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Hariom Shrivastava
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Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
"भाई हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब, आप तस्वीर का एक ही रुख़ देख रहे हैं,इस विधेयक ने मुसलमानों को दुख पहुंचाया है,और जो अधिकार उन्हें संविधान ने दिया है उसे ज़बरदस्ती छीना गया है ।"
Aug 4
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद -
" Hariom Shrivastava जी,आपने विशेष विषयान्तर्गत बहुत बढ़िया कुण्डलिया छन्द लिखे हैं | व्याकरण की दृष्टि से भी बहुत सुन्दर हैं |  हार्दिक बधाई | - शून्य आकांक्षी "
Aug 3
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद -

1- ख़ातूनों का हो गया, खत्म एक संत्रास। चर्चित तीन तलाक का, हुआ विधेयक पास।। हुआ विधेयक पास, सभी मिल खुशी मनाएँ।अब होंगी भयमुक्त, सभी मुस्लिम महिलाएँ।।बीती काली रात्रि, चाँद निकला पूनों का।बढ़ा आत्मविश्वास, आज से ख़ातूनों का।।2-तीस जुलाई ने रचा, एक नया इतिहास।मुद्दा तीन तलाक पर, हुआ विधेयक पास।।हुआ विधेयक पास, साँस लेगी अब नारी।कहकर तीन तलाक, जुल्म होते थे भारी।।ख़ातूनों ने आज, विजय खुद लड़कर पाई।दो हजार उन्नीस, दिवस है तीस जुलाई।।3-होगा तीन तलाक अब, दण्डनीय अपराध।ख़ातूनों की हो गईं, मन की पूरी…See More
Aug 1
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा कुण्डलिया छन्द लिखा आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 25
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

- "कुण्डलिया छंद"- ========================= तेरा मुखड़ा चाँद सा, उतर न जाए यान। गंजा पति कहने लगा, बचना मेरी जान।। बचना मेरी जान,दक्षिणी ध्रुव पर खतरा। चिंता की है बात, उमरिया  तेरी  सतरा।। एक जगह दो चाँद, एक  तेरा  इक मेरा। मेरे  सिर का  एक, दूसरा  मुखड़ा  तेरा।। (मौलिक व अप्रकाशित) -हरिओम श्रीवास्तव-See More
Jul 24
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हरि ओम जी, छ्न्द अच्छे लगे। बधाई।"
Jun 18
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"हार्दिक आभार आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह,वाहह,बहुत सुंदर रचना आदरणीय डॉ.टी.आर.शुकुल जी। प्रदूषण की भभक से चेतना थर्रा गई.. बहुत खूब।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह,पर्यावरण पर बहुत सुंदर कुण्डलिया छंद आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"वाह,बहुत सुंदर आदरणीय दयाराम मेठानी जी। कुदरत से बैर न बढ़ाने की बढ़िया सलाह।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"हार्दिक आभार आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी।"
Jun 15
Hariom Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"कुण्डलिया छंद-   (विषय-पर्यावरण) ========================= आबादी    बढ़ती  गई,  कटे  निरंतर  पेड़। क्रुद्ध प्रकृति हंटर लिए, चमड़ी  रही उधेड़।। चमड़ी   रही  उधेड़, उच्चतम पहुँचा…"
Jun 15
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-

1- तुलसी बाबा कह गए, परहित सरिस न धर्म। परपीड़ा सम है नहीं, अधमाई का कर्म।। अधमाई का कर्म, मर्म यह जिसने जाना।उसको ही नरश्रेष्ठ, जगत ने भी है माना।।जहाँ प्रेम सौहार्द, वहीं है काशी-काबा।परहित सरिस न धर्म, कह गए तुलसी बाबा।।2-सबको ही यह ज्ञात है, परहित सरिस न धर्म।किंतु आज वह चैन में, जिसके कुत्सित कर्म।।जिसके कुत्सित कर्म, उसी के वारे न्यारे।झूठ कपट छल छिद्र, स्वार्थ ने पैर पसारे।।मिथ्या पाले दम्भ, आदमी भूला रब को।रब को प्यारा धर्म, ज्ञान इसका भी सबको।।(मौलिक व अप्रकाशित)**हरिओम श्रीवास्तव**See More
Jun 7
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,पर्यावरण दिवस पर अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 7
Hariom Shrivastava posted a blog post

कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

1-हरियाली  कम  हो  गई, हुई  प्रदूषित  वायु।शनै-शनै कम हो रही,अब मनुष्य की आयु।। अब मनुष्य की आयु, धरा पर  संकट भारी।पर्यावरण   सुधार, विश्व  में  हैं  अब  जारी।।दिवस मनाकर एक,मुक्ति क्या मिलने वाली।इसका सिर्फ निदान, बढ़े फिर से हरियाली।।2-जीवन  को  संकट  हुआ, करते  सभी  प्रलाप।पर्यावरण  बिगड़  गया, बढ़ा  धरा  का  ताप।।बढ़ा   धरा  का   ताप, गर्क  होता  अब  बेड़ा।पहले  बिना  विचार, प्रकृति को  हमने  छेड़ा।।अब भी एक उपाय, करें हम विकसित वन को।इस   धरती   पर   पेड़, बचा  लेंगें  जीवन  को।।(मौलिक व…See More
Jun 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhopal, M.P.
Native Place
Datia, M.P.
Profession
Former Commercial Tax Officer

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At 11:28pm on May 12, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय हरिओम श्रीवास्तव जी बहुत शुक्रिया हौसला बढाने का आपने ठीक फ़रमाया ' लुटे ' मेरी ग़लती है
At 12:29pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु  समस्त पदाधिकारियों का हार्दिक आभार एवं सादर नमन !

At 12:25pm on April 16, 2018, Dr.Rama Dwivedi said…

ओ बी ओ  परिवार में जोड़ने हेतु बहुत -बहुत आभार आदरणीय Hariom Shrivastava ji 

At 4:56pm on April 20, 2017, Hariom Shrivastava said…
सादर आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी।
At 9:53pm on April 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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कुण्डलिया छंद -

1-

ख़ातूनों का हो गया, खत्म एक संत्रास।

चर्चित तीन तलाक का, हुआ विधेयक पास।।

हुआ विधेयक पास, सभी मिल खुशी मनाएँ।

अब होंगी भयमुक्त, सभी मुस्लिम महिलाएँ।।

बीती काली रात्रि, चाँद निकला पूनों का।

बढ़ा आत्मविश्वास, आज से ख़ातूनों का।।

2-

तीस जुलाई ने रचा, एक नया इतिहास।

मुद्दा तीन तलाक पर, हुआ विधेयक पास।।

हुआ विधेयक पास, साँस लेगी अब नारी।

कहकर तीन तलाक, जुल्म होते थे भारी।।

ख़ातूनों ने आज, विजय खुद लड़कर पाई।

दो हजार उन्नीस, दिवस है…

Continue

Posted on July 31, 2019 at 7:51pm — 2 Comments

कुण्डलिया छंद-

- "कुण्डलिया छंद"-
=========================
तेरा मुखड़ा चाँद सा, उतर न जाए यान।
गंजा पति कहने लगा, बचना मेरी जान।।
बचना मेरी जान,दक्षिणी ध्रुव पर खतरा।
चिंता की है बात, उमरिया  तेरी  सतरा।।
एक जगह दो चाँद, एक  तेरा  इक मेरा।
मेरे  सिर का  एक, दूसरा  मुखड़ा  तेरा।।
(मौलिक व अप्रकाशित)
-हरिओम श्रीवास्तव-

Posted on July 23, 2019 at 3:30pm — 1 Comment

कुण्डलिया छंद-

1-

तुलसी बाबा कह गए, परहित सरिस न धर्म।

परपीड़ा सम है नहीं, अधमाई का कर्म।।

अधमाई का कर्म, मर्म यह जिसने जाना।

उसको ही नरश्रेष्ठ, जगत ने भी है माना।।

जहाँ प्रेम सौहार्द, वहीं है काशी-काबा।

परहित सरिस न धर्म, कह गए तुलसी बाबा।।

2-

सबको ही यह ज्ञात है, परहित सरिस न धर्म।

किंतु आज वह चैन में, जिसके कुत्सित कर्म।।

जिसके कुत्सित कर्म, उसी के वारे न्यारे।

झूठ कपट छल छिद्र, स्वार्थ ने पैर पसारे।।

मिथ्या पाले दम्भ, आदमी भूला रब को।

रब…

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Posted on June 7, 2019 at 7:11pm — 2 Comments

कुण्डलिया छंद-(विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

1-

हरियाली  कम  हो  गई, हुई  प्रदूषित  वायु।

शनै-शनै कम हो रही,अब मनुष्य की आयु।।

अब मनुष्य की आयु, धरा पर  संकट भारी।

पर्यावरण   सुधार, विश्व  में  हैं  अब  जारी।।

दिवस मनाकर एक,मुक्ति क्या मिलने वाली।

इसका सिर्फ निदान, बढ़े फिर से हरियाली।।

2-

जीवन  को  संकट  हुआ, करते  सभी  प्रलाप।

पर्यावरण  बिगड़  गया, बढ़ा  धरा  का  ताप।।

बढ़ा   धरा  का   ताप, गर्क  होता  अब  बेड़ा।

पहले  बिना  विचार, प्रकृति को  हमने  छेड़ा।।

अब भी एक उपाय, करें हम विकसित वन…

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Posted on June 5, 2019 at 8:12pm — 1 Comment

 
 
 

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