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हर बार उन्हें आप ने सुल्तान बनाया (ग़ज़ल)

बह्र : २२११ २२११ २२११ २२

 

ये झूठ है अल्लाह ने इंसान बनाया

सच ये है कि आदम ने ही भगवान बनाया

 

करनी है परश्तिश तो करो उनकी जिन्होंने

जीना यहाँ धरती पे है  आसान बनाया

 

जैसे वो चुनावों में हैं जनता को बनाते

पंडे ने तुम्हें वैसे ही जजमान बनाया

 

मज़लूम कहीं घोंट न दें रब की ही गर्दन

मुल्ला ने यही सोच के शैतान बनाया

 

सब आपके हाथों में है ये भ्रम नहीं टूटे

यह सोच के हुक्काम ने मतदान बनाया

 

हर बार वो नौकर का इलेक्शन ही लड़े पर

हर बार उन्हें आप ने सुल्तान बनाया

------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 900

Comment

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 25, 2015 at 11:05am
शुक्रिया आदरणीय शिज्जू जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 25, 2015 at 11:05am
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सुशील जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 25, 2015 at 11:05am
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी
Comment by दिनेश कुमार on December 25, 2015 at 6:54am
बहुत बढ़िया आदरणीय सज्जन जी सुंदर ग़ज़ल हुई है। वाह
Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 24, 2015 at 10:47pm

.
अब आप भी पाएँगे तमगा देशद्रोही का 
बस आप लिए तो प् किस्तान बनाया ...  ;)


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 24, 2015 at 9:33pm
बहुत बढ़िया आदरणीय सज्जन जी सुंदर ग़ज़ल हुई है
Comment by Sushil Sarna on December 24, 2015 at 8:10pm

हर बार वो नौकर का इलेक्शन ही लड़े पर
हर बार उन्हें आप ने सुल्तान बनाया

वाह बहुत खूब आदरणीय धर्मेन्द्र जी ... खूबसूरत अशआर ग़ज़ल में चार चाँद लगा रहे हैं ... इस दिलकश प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 24, 2015 at 12:31pm

आदरनीय धर्मेन्द्र भाई , फिर एक बार आपने एक बेहतरीन गज़ल पढवाई , खूबसूरत गज़ल के लिये दिली बधाइयाँ

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 24, 2015 at 10:25am
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय बैजनाथ जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 24, 2015 at 10:20am
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय मिथिलेश जी।
आप सही कह रहे हैं, इस मिसरे में प्रवाह बाधित हो रहा है। त्रुटि की तरफ ध्यान दिलाने के लिए तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

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