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"देश प्रेम" लघुकथा

कमांडर ऑफ़ चीफ़ - "शाबाश राकेश ! तुम्हारा शौर्य पराक्रम अन्य सैनिकों से अलग है । तुम्हारे शौर्य और पराक्रम में जोश है,दीवानगी है,आक्रोश है । वेल डन ।"
राकेश राणा - "यस सर । देश प्रेम मेरा परम धर्म है । देखना एक दिन मैं इस धर्म को निभाकर दिखाऊँगा । माँ को यही वचन देकर आया हूँ ।"
सीमा पर से गोली बारी शुरू हुई और देखते ही देखते युद्ध छिड़ गया । राकेश राणा अंत समय तक लड़ते लड़ते वीर गति को प्राप्त हो गया ।
तिरंगे में लिपटा ताबूत जैसे ही गाँव पहुँचा ,जन सैलाब उमड़ पड़ा । राकेश राणा की माँ शारदा देवी राणा चीख़ चीख़ कर यही कह रहीं थी कि "आज मेरे बेटे ने देश प्रेम का धर्म शहीद होकर निभाया है । मैं भी अपना धर्म निभाऊँगी । अपने बेटे को ख़ुद मुखाग्नि दूँगी ।" सारे गाँव वाले हतप्रभ थे ।

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on July 10, 2016 at 11:16pm
जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,रचना की सराहना हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद,निवेदन है कि अगर मेरी इस लघुकथा में आपको हलकी सी भी कमी नज़र आई हो तो मुझे ज़रूर बताऐं ।
Comment by Nita Kasar on July 10, 2016 at 8:44pm
देशप्रेम से लबरेज़ कथा साथ में माँ का कठिन व साहसी फैसला बधाई आपको आद० समर कबीर जी ।
Comment by Rahila on July 10, 2016 at 6:56pm

आदाब आदरणीय कबीर साहब! देशप्रेम से ओतप्रोत इस सुंदर रचना के लिए दिल से मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 10, 2016 at 6:50pm

मोहतरम जनाब समर कबीर  साहिब आदाब ,  समाज को आईना दिखाती बेहतर लघु कथा के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं

Comment by TEJ VEER SINGH on July 10, 2016 at 6:43pm

हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी!आदाब ! बहुत सुंदर लघुकथा प्रस्तुत की है!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 10, 2016 at 4:44pm
अपना धर्म - 'देश-प्रेम' वाह.. गागर में सागर भर दिया है आपने तो। तहे दिल से बहुत बहुत मुबारकबाद इस बेहतरीन सृजन के लिए मोहतरम जनाब समर कबीर साहब।

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