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अमर हो गयी .. (लघु रचना )

अमर हो गयी .. (लघु रचना )

स्मृति गर्भ में
एक शिला
साकार हो उठी
भाव अस्तित्व
उदित हुआ
शिला की दरारों से
आसक्ति
अदृश्यता की घाटियों से
प्रवाहित हो
स्मृतियों वीचियों पर
अक्षय पल सी
सुवासित हो
अमर हो गयी

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 546

Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 29, 2018 at 5:30pm

आदरणीय Dr Ashutosh Mishra  जी सृजन आपके स्नेह का आभारी है।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 29, 2018 at 12:19pm

इस उत्तम रचना के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील जी  सादर 

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2018 at 6:58pm

आदरणीय महेन्द्र कुमार जी प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 27, 2018 at 6:57pm

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज'जी सृजन को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Mahendra Kumar on June 26, 2018 at 10:37am

बढ़िया कविता है आदरणीय सुशील सरना जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 25, 2018 at 5:42pm

वाह आदरणीय बहुत ही उत्तम लघु रचना...

Comment by Sushil Sarna on June 25, 2018 at 3:43pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब ... प्रस्तुति आपकी दिलकश प्रशंसा की दिल से आभारी है।

Comment by Samar kabeer on June 25, 2018 at 2:59pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा रचना हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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