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Nita Kasar
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Nita Kasar commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
" आपने रोज़गार से जुड़ी समस्या पर कथा जरिये प्रकाश डाला है जीवन से जुड़े चक्रव्यूह को भेदने के लिये धैर्य व भरोसे का होना ज़रूरी है ।हर रात के बाद सुबह आती है ,बधाई आद० हफ़ीज़ बैग जी ।"
Sunday
Nita Kasar replied to योगराज प्रभाकर's discussion “ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी”  अंक-41 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"आयोजन के कुशल संपादन व संयोजन के लिये बधाई आद० योगराज प्रभाकर जी ।हर बार की तरह इस बार भी बेहतरीन कथायें पढने मिली ।सभी सदस्यगण को बधाईयां व शुभकामनायें ।"
Sep 1
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"नेकी लौटकर वापिस आती है ।सार्थक कथा के लिये बधाई आद० आशीष श्रीवास्तव जी ।"
Aug 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"विषय आधारित सुंदर कथा के लिये बधाई आद० वीरेंद्र वीर मेहता जी ।"
Aug 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"जनता सब जानती है पहचानती है ,हर बार उसकी आँखों में धूल नही झोंकी जा सकती ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद० तेजवीरसिंह जी ।"
Aug 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"गाय को प्रतीक बना आपने आज की ज्वलंत समस्या पर प्रकाश डाला है ।बधाई कथा के लिये आद० विनय कुमार जी ।"
Aug 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"ये धूर्त बाबा एेसे लोगों की कमज़ोर नस बख़ूबी जानते पहचानते है ।अलग ही स्टाइल में लिखी कथा के लिये बधाई आद० टी० आर० शुक्ल जी ।"
Aug 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"अधिकतर बुज़ुर्ग एेसे होते है।वे आसानी से अपनी जड़े नही छोड़ना चाहते ।कितनी ही विपदा क्यों ना हो ।बधाई आद० कनक हरलालका जी ।"
Aug 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"इतनी घटनायें सामने आने के बाद भी लोग पाखंडियों बाबा भक्ति से बाज नही आते ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद० तस्दीक़ अहमद खान जी ।"
Aug 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"खुदा के दरबार में किसी तरह की साहूकारी नही चलती जहाँ पास्कल जैसे लोग आस्तिकता और नास्तिकता के तराज़ू में अपना नफ़ा नुक़सान तौल सके ।दार्शनिक अंदाज लिये कथा के लिये बधाई आद०महेंद्र कुमार जी ।"
Aug 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"ये आज के भारत का भविष्य है।जहाँ सब मिलजुल एक दूसरे की मदद करेंगे। भाईचारे से रहेंगे ।सार्थक कथा के लिये बधाई आद०मोहम्मद आरिफ़ जी ।"
Aug 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आयोजन की शुरूआत महिला सम्मान से ,पत्नी के सम्मान को कठघरे में खड़ा करना फिर उससे सब सामान्य मानने की आशा करना बेहद सरल कार्य है।पर पत्नी के रूख  ने स्थिति साफ कर दी ।संदेशप्रदकथा के लिये बधाई आद० अजय गुप्ता जी ।"
Aug 30
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "ऊपरवाले, नीचेवाले" (लघुकथा)
"स्थानीय भाषाशैली पर आधारित सुंदर कथा ।बारिश की जगह बरसात ।हाईफाई की जगह ऊँचई पहुँच वाले ।संदेशप्रद कथा के लिये बधाई आद० शेख़ शहज़ाद  उस्मानी जी ।"
Aug 27
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post अनुसरण- लघुकथा –
"हिंदू,मुसलमान बाद में पहिले हम माँ भारती की संतान है ।संदेशप्रद कथा के लिये बधाई आद० तेजवीर सिंह जी ।"
Aug 27
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post घूंघट - लघुकथा –
"घूँघट शीर्षक आधारित कथा में आपने आज की पुरातन प्रथा पर प्रकाश डाला है ।आज भी अनेकों जगह इस प्रथा का पालन महिलायें करती है ।पर समय के हिसाब बदलाव आज की ज़रूरत है ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद० तेजवीर सिंह जी ।"
Aug 21
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' (लघुकथा)
"ृबदलाव समय की माँग है फिर भी लोग नया नाम अपनाने में कोताही बरतते है ।सटीक शीर्षक ।हमारे यहाँ छोटी लाइन कब की ग़ायब हो गई पर लोग उस जगह का नया नाम आदि शंकराचार्य चौक नही कहते ।बधाई कथा के लिये आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Aug 9

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Female
City State
jabalpur
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advocate
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लघु कथा

"अपमान "



'जल्दी से आ जा मोनू ,खाना गरम है,खा लें,सबके साथ ।

क्या जल्दी है ,माँ खाना खाना लगा रखा है ?

