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Dr. Geeta Chaudhary
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  • Ghaziabad, U.P.
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Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आ. गीता जी, समसामयिक विषय पर अच्छी अभिव्यक्ति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,सताता मुझे क्यूँ है?तुम इन्सान ही बुरे हो,इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?ये धर्म के ठेकेदार हैं,फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?ये दोषी है समाज के, कतार में इतने रक्षक क्यूँ है?क्या तेरा ईमान है, कहाँ तेरा ज़मीर है?भौंडे कुतर्कों का इतना गुमान क्यूँ है?कर्म- संदेशी इस धरा पर,कर्म से भटका मानव क्यूँ है?गंगा- जमुनी इस तहजीब में,लगा ये कलंक क्यूँ है?कौन रहेगा कौन सहेगा?किसकी होगी…See More
Jan 12
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"आदरणीय समर कबीर जी बधाई के लिए सादर आभार। सुझाव एवम् संशोधन के लिए मै विशेष रूप से आपका आभार व्यक्त करती हूं। आपकी प्रतिक्रिया का बहुत इंतजार रहता है जो आगे बढ़ने एवम् नया सीखने, लिखने की प्रेरणा देता है। सादर आभार।"
Jan 4
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । और संभाले ना संभले मन' "और सँभाले न सँभले मन" 'और खोजे अक्श मेरा तुम्हारा मन' इस पंक्ति में 'अक्श' को "अक्स" कर लें । "
Jan 3
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"आदरणीय प्रदीप देवीशरण जी रचना आपको पसंद आईI हार्दिक आभारI"
Jan 2
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"बहुत खूब गीता जी, जब मेरी कमी तुमको खले,और खोजे अक्श* मेरा तुम्हारा मन *(अक्स) और आसुओं से धुँधले हो जाएं नयन।"
Jan 2
Dr. Geeta Chaudhary and आशीष यादव are now friends
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post नववर्ष की शुभकामनाएं (मत्तगयंद छंद)
"नववर्ष पर नव शुभ भाव एवम् सुंदर शब्दों में प्रस्तुति, बहुत आकर्षक लगी। बहुत बधाई आपको।"
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on आशीष यादव's blog post नव वर्ष तुम्हें मंगलमय हो
"सुंदर प्रस्तुति , हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।"
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on आशीष यादव's blog post नव वर्ष तुम्हें मंगलमय हो
"आदरणीय आशीष यादव जी सुंदर प्रस्तुति। हार्दिक आभार।"
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post नव विहान (नवगीत)
"आदरणीय डॉ० छोटेलाल सिह जी गीत बहुत अच्छा लगा। हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।"
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post नव वर्ष के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर दोहे सुंदर संदेश लिए हुए। बहुत बधाई आपको।"
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on Sushil Sarna's blog post प्रिय तुझसे मैं प्यार करूँ ...
"आदरणीय सुशील सरना जी बहुत ही सुंदर। सुंदर भाव और आकर्षक शब्द शिल्पकारी। बहुत बधाई आपको।"
Dec 29, 2019
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बधाई के लिए सादर आभारI"
Dec 28, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"आ. गीता जी, सुन्दर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 28, 2019

Profile Information

Gender
Female
City State
Ghaziabad
Native Place
Ghaziabad
Profession
Associate professor

Dr. Geeta Chaudhary's Blog

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?

ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,

सताता मुझे क्यूँ है?

तुम इन्सान ही बुरे हो,

इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?

तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,

ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?

ये धर्म के ठेकेदार हैं,

फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?

ये दोषी है समाज…

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Posted on January 12, 2020 at 8:09pm — 2 Comments

गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!

जब पीड़ा आसुओं को मात दे,

और संभाले ना संभले मन।

जब यादें मेरी दिल पर दस्तक दें,

और बेचैन हो ये अंतर्मन।

तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये,

मैं आऊँगी भाव बनकर ज़रूर।

जब मेरी कमी तुमको खले,

और खोजे अक्श मेरा तुम्हारा मन।

जब बोझिल हो रातें काटे ना कटे,

और नींद से आँख-मिचौली खेले नयन।

तब तुम कोई सपना सजाना प्रिये,

मैं आऊँगी तुमसे मिलने ज़रूर।

जब पतझड़ में झड़ते हो पत्ते पुरातन,

और लहरों को देख विचलित हो मन।…

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Posted on December 26, 2019 at 2:00pm — 6 Comments

कविता: कुछ ख़ास है उन बातों की बात

वो लड़कपन के सपनों की बात,
काग़ज की नाव और कागज़ी जहाजों की बात।
वो जवानी की ज़िद्दी उमंगों की बात,
हर ख़्वाब को हकीकत बनाने की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो हसीं ख्वाबों, ख्यालों की रात,
वो चुराई हसीं मुलाकातों की बात।
वो कही अनकही बातों की बात,
वो बिखरते सिमटते जज्बातों की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो चाही, अनचाही विदाई की बात,
और जुदाई में छलके आंसुओ की…
Continue

Posted on November 10, 2019 at 6:30pm — 8 Comments

कविता: स्मृति शेष

स्मृति शेष, बनी विशेष। 

कभी शूल सी चुभती हैं, 

कभी बन प्रसून महकती हैं। 

कभी अश्रु बन छलकती हैं, 

कभी शब्दों में ढलती हैं। 

स्मृति शेष, बनी विशेष। 

अशेष, अन्नत प्रवाह पीड़ा का, 

बिसराये ना बिसरती हैं। 

सब छूट गया सब टूट गया, 

शेष स्मृति का अटूट बंधेज। 



स्मृति शेष, बनी विशेष। 

कुछ…

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Posted on November 2, 2019 at 7:30am — 5 Comments

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