For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
Share

विनय कुमार's Friends

  • Jitendra Upadhyay
  • jaan' gorakhpuri
  • VIRENDER VEER MEHTA
  • poonam dogra
  • harivallabh sharma
  • मिथिलेश वामनकर

विनय कुमार's Groups

 

विनय कुमार's Page

Latest Activity

विनय कुमार commented on Samar kabeer's blog post यहाँ के लोग महब्बत शदीद करते हैं
"क्या कहूँ, आप को पढ़ना एक संगीत सुनने जैसा होता है, ढेरों बधाइयाँ आ समर कबीर साहब "
Jul 17
विनय कुमार commented on Samar kabeer's blog post 'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'
"क्या कहूँ, आप को पढ़ना एक संगीत जैसा होता है, ढेरों बधाइयाँ आ समर कबीर साहब "
Jul 17
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धनी साहब, यह एक गीत लिखा है मैंने, त्रुटिवश ऊपर लिख नहीं पाया "
Jul 15
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"बहुत बहुत आभार आ मोहतरम समर कबीर साहब, यह एक गीत लिखा है मैंने, त्रुटिवश ऊपर लिख नहीं पाया "
Jul 15
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"बहुत बहुत आभार आ अशोक कुमार रक्ताले जी "
Jul 15
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"बहुत सुंदर गीत है सावन पर, बहुत बहुत बधाई आ "
Jul 15
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"दिलों में आग लगाने, आया है सावन किसी को पास बुलाने आया है सावन संभल के आज निकलना जरा तुम घर से बदन को देखो भिगोने आया है सावनलाख कोशिश करोगे भूल नहीं पाओगे इश्क़ का जाम पिलाने आया है सावन रूठे रिश्तों को मनाने के लिए सोचा तब नई उम्मीद जगाने आया है…"
Jul 14
विनय कुमार commented on Samar kabeer's blog post रिम झिम रिम झिम बारिश होने लगती है
"वाह, वाह, क्या गजब की गजल हुई है आ मोहतरम समर कबीर साहब, पढ़कर आनंद आ गया| बहुत बहुत बधाई आपको "
Jul 4
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ रवि प्रभाकर जी "
Jul 4
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ डॉ विजय शंकर जी "
Jul 4
Ravi Prabhakar commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"/ अब उसकी बेटी भी बड़ी हो गयी है, बाप है ना"/ बहुत खूब विनय भाई । शीर्षक से न्‍याय करती इस लघुकथा प्रेषण हेतु शुभकामनाएं।"
Jul 4
Dr. Vijai Shanker commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"वाह ! जिन्दगी के एहसास ऐसे भी होते हैं। बहुत सुन्दर। बधाई आदरणीय विनय कुमार जी। सादर।"
Jul 4
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post दुःख और सुख-- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ बृजेश कुमार बज्र जी "
Jul 2
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post दुःख और सुख-- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ नीता कसार जी "
Jul 2
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विनय कुमार's blog post दुःख और सुख-- लघुकथा
"संवेदनाओं से परिपूर्ण लघु कथा के लिए बधाई"
Jul 1
Nita Kasar commented on विनय कुमार's blog post दुःख और सुख-- लघुकथा
"हर महिला के लिये दुख और सुख के अपने अपने दायरे है,पत्नि का दुख अपनी जगह वाजिब है,बेटी का अपनी जगह ।शराबी हो पति तो पत्नि का सुखी होना मुश्किल है।संवेदनशील कथा के लिये बधाई आद० विनय सिंह जी ।"
Jul 1

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

विनय कुमार's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

विनय कुमार's Blog

पिता--लघुकथा

घर के बाहर ही जब उसने अपने चचेरे भाई रग्घू को देखा तो उसका माथा ठनका| आज यह घर क्यों आया था, जरूर कुछ गड़बड़ होगी, वर्ना पिताजी को गुजरे इतने साल हो गए, कभी हाल पूछने भी नहीं आया था| उसकी मुस्कराहट को नजरअंदाज करते हुए वह भागती हुई घर में घुसी|

"माँ, माँ, कहाँ है तू", सामने माँ नजर नहीं आयी तो वह बेचैन हो गयी| जल्दी से उसने पिछले कमरे में प्रवेश किया तो माँ को खाट पर बैठे पाया|

"तू यहाँ बैठी है और जवाब भी नहीं दे रही है, मैं तो घबरा गयी थी| आज रग्घू क्यों आया था घर, तूने तो नहीं…