आते साथ चुपचाप बैठा देख माँ से रहा ना गया।

हाथ धोकर आजा बेटा, फिर खाना खाने बैठ।

जितना तुझे ज़रूरत हो उतना ही लेना,छोड़ना मत ।माँ ने लाड़ले को समझाना चाहा ।

'अब पेट कोई कमरा नही है खाता जाऊँगा ,थोड़ा छूट गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ?

ये अन्नदेव का अपमान है बेटा ।

वो कैसे ?जिस दिन तुम्है ग़ुस्सा आ जाता है,और उस दिन तुम खाना नही खाते तब ये संतुलन और… Continue

Posted on September 12, 2016 at 9:30pm — 4 Comments

वृद्धाश्रम: लघुकथा

कौन है जो घंटी बजा रहा है,?चौकीदार तुम से काम ढंग से नही होता तो काम छोड़ दो।

'मेडम जी एक बुड्डा आया है,जिद्दी है कहता मिलना ज़रूरी है।

"देख राजू आख़िरी चेतावनी है तेरे लिये आलतू ,फ़ालतू लोगों को भगा नही सकता चले आते है समय बेसमय।

लगता हैवह इनाम की आस में आया है , हमारे टामी का विज्ञापन पढ़कर।"

अरे! क्या कह रहे हो राजू उसे बैठक में बैठाओ ,पानी,चाय लेते आना ,अभी आती हूँ।

बाहर ससुर को देखकर मालकिन के पाँव तले ज़मीन खिसक गई ।

"बेटा ,टामी वृद्धाश्रम आ गया था मेरे…

Continue

Posted on August 2, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

फेरे लघुकथा

फेरे '



घर के काम से फ़ुरसत हो थोड़ा आराम करने जा ही रही थी , वक़्त बेवक्त घंटी के बजते ही मन में आया इस समय कौन होगा, अभी सूरज के आने का समय तो हुआ नहीं है, दरवाज़े पर पति को देख मैं चकित रह गई।

"अरे आप !!!!" पति को अचानक सामने ,पसीने से तरबतर देख ,अपने आप को बोलने से रोक ना पाई।

पानी लेने जा रही थी, सूरज ने हाथ पकड़ कर रोक लिया।

"तुमसे कुछ कहना है मुझे सुमन, मैं फिसल गया, रोशनी से संबंध बना बैठा , मुझे माफ़ करोगी ना मुझे हर सज़ा मंज़ूर है।

तुम्हारे,बच्चों के बिना… Continue

Posted on December 26, 2015 at 6:20pm — 8 Comments

फूल चोर

"फूल चोर"



मंदिर में वर्मा जी की थाली में अपने बागीचे के विदेशी फूल देखकर वृंदा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वे पूजा की थाली हाथ में पकडे मूर्ति के सामने खड़े हुए थे, जिसे देखकर वृंदा के चेहरे पर अविश्वास और क्रोध के मिश्रित भाव उभर आए।



दरअसल बचपन से ही वृंदा को जूनून की हद तक बागवानी का बेहद शौक था। तरह तरह से रंग सजावटी पौधों, हरी भरी घास, रंग बिरंगे फूलों तथा विभिन्न प्रकार के बेल बूटों से भरा बगीचा पूरी कॉलोनी में चर्चा का विषय बन चुका था। जो भी देखता, बगीचे और वृंदा की… Continue

