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मैं भी गलती करता हूँ (तरही गजल)

बह्र 22 22 22 2

हाड़ मास का पुतला हूँ
मैं भी गलती करता हूँ ||

बच्चों को फुसलाने में
दिल रोये पर हँसता हूँ ||

जाति धर्म के बीच फँसी
लोक तंत्र की जनता हूँ||

सीख न पाया मैं लहजा
यूँ तो ग़ज़लें कहता हूँ ||

जीवन नश्वर है फिर भी
आशाओं पर जीता हूँ ||

अंक गणित सा जीवन है
गुणा भाग में उलझा हूँ ||

साथ लिए  इक ख़ालीपन
"अपनी धुन में रहता हूँ ||"


(मौलिक व अप्रकाशित)'₹

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Comment

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Comment by नाथ सोनांचली on March 5, 2017 at 5:53pm
आद0 जयनित मेहता जी सादर आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on March 5, 2017 at 5:53pm
आदरणीय महेंद्र जी सादर अभिवादन। हौसला अफजाई के लिए ह्रदय की गहराईयो से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on March 5, 2017 at 5:52pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर अभिवादन। आपको गजल पसन्द आयी, नयी ऊर्जा का संचार हुआ, आभार आपका।
Comment by नाथ सोनांचली on March 5, 2017 at 5:51pm
आदरणीय भाई डॉ आशुतोष मिश्र जी हौसला अफजाई केलिए सादर आभार, यूँही प्यार बनाये रखें।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 5, 2017 at 2:54pm
आदरणीय सुरेन्द्रजी सीधे सरल शब्दों में आम बात इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 23, 2017 at 8:12am

आदरनीय सुरेन्द्र भाई , बहुत अच्छी गज़ल हुई है , छोटी बहर मे , हार्दिक बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 23, 2017 at 8:01am

आदरनीय सुरेन्द्र भाई , छोटी बहर मे बेहतरीन गज़ल कही है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Mahendra Kumar on February 22, 2017 at 9:06pm
बहुत ख़ूब आदरणीय सुरेन्द्र जी। इस उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।
Comment by जयनित कुमार मेहता on February 22, 2017 at 3:25pm
बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय।
Comment by नाथ सोनांचली on February 21, 2017 at 4:49pm
आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सादर आभार, गहराई से शिरकत कर हौसला अफजाई के लिए।

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