैसे गिनने में लग गयी.

"अरे सुना नहीं क्या, वो गुलाब तो दे, कितने पैसे देने हैं", युवक ने इस बार थोड़ी ऊँची आवाज में कहा, उसके स्वर में झल्लाहट टपक रही थी.

उसने सर उठाकर युवक को देखा और पैसे अपनी थैली में रखते हुए बोली…

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Posted on February 8, 2018 at 6:00pm — 14 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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"शुक्रिया एक नई जानकारी के लिए,,,,,,"
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"आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद...."
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SudhenduOjha left a comment for Neelam Upadhyaya
"आदरणीया सुश्री नीलम उपाध्याय जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद.... सुधेन्दु ओझा"
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SudhenduOjha commented on SudhenduOjha's blog post जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।
"आदरणीया सुश्री नीलम उपाध्याय जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद...."
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Samar kabeer commented on Mahendra Kumar's blog post बलि (लघुकथा)
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब, आपकी लघुकथाएँ हमेशा मुझे पसन्द आती हैं,ये लघुकथा भी उसी श्रेणी की है,…"
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Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लट जाते हैं पेड़- एक गीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, कितना सुंदर गीत लिखा आपने, मज़ा आ गया,इस प्रस्तुति पर…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकू
"मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,बहुत उम्दा हाइकू लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post जाहिल हैं कुछ लोग, तुम्हें काफ़िर लिखते हैं।
"कृपा कर इस ग़ज़ल के अरकान लिखने का कष्ट करें ।"
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Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post हवाओं से रूबरू (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post चुनावी घोषणायें  - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago

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