For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुना ठीक है सिरफिरा आदमी हूँ- ग़ज़ल

122 122 122 122
सुना ठीक है सिरफिरा आदमी हूँ
उसूलों का पाला हुआ आदमी हूँ।

हमेशा ही जिसने सही बेवफ़ाई
जमाने में वो बावफ़ा आदमी हूँ।

कि मौजें मुझे दूर खुद से करेंगी
अभी मैं भँवर में फँसा आदमी हूँ।

डिगायेगी कैसे मुझे कोई आफ़त
मैं चट्टान जैसा खड़ा आदमी हूँ।

रहा साथ जिसके जरूरत में अक्सर
कहा है उसी ने बुरा आदमी हूँ।

हक़ीक़त मेरी ठीक से जान लेते
कभी ये न कहते मरा आदमी हूँ।

थपेड़े जहाँ के सहे पर न उफ़ की
हमेशा जो तिल-तिल जला, आदमी हूँ।

मौलिक अप्रकाशित

Views: 762

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राज़ नवादवी on December 1, 2018 at 11:11am

आदरणीय सतविंद्र जी, आदाब. सुंदर गजल की प्रस्तुति पे हार्दिक बधाई । सादर. 

Comment by Rahul Dangi Panchal on November 27, 2018 at 9:38pm

बहुत सुन्दर भावों के साथ ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । जनाब कबीर साहब का आशीर्वाद तो प्राप्त हो गया आपको

Comment by बसंत कुमार शर्मा on November 27, 2018 at 12:50pm

आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा जी सादर नमस्कार

लाजबाब ग़ज़ल हुई 

बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 27, 2018 at 5:22am

आदरणीय तेजवीर जी, सादर नमन, आभार उत्साहवर्धनार्थ

Comment by TEJ VEER SINGH on November 26, 2018 at 8:19pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर कुमार जी।बेहतरीन गज़ल।

रहा साथ जिसके जरूरत में अक्सर
कहा है उसी ने बुरा आदमी हूँ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 26, 2018 at 4:26pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सादर नमन! हौंसलाफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 26, 2018 at 4:25pm

आदरणीय समर कबीर जी सादर वन्दन, मार्गदर्शन के लिए सादर हार्दिक आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 26, 2018 at 3:54pm

आ. भाई सतविंद्र जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई । भाई समर जी की बातों का संज्ञान लें । शेष शुभ शुभ..

Comment by Samar kabeer on November 26, 2018 at 2:56pm

जनाब सतविन्द्र कुमार 'राणा' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा ।

सुना है सही सिरफिरा आदमी हूँ
उसूलों पे चलता रहा आदमी हूँ'

मतले के ऊला मिसरे में 'सही' शब्द अस्ल में "सहीह" है जिसका अर्थ है दुरुस्त,औऱ सानी मिसरे में 'रहा' क़ाफ़िया भी ठीक नहीं,इस मतले को यूँ कर सकते हैं:-

'सुना ठीक है सिरफिरा आदमी हूँ

उसूलों का पाला हुआ आदमी हूँ'

' कि मौजें मुझे दूर खुद से करेंगी
मैं तूफाँ के अंदर फँसा आदमी हूँ'

इस शैर को यूँ कर लें तो गेयता बढ़ जाएगी:-

'ये मौजें मुझे दूर ख़ुद से करेंगी

अभी तो भँवर में फँसा आदमी हूँ'

' नहीं कोई आफ़त डिगा मुझको पाती
मैं चट्टान जैसे अड़ा आदमी हूँ'

इस शैर को यूँ कर लें,गेयता बढ़ जाएगी:-

'डिगायेगी कैसे मुझे कोई आफ़त

मैं चट्टान जैसा खड़ा आदमी हूँ'

' जरूरत में मैं ही रहा साथ जिसके'

इस मिसरे को यूँ कर लें,गेयता बढ़ जाएगी:-

'रहा साथ जिसके ज़रूरत में अक्सर'

' तो कहते कभी ना मरा आदमी हूँ।

इस मिसरे को यूँ कर लें:;

'कभी तुम न कहते मरा आदमी हूँ'

' थपेड़े सहे पर, किये वो न जाहिर
हमेशा जो तिल-तिल जला, आदमी हूँ'

इस शैर का ऊला यूँ कर लें:-

"थपेड़े जहाँ के सहे पर न उफ़ की

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service