Continue

Posted on July 2, 2017 at 12:30am — 4 Comments

दुःख और सुख-- लघुकथा

"लकवा मार गया है, अब बिस्तर पर ही रहना पड़ेगा इसको| शायद मालिश और दवा से कुछ फायदा हो और चलने फिरने लायक हो जाए कुछ दिन में", डॉक्टर ने एक कागज पर कुछ दवा लिखा और बाहर निकलने लगा|

"हस्पताल में भर्ती कराने से कुछ फायदा होगा क्या डॉक्टर साहब", बिटिया ने पूछा|

"कह नहीं सकता, हो भी सकता है", कहकर डॉक्टर निकल गया|

"माँ, बापू को हस्पताल ले चलते हैं, शायद ठीक हो जाए", बिटिया ने माँ की तरफ देखते हुए कहा|

उसने एक बार खाट पर पड़े लल्लू को देखा और फिर अपनी कमर में बंधे गांठ से कुछ…

Continue

Posted on June 27, 2017 at 11:41pm — 10 Comments

बढ़ता धुआं- लघुकथा

खाला अपने रसोई में लगी हुई थीं, अब रमजान महीने के बस दो ही दिन तो बचे थे और अलीम बड़के शहर से आज ही आ रहा था. सबेरे सबेरे उन्होंने पड़ोसी मियां की दूकान से एक बार फिर लगभग गिड़गिड़ाते हुए सामान ख़रीदा था. अभी पिछले महीने का भी पूरा पैसा दिया नहीं था उन्होंने तो उम्मीद कम ही थी कि सामान मिल ही जायेगा. लेकिन एक तो उन्होंने बेटे के आने की खबर सुना दी थी और दूसरे आने वाली ईद, मियां ने थोड़े ना नुकुर के बाद सामान दे दिया.

"देखो खाला, इस बार अगला पिछला सब हिसाब चुकता हो जाना चाहिए, मेरे भी बाल बच्चे…

Continue

Posted on June 24, 2017 at 1:03pm — 10 Comments

खबर--

बीस साल बाद आज जोखन लौटा था गाँव, कितनी बार घरवालों ने बुलाया, कितने प्रयोजन पड़े, लेकिन जोखन ने कभी भी गाँव की तरफ जाने का नाम नहीं लिया था| कितनी बार लोगों ने पूछा, लेकिन कभी उसने वजह नहीं बताया| आज गाँव में आकर उसे सब कुछ बदला बदला लग रहा था, कुछ भी पहचाना नहीं लग रहा था| पिताजी से हाल चाल करके वह गाँव में घूमने निकला और कुछ ही देर में गाँव के बाहर खेतों में खड़ा था| खेत भी अब खेत कम, प्लाट ज्यादा लग रहे थे| खेतों को पार करता हुआ वह बगल के गाँव के रास्ते पर चल पड़ा| कभी पगडण्डी जैसा रास्ता…

Continue

Posted on February 26, 2017 at 9:00pm — 2 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

narendrasinh chauhan commented on laxman dhami's blog post कभी गम के दौर में भी हुई आखें नम नहीं पर- लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’
"खूब सुन्दर रचनाओं   के लिए  हार्दिक बधाई सादर "
2 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा-कुत्ता संस्कृति
"आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब लघुकथा पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देने और हौसला अफज़ाई का बहुत-डहुत…"
2 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा-कुत्ता संस्कृति
"आदरणीय आशुतोष जी लघुकथा पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देकर मान बढ़ाने का बहुत-बहुत आभार ।"
2 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on laxman dhami's blog post कभी गम के दौर में भी हुई आखें नम नहीं पर- लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’
"आदरणीय लक्षमण जी अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई सादर "
2 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा-कुत्ता संस्कृति
"आदरणीय आरिफ जी ..आजकल के चलन को इस रचना के माध्यम से बखूबी चित्रित किया है आपने इस शानदार रचना के…"
3 hours ago
Profile IconDr.Shrihari Wani and Garima joined Open Books Online
3 hours ago
Dr Ashutosh Mishra commented on Dr.Prachi Singh's blog post भीगी सी रुत आई ....//डॉ० प्राची
"आदरणीया प्राची जी हमेशा की तरह शानदार इस गीत पर ढेर सारी बधाई स्वीकार करें ...आदरणीय समर सर के…"
3 hours ago
KALPANA BHATT commented on Sushil Sarna's blog post तन्हा...
"सुंदर रचना आदरणीय शरर का मतलब क्या है आदरणीय | सादर "
3 hours ago
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा-कुत्ता संस्कृति
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया ।"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तन्हा...
"आदरणीय समर कबीर साहिब सृजन के भावों को मान एवं सुझाव देने का हार्दिक आभार।"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तन्हा...
"आदरणीय नरेंद्र सिंह चौहान जी सृजन की प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक आभार।"
7 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service