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१२२ १२२ १२२ १२२

नहीं है यहाँ पर मुझे जो बता दे
सही रास्ता जो मुझे भी दिखा दे

ये कैसी हवा जो चली है यहाँ पर
परिंदा नहीं जो पता ही बता दे

चले थे कभी साथ साथी हमारे
पुरानी लकीरों से यादें मिटा दें

कभी तो मिलेगी ज़िन्दगी पुरानी
वफ़ा की ज्वाला यहाँ भी जला दे

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 27, 2017 at 12:30pm
बहुत ही खूबसूरत प्रयास है आदरणीया...बधाई
Comment by narendrasinh chauhan on August 26, 2017 at 5:24pm

बहोत खूब 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 25, 2017 at 9:57pm

जी आदरणीय सलीम रज़ा जी ,  प्रयासरत हूँ इसको बदल सकूँ | सादर धन्यवाद् आपका |

Comment by SALIM RAZA REWA on August 25, 2017 at 9:36pm
कल्पना जी ग़ज़ल के लिए बधाई,
आखिरी शेर का पहला मिसरा बे बहर हो रहा है एक बार पुनः देख लें.
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 25, 2017 at 5:55pm

आपको परेशां होना पड़ा मेरी वजह से क्षमा चाहती हूँ भाई जी |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 25, 2017 at 5:48pm

नमस्ते आदरणीय समर भाई जी , आपने देख ली यही बहुत है , मुझे पता है आप तरही में व्यस्त होंगे , भाई जी लिखते वक़्त आप ही याद आ रहे थे , और दूसरी और आदरणीय रवि शुक्ल जी , भाई जी जो गलतियाँ हुई है कल प्रयास किया था की समझ पाऊं पर नहीं समझ आई फिर लगा पोस्ट कर देती हूँ ज्यादा से ज्यादा गलत ही होगी , और अच्छा है न जब सीखना है तो सही हो जाने पर गुमान हो जायेगा , जो मुझे सीखने नहीं देगा और ऐसा मैं होने न दूंगी | सादर |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 25, 2017 at 2:31pm
Sadar dhanywad adarniya Ravi sir.
Comment by Samar kabeer on August 25, 2017 at 2:25pm
बहना कल्पना भट्ट जी आदाब,मुग्ध हूँ आपके इस प्रयास पर,बहुत उम्दा ग़ज़ल कही आपने,बह्र भी ख़ूब निभाई है,ग़लतियां तो उनसे भी होती हैं जो सबकुछ जानते हैं,इसलिये इसकका होना स्वाभाविक है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
हालांकि इस वक़्त ब्लाग्स पर मेरा आना मुश्किल था,क्योंकि मंच पर तरही मुशायरा चल रहा है,लेकिन आपकी वजह से आना ही पड़ा, ख़ैर ।
तीसरे शैर में रदीफ़ 'दें',को "दे" कर लें ।
आख़री शैर का ऊला मिसरा लय में नहीं यूँ कर लें :-
'कभी तो मिलेगा हमें कोई ऐसा'
कुछ अशआर में थोड़ा काम और है, बाद में हाज़िर होता हूँ ।
Comment by Ravi Shukla on August 25, 2017 at 1:45pm
आदरणीया कल्पना जी आपके सद्प्रयास को देख कर बहुत ही खुशी हुई बहुत बहुत बधाई आपको। निरंतरता बनाएं रखे आप जल्दी ही तरही मुशरों में शिरकत करेंगी हमें ये उम्मीद हो गई है ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 25, 2017 at 10:51am
Ji aadarniya Shahzad bhai mai bhi margdarshan ke liye intezaar kar rahi hoon ..Ho sakta hai galat likhi ho.. sadar dhanywad

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