For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मार्केटिंग - डॉo विजय शंकर

प्रचार हो रहा है ,
प्रचार चल रहा है ,
दुष्प्रचार दौड़ रहा है ,
अपनी ढपली ,
अपना राग बज रहा है ,
स्वप्रचार ,
स्वयं का उपहास बन रहा है ,
दूसरे का दुष्प्रचार ,
न हास्य है , न व्यंग है ,
स्वयं आपके व्यक्तित्व से
चिपटता जा रहा है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 834

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 14, 2018 at 8:48pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी , आभार, आपने बड़े मनोयोग से रचना का पाठ किया और ुटण३ ही मनोयोग से उसकी टिप्प्पणी लिखी। बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद।
आपका सुझाव बहुत ही सुन्दर एवं सार्थक है ! अवश्य प्रयास करूंगा। सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 14, 2018 at 8:43pm

आदरणीय विजय निकोर जी , आशा है स्वस्थ एवं सानंद होंगे। रचना पर उपस्थित होने के लिए आपका बहुत बहुत आभार एवं ह्रदय से धन्यवाद सादर।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 13, 2018 at 12:05am

या शीर्षक "जोंक-बाज़ार"!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 13, 2018 at 12:03am

निर्जीव और सजीव; उपयोगी और अनुपयोगी; राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय; उचित और अनुचित; स्वाभाविक और थोपी गई  सब चीज़ों/उत्पादों/प्रवृत्तियों पर गहरे और गंभीर कटाक्ष करती 'गागर में सागर' विचारोत्तेजक सृजन हेेतु सादर हार्दिक बधाइयां मुहतरम जनाब 

डॉ. विजय शंकर साहिब। मेरे ख़्याल से आपको यह एक बेहतरीन लघुकथा में भी कहना चाहिए। शीर्षक हिंदी में "जोंक" या "जौंकें" या "जौंकों का प्रकोप/झोंक" जैसे हो सकते हैं। एक अभ्यास मात्र!

Comment by vijay nikore on August 10, 2018 at 6:20am

अति प्रभावशाली प्रस्तुति। आनन्द आ गया । बधाई, विजय जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 10, 2018 at 5:09am

आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आशा है आप स्वस्थ एवं प्रसन्न होगें। छोटी सी मेरी इस कविता को आपने इतनी गंभीर विवेचना से नवाज़ा , बहुत बहुत शुक्रिया। आपका ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद।
स्वास्थ ठीक है , व्यस्तता ज्यों कि त्यों। इसी व्यस्तता में अमेरिका आ गए। कुछ ही दिन में लैटिन अमेरिका जाना है।
सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 10, 2018 at 4:56am

आदरणीय सुश्री नीलम उपाध्याय जी , रचना को मान देने के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 10, 2018 at 4:54am

आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, रचना को मान देने के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।



Comment by Samar kabeer on August 9, 2018 at 3:55pm

आली जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब,जब हम कोई आवाज़ रोज़ सुनें, कोई चीज़ रोज़ पढ़ें तो उसके असरात नफसियाती(साइकोलाजी) तौर पर हमारे जीवन पर असर अंदाज़ होने लगते हैं,बहुत सुंदर गम्भीर प्रभावशाली रचना के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें ।

अब आपकी तबीअत कैसी है?

Comment by Neelam Upadhyaya on August 9, 2018 at 3:42pm
आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, नमस्कार । कटाक्षपूर्ण अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
2 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
3 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
3 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
3 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
3 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
3 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
3 hours ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई…"
4 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता…"
4 hours ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post कविता
"इस पटल पर प्रकाशित होने के 6 साल बाद इस कविता को पढ़ रहा हूं। भावों को गीत बना देना, कविता बना देना…"
4 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service