For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अंत का आरम्भ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

“डॉक्टर साहब, देखिये ना मेरी फूल सी बिटिया को क्या हो गया है, कुछ दिनों से ये अचानक दौड़ते-भागते हुए गिर जाती है, ठीक से सीढ़ियाँ भी नहीं चढ़ पाती है।“

“अरे आप इतना क्यों घबरा रहें है? लीजिये कुछ टेस्ट लिख दियें हैं, बच्ची की जाँच करवा के मुझे दिखाइये ।“-डॉक्टर ने कहा।

अगले ही दिन बृजमोहन सारी जाँच रिपोर्ट लेकर डॉक्टर मिश्रा के अस्पताल पहुँच गया।

डॉक्टर मिश्रा जैसे –जैसे रिपोर्ट पढ़ते जा रहे थे वैसे –वैसे ही उनके माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ती जा रहीं थी, और बच्ची की ख़ून की जांच रिपोर्ट देखते ही उनके माथे से पसीना चूने लगा। यह देख कर बृजमोहन का तो माने ख़ून ही सूख गया हो, उसने अपनी लड़खड़ाई जुबान से डॉक्टर मिश्रा से पूछा ,“क्या हुआ मेरी बच्ची को डॉक्टर साहब, सब ठीक तो है न।“

देखिये बृजमोहन जी, आपसे कुछ नहीं छुपाऊँगा मगर मैं खुद हैरान हूँ की इतनी प्यारी बच्ची को मात्र पाँच साल में ‘मस्कुलरडिस्ट्रॉफी’ रोग कैसे हो गया और सबसे बड़ी बात तो ये की यह रोग सामान्यत: लड़कों में ही पाया जाता है।

इतना सुनते ही बृजमोहन की आँखों के सामने अँधेरा छा गया, वह समझ ही नहीं पा रहा था कि हुआ क्या है?

बृजमोहन की मनोदशा को भाँपकर डॉक्टर मिश्रा ने उसे सरल भाषा में समझाया और कहा ! “देखिये बृजमोहन जी यह रोग मांसपेशियों की विकृति के रूप में सामने आता है । इस बीमारी में मरीज की मांसपेशियां बेकार हो जाती हैं जबकि उसका मस्तिष्क आम आदमी की तरह काम करता रहता है। यह बीमारी बहुत तेजी से बढ़ती है। अधिकांशतः बच्चे 7 से 8 साल बाद ही चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं और 20 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते सांस लेने के लिए उन्हें श्वास यंत्र की आवश्यकता पड़ जाती है।हालांकि मैं इस केस को न्यूरोलॉजिस्ट को रेफेर कर रहा हूँ बाकी आपको वही समझा देंगे।“

बृजमोहन बिना कुछ बोले डॉक्टर मिश्रा को हाथ जोड़कर चल दिया , न्यूरोलॉजिस्ट से मिला दवाईयां लेकर चल दिया उसने रास्ते में एक नर्सरी से एक पीपल का पौधा लिया और घर पहूंचकर अपनी बिटिया से उसी शिवलिंग के पास बड़े प्यार से रोपित करवा दिया, जिससे उसने बड़ी मिन्नतों से एक बिटिया मांगी थी।

अब हर साल वो पीपल को बढ़ता देखता है और बिटिया को घटता...वो समझ चुका था, किसी के अंत का आरम्भ है ये।  

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित"

 

Views: 871

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mahendra Kumar on July 20, 2017 at 10:04pm

आ. हरि प्रकाश जी, जो बात मैं आपसे कहना चाहता था वो बात आ. समर सर ने कह दी है. यदि आपकी इस लघुकथा की बात की जाए तो यह एक गम्भीर बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाती बढ़िया लघुकथा है हालाँकि अन्तिम संवाद और बेहतर हो सकता है. साथ ही, इसमें कालखण्ड दोष भी है. देख लीजिएगा. सादर.

Comment by Kanchan aprajita on July 19, 2017 at 9:37am
मार्मिक लघुकथा...
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 16, 2017 at 5:49pm
जनाब हरि प्रकाश साहिब,बहुत ही दिल को छूने वाली लघुकथा हुई है,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
Comment by Mohammed Arif on July 16, 2017 at 5:46pm
आदरणीय हरिप्रकाश दुबे जी आदाब, माँस पेशियों की गंभीर बीमारी की ओर संकेत करती और अनछुये विषय को आपने लघुकथा का कथानक बनाया । बेहतरीन कथानक है । हमारे भारत में भी इस बीमारी से कई बच्चें ग्रसित है । जागरूकता से हर बीमरी से निपटा जा सकता है । कथा का अवरोह में साहस,संबल देने का सकारात्मक प्रयास रहा जो कथा को सफल कथा कहलाने पर विवश करता है ।
अगर बात वर्तनी की करें तो आपने ढेरों अशुद्धियाँ की है जैसे-सीढ़ियां-सीढ़ियाँ, जांच-जाँच,बढने-बढ़ने,खून-ख़ून,पुछा-पूछा आदि । देखिएगा ।
Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 3:42pm

परम आदरणीय Samar kabeer सर आपका बात-बहुत शुक्रिया , साथ ही आप की बात से सहमत हूँ ,जरूर कुछ गुस्ताखी हुई है , आगे से आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 3:39pm

आपका अतिशय आभार आ.KALPANA BHATT जी ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 3:37pm

उत्साहवर्धन और रचना पर आपके  गुण वर्णन के लिए हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर !सादर 

Comment by Samar kabeer on July 16, 2017 at 3:35pm
जनाब हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
अभी आपने अपनी पिछली लघुकथाओं पर आई प्रतिक्रीया के जवाब भी नहीं दिए है,कृपा कर मंच पर अपनी कुछ तो सक्रियता दिखाएँ,ये आपकी ज़िम्मेदारी है ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 3:34pm

बेहतरीन कथा | हार्दिक बधाई आदरणीय हरी प्रकाश जी |

Comment by Hari Prakash Dubey on July 16, 2017 at 3:32pm

आपका हृदयतल से आभार आदरणीय  Sheikh Shahzad Usmani साहब ! सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Tuesday
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service