Posted on October 19, 2015 at 5:04pm — 25 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 1:46pm on November 16, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया नीता कसार जी आपकी लघु-कथा "फूल चोर" को इस माह की सर्वश्रेष्ठ कृति चुने जाने पर। समाज में व्याप्त किसी भी छोटी सी या बड़ी बुराई या ग़लत मानसिकता पर तीखा व्यंग्य या कटाक्ष करते हुए उत्कृष्ट लघु कथा सृजन करते हुए आपकी लेखनी वास्तव में सम्मानीय व अनुकरणीय है। सादर बधाई। आशा है हम नव रचनाकारों को आपकी और भी बेहतरीन लघु कथाएँ पढ़ने का अवसर मिलता रहेगा।
At 1:13pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया नीता कसार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "फूल चोर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:07pm on July 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 4:59pm on June 28, 2015, Nita Kasar said…
"बंधन"
स्वर्ण आभूषणों क़ीमती कपड़ों की चकाचौंध से उसका रूप सौंदर्य दमक रहा था, स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो जैसे।
और कोई होती तो मारे ख़ुशी से बावली हो जाती, पर नाम की लक्ष्मी का मन डूबा जा रहा था।
लोग क़यास लगाने में उलझे हुये थे।
पर कुछ जोड़ी अनुभवी आँखें युवती
की मन, की मलिनता समझ रही थी पर मजबूर थी। उनके हाथ बँधे जो थे।
"तू जल्दी से तैयार हों जा लक्ष्मी, सरपंच के बेटे की बहू बनकर जा रही है बहुत खुश रहेगी।
सुनो न माँ ------।कुअें से डूबती आवाज़ से पुकारा लक्ष्मी ने । माँ लौटी नसीहत के साथ, 'रानी बनकर राज करेगी ' लाड़ों, कहकर माँ ने उसके गोरे,गोरे गाल थपथपा दिये, पर वे शर्मो हया के मारे लाल न हुये ।
'दुल्हन को बुलाओ, मुहुरत निकला जा रहा है'। पर उसका निर्णय अटल था
वह घर के पिछले दरवाज़े से निकल चुकी थी अपनी पसंद के साथ, प्रेमपथ पर, आज़ाद हो सारे बंधनों से ।
एक एेसी नदी जिसे कोई बाँध, बंधन मंज़ूर नही, अनवरत चाहती थी, उन्मुक्त हो निर्बाध बहना ।

मौलिक व अप्रकाशित नीता कसार
जबलपुर (म०प्र) ।
At 2:58pm on June 24, 2015, Nita Kasar said…
सुलझती उलझन

पिछली कुछ रातों से मनु चैन से सो न पाया अक्सर आये सपने से चौंक कर उठ कर बैठ जाता ।
छोटा बच्चा नहीं है वह मिनी से शादी करता पर माँ पापा की कट्टरता के आगे समर्पण कर बैठा।
अब आजीवन जेल में रहना होगा क्या मुझे जेल में नही !!!!!!
वह बिन ब्याही मिनी और उसके बच्चे का पिता होने के जुर्म में सवालों के पीछे पहंुच गया ।
मनु आदतन अपराधी नही था पूरी ज़िंदगी उसके और मिनी के सामने थी ।अदालत ने इसी आधार पर उसकी ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली ।
अब वह बेटे को अपना नाम देगा,अच्छा पति बनेगा ।ज़िम्मेदारियों के अहसास ने उसे कश्मकश के भँवर से भी मुक्त कर दिया ।
नीता कसार
जबलपुर
मौलिक व अप्रकाशित ।
At 7:33pm on April 29, 2015, Nita Kasar said…
दर ए दीवार लघुकथा ।
एक ही मोहल्ले में,एक ही गली में रहने वाले दो परिवार,अपनापन इतना ज़्यादा कि लोग एक ही परिवार समझते।
वक़्त की नज़ाकत,व बड़ों का बचपना,दोनों मंे अनबोला हो गया।
हालत इतने बिगड़ गये कि एक दूसरे कि सूरत देखना गवांरा नही था।
अचानक आये भूकंप ने सबको स्तब्ध कर दिया।
भूकंप की थरथराहट ने दीवार को ज़मींदोज़ कर
दिया ।
क़ुदरत के क़हर के आगे सब बौने है?

अप्रकाशित मौलिक

नीता कसार
At 7:43am on April 29, 2015, Nita Kasar said…
Thank you
At 11:41pm on April 9, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !

 
 
 

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