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जिसको जो मिलता नहीं, वही लगे बस खास।
वह सब लगता तुच्छ सा, जो है जिसके पास।।
कभी संतुष्टि न होती।

जीवनभर होता नहीं, इच्छाओं का अंत।
जो इनको वश में करे, उसे मानिए संत।।
सुखी रहता संतोषी।
(मौलिक व अप्रकाशित)
**हरिओम श्रीवास्तव**

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 1, 2017 at 12:11pm
बहुत ही उत्तम संदेशप्रद दोहे..सादर
Comment by narendrasinh chauhan on June 30, 2017 at 8:23am

खूबसूरत  रचना 

Comment by Hariom Shrivastava on June 29, 2017 at 11:24pm
आदरणीय Mohammed Arif जी, आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया से प्रयास सार्थक हुआ। हार्दिक आभार।
Comment by Hariom Shrivastava on June 29, 2017 at 11:22pm
आदरणीय Sushil Sarna जी, आपकी सराहना से प्रयास सार्थक हुआ। तहेदिल से शुक्रिया।
Comment by Hariom Shrivastava on June 29, 2017 at 11:21pm
आदरणीय Samar Kabeer जी, सराहना हेतु हार्दिक आभार।
Comment by Hariom Shrivastava on June 29, 2017 at 11:20pm
हौसलाअफजाई हेतु हार्दिक आभार आदरणीय Shyam Narain Verma जी.
Comment by Shyam Narain Verma on June 29, 2017 at 11:48am
बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति , बधाई आप को | सादर 
Comment by Samar kabeer on June 28, 2017 at 2:59pm
जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,उम्दा दोहे लिखे,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Sarna on June 28, 2017 at 1:55pm

वाह आदरणीय हरिओम जी वाह  ...  इन सुंदर एवं संदेशात्मक दुमदार दोहों के लिए हार्दिक बधाई। 

Comment by Mohammed Arif on June 28, 2017 at 12:03pm
आदरणीय हरिओम जी आदाब, बेहतरीन सीख देने वाले दुमदार दोहे ।हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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