For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अलग इन्सान (लघुकथा)

"बहू ,मेरी पूजा की थाली का ध्यान रखना ,वो तुम्हारी काम वाली है न ,शकूबाई , तुम लोगो ने उसे घर की मालकिन बना रखा है , पर मेरे पूजा के कमरे से दूर रखना !  न जात का पता न धरम का, दिनभर शकूबाई , शकूबाई " बुदबुदाती दादी दुसरे कमरे में चली गई।

शकूबाई ने दरवाजे से दादी की हिदायत सुन ली  थी, वो चुपचाप सिर  नीचे किये, बाहर के मेनगेट को  साफ़ करने लग गई।  तभी फूल वाला,माला लेकर आया, और शकूबाई के हाथो मे माला थमा कर चला गया। दादी पूजा की थाली लेकर मन्दिर जाने के लिये  पोते के साथ बाहर निकली और बोली 

"अरे अभी तक  फूल वाला , माला नहीं देकर गया" ?

तभी दादी की निगाह शकूबाई पर पडी जो माला लिये खड़ी थी।  उसके हाथ में माला देख दादी आग बबूला हो गई।
"सब अपवित्र कर दिया, इसके हाथ की माला, भगवान कैसे स्वीकार करेगे "?

शकूबाई ने माला हाथ पीछे कर छिपाने का प्रयास किया ,तभी एक गाय ने माला झपट ली और देखते ही देखते पूरी माला खा गई।  यह देख पोते ने दादी से कहा:

"दादी आप तो कहती है, की गाय में ३३ करोड़ देवता निवास करते है , जब उन्हें इस माला से परहेज नही ,तो आपके मंदिर वाले भगवान को क्यों ? वो
अलग है क्या?
दादी ने कहा "नही बेटा वो तो अलग नहीं है पर  हम इन्सान अलग अलग हो गये।"

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 881

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rajendra kumar dubey on June 24, 2016 at 9:12am
आदरणीय डॅाआशुतोष जी आदरणीय प्रतिभा पान्डेय जीआपने रचना की सराहना कर मुझे प्रोत्साहित किया इस हेतु आपका हृदय से धन्यवाद।
Comment by pratibha pande on June 23, 2016 at 6:42pm

 अंध विश्वासों में तंज कसती हुई अच्छी कथा बनी है आपकी हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय राजेन्द्र कुमार जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 23, 2016 at 3:59pm

आदरणीय राजेंद्र जी ..आपकी लघु कथा में बहुत ही सार्थक सन्देश छुपा है ..इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादr

Comment by Rajendra kumar dubey on June 22, 2016 at 1:36pm
आदरणीय पवन जैन जी आपके प्रोत्साहन के लिए हृदय से धन्यवाद
Comment by Pawan Jain on June 22, 2016 at 12:40pm

बहुत बढ़िया कथा आदरणीय ,बधाई ।

Comment by Rajendra kumar dubey on June 21, 2016 at 8:49pm
आदरणीय डॅा विजय शंकर जी कहानी आपको पसंद आई।आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 21, 2016 at 6:55pm
आदमी को आदमी से सम्भवतः अहम और वहां ही बांटता है , बधाई , इस रचना पर , आदरणीय राजेन्द्र कुमार दुबे जी , सादर।
Comment by Rajendra kumar dubey on June 21, 2016 at 6:02pm
आदरणीय उस्मानी जी आपने कहानी की सराहना की इसके लिए हृदय से धन्यवाद आपकी हिदायत का आगामी रचना में पूर्ण ध्यान रखूंगा।
Comment by Rajendra kumar dubey on June 21, 2016 at 5:57pm
आदरणीय तेज वीर सिंह जी आदरणीय वर्मा जी आपके प्रोत्साहन के लिए हृदय से धन्यवाद
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 21, 2016 at 4:08pm
सच्ची घटना जैसी बढ़िया संदेश वाहक रचना के लिए तहे दिल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय राजेन्द्र कुमार दुबे जी। अंतिम संवाद यदि शकूबाई के मुख से कहलवाते, तो पंचपंक्ति अधिक प्रभावी हो जाती।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अच्छी ग़ज़ल हुई है ऋचा जी। मक्ता ख़ास तौर पर पसंद आया। बहुत दाद    दूसरा शेर भी बहुत…"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"प्रिय लक्ष्मण भाई, अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई।  //पाप करने पे आ गया जब मैंरब की मौजूदगी को भूल…"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय जयहिंद जी, नमस्कार, अच्छे अशआर हुए हैं। कहीं कहीं कुछ-कुछ परिवर्तन की ज़रूरत लग रही है।…"
5 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"जिसको पाकर सभी को भूल गया  भूल से मैं उसी को भूल गया     राही जिद्द-ओ-जहद में…"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112/22 आदमी सादगी को भूल गयाक्या गलत क्या सही को भूल गया गीत गाये सभी तरह के पर मुल्क…"
6 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"नमन मंच  सादर अभिवादन "
7 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122 1212 112 बाप ख़ुद की ख़ुशी को भूल गया आज बेटा उसी को भूल गया १ ज़ीस्त की उलझनों में यूँ…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गिरह सहित सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"2122, 1212, 112**बिसलरी पा  नदी को भूल गयाहर अधर तिस्नगी को भूल गया।१।*पथ की हर रौशनी को भूल…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन।"
15 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला वो किसी को भूल गय इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा रात को इक और फिर रात…"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"सादर अभिवादन "
19 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service