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माँ के निकाले हुए पुराने बर्तन बेचकर दीपावली त्योहार के लिए जरूरी सामान की सूची अनुसार पिताजी बाजार से पूजा का सामान, छोटे-छोटे पाँच फल, दो गन्ने, पाँव लड्डू-जलेबी, फूले-पतासे, लक्ष्मी जी का पाना, और रुई लाकर सामान माँ को देते हुए पूछा 21 की जगह 11 दीपक ही ले आता हूँ । इस पर माँ बोली -"मेरे पीहर के गांव कुंडा से कुम्हार आया था जो कल मना करने पर भी 21 दीपक रख गया है और पूछने पर भी रुपये नही बताये । अब उसे रुपये भाई-दूज के बाद दे आऊंगी । इस बार तो 21 दीपक ही जलाएंगे । अड़ोसी-पड़ौसी के चौखट पर भी तो दीपक रख उजियारा करना है"।

बात जारी रख माँ ने पिताजी से कहा -"मैंने छुटकू को प्रदूषण के बारे में समझाकर दो फुलझड़ी के पैकेट लिए राजी कर लिया है । मैं उसकी पुरानी कमीज रंगरेज को दे आयी थी, पाँच रुपये देकर वह ले आओ तो उसे पूजा के समय पहना देंगे । त्योहार पर नई कमीज समझ खुश हो जाएगा"।

(मौलिक व अप्रकाशित )

लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 22, 2017 at 9:58am

बहुत बहुत आभार आपका श्री अजय तिवारी जी | पांच दिवसीय दीप पर्व की शुभ कामनाएं | सादर नमन

Comment by Nita Kasar on October 21, 2017 at 2:14pm
संवेदनशील कथा के लिये बधाई आद०लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on October 21, 2017 at 9:11am
गुजर बसर जिंदगी , बधाई , आदरणीय लक्षमण रामानुज लाड़ीवाला जी , सादर।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 19, 2017 at 3:38pm
आपकी लघुकथाओं की हमेशा प्रतीक्षा रहती है। हालात, ख्वाहिशों और भावपूर्ण सामंजस्य से परिपूर्ण सूझबूझ से पर्व मनाने की प्रेरणा देती बेहतरीन रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई। अंतिम पंक्ति बेहतरीन है। दीपोत्सव पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी।
Comment by Samar kabeer on October 19, 2017 at 2:46pm
जनाब लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला जी आदाब,बहुत ही मार्मिक लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 19, 2017 at 9:38am
आ. ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई.
Comment by Mohammed Arif on October 19, 2017 at 8:29am
आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी आदाब, पर्व बनाने की जुगत,परवशता और ख़ुशी की तलाश की बेहतरीन लघुकथा । हार्दिक बधाई और दीपोत्सव की शुभकामनाएँ ।
Comment by Ajay Tiwari on October 19, 2017 at 8:24am

आदरणीय लक्ष्मण जी,
इस मार्मिक कथा प्रस्तुति के लिए बधाईयाँ.
दीपावली की शुभकामनाएं.
सादर

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