For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अरी जिंदगी ! ले जाएगी मुझको बता किधर .....गीत/ डॉ० प्राची सिंह

नटी बनी थिरका करती है जब-तब डगर-मगर
अरी ज़िंदगी ले जाएगी मुझको बता किधर...

क्यों ओढ़ी तूने सतरंगी सपनों की चूनर
सपने पूरे करने की जब राहें हैं दुष्कर
माना मीठी मुस्कानें पलकों तक लाते हैं
पर कर्कश ही होते हैं बिखरे सपनों के स्वर

तिनका-तिनका ढह जाता है
नीड़ हमेशा, फिर
बुनती है क्यों वहीं घरौंदा, चंचल जिधर लहर
अरी ज़िंदगी...

छलकी आँखों को पलकों के बीच दबाती है
सिसकी के तन पर उत्सव का लेप चढ़ाती है
शब्द कहेंगे झूठ मगर खामोशी कह देगी
बाहर क्या दिखता है , भीतर किसे छुपाती है

झंझावातों से गहरा क्या
नाता है तेरा
थमी-थमी लहरों पर फेंका करती है कंकर
अरी ज़िंदगी...

धूप-छाँव के तूने कितने पन्ने हैं खोले
कितने राज़ बताए कितने बाक़ी अनबोले
दूर अगर जाऊँ तो क्यों राहों में बिछती है
मगर पकड़ती हूँ तो झट से बैरी क्यों हो ले

लुका-छुपी गम और खुशी की
कब तक खेलेगी
मेरे सब प्रश्नों के आख़िर, कब देगी उत्तर...
अरी ज़िंदगी...

क्या खोया है तेरा जिसको ढूँढा करती है
ठिठकी धड़कन से आखिर क्यों आँहें भरती है
पग-पग पर आरोपित हैं जाने कितने बंधन
सच कहना क्या तू भी हर बंधन से डरती है

कभी बलैयों सी मीठी तो
कभी कटारी है
भला ज़िंदगी ! तुझे छुएगी किसकी बुरी नज़र...
अरी ज़िंदगी...

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 758

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on June 3, 2017 at 7:11am

भावपूर्ण सृजन बहुत सुंदर पंक्तियाँ लिखी है आपने डॉ प्राची सिंह जी हार्दिक बधाई |

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 2, 2017 at 9:46pm

बहुत सुंदर मन के भाव 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 1, 2017 at 12:30am
जीवन की धूप-छांव पर बेहतरीन भावपूर्ण सृजन हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत बधाई आदरणीय डॉ. प्राची सिंह जी।
Comment by Mohammed Arif on May 31, 2017 at 6:34pm
आदरणीया प्राची सिंह जी आदाब, बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण गीत । ढेरों बधाइयाँ क़ुबूल करें । क्या कारण है कि आप रचना पोस्ट करने के बाद गुणीजनों द्वारा दी गईं प्रतिक्रियाओं पर उपस्थित नहीं होती हैं?
Comment by Shyam Narain Verma on May 31, 2017 at 3:17pm
सुन्दर गीत के लिए आपको बधाई  सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
21 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
21 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service