For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैंने गलत को गलत कहा

ना कोई सगा रहा,
जिस दिन से होकर बेधड़क
मैंने गलत को गलत कहा!

तोहमतें लगने लगी,
धमकियां मिलने लगी,
हां मेरे किरदार पर भी
ऊंगलियां उठने लगी,
कातिलों के सामने भी
सिर नहीं मेरा झुका!
मैंने गलत को गलत कहा!

चापलूसों से घिरे
झाड़ पर वो चढ़ गये,
इतना गुरूर था उन्हें
कि वो खुदा ही बन गये,
झूठी तारीफें न सुन
हो गये मुझसे ख़फा!
मैंने गलत को गलत कहा!

मेरी सब बेबाकियों की
दी गई ज़ालिम सज़ा,
फांसी पे लटका दिया
बोले अब आया मज़ा,
है गलत जिसने गलत को
मौन होकर न सहा!
मैंने गलत को गलत कहा!

शिखा कौशिक नूतन

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 825

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shalini kaushik on May 17, 2017 at 11:53pm
बहुत-बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति शिखा कौशिक जी
Comment by shikha kaushik on May 17, 2017 at 9:41am
हार्दिक धन्यवाद विजय जी व महेंद्र जी
Comment by Mahendra Kumar on May 17, 2017 at 9:23am

आदरणीया शिखा जी, बढ़िया लगी आपकी कविता. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by vijay nikore on May 16, 2017 at 1:38pm

सुन्दर भाव, सुन्दर अभिव्यक्ति। रचना के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by shikha kaushik on May 15, 2017 at 8:28pm
नरेंद्र जी व सतविंद्र जी धन्यवाद हौसलाअफजाई के लिए
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 15, 2017 at 5:59pm
सुन्दरम् सुन्दरम् सुन्दरम्,हार्दिक बधाई आदरणीया!
Comment by narendrasinh chauhan on May 15, 2017 at 5:12pm

खूब सुन्दर रचना 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 15, 2017 at 10:40am

आ. शिखा जी , अच्छे विचार पिरोये हैं आपने , रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by shikha kaushik on May 14, 2017 at 10:36pm
हार्दिक धन्यवाद समर कबीर जी
Comment by Samar kabeer on May 14, 2017 at 10:06pm
मोहतरमा शिखा कौशिक नूतन साहिबा आदाब,बहुत उम्दा जज़्बाती कविता लिखी आपने,दुनिया का यही दस्तूर है, सचं कहने वालों को फाँसी पर लटकाया जाता है,मुझे मेरा एक शैर याद आ गया,आपसे साझा करता हूँ ;-
'जितने झूटे थे वो महलों में हुए तख़्त नशीं
और जो सच्चे थे,सर-ए-दार हैं,तू जानता है'

इस शानदार प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service