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'' कविता.. कविता सी लगे ''

कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे ,
बहते हुए भावों की ;
एक सरिता सी लगे !

चंचल किशोरी सम जो ;
खिलखिलाए खुलकर ,
बांध ले ह्रदय को ;
नयनों के तीर चलकर ,
ऐसी रचूँ कि कुमकुम सी
मांग में सजे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !

हो मर्म भरी ऐसी ;
जो चीर दे उरों को ,
एक खलबली मचा दे ;
पिघला दे पत्थरों को ,
निर्मल ह्रदय जो कर दे ;
वो सुर लिए सधे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !

तितली का मनचलापन ;
सुरभि लिए कुसुम की ,
आशाओं के गगन में ;
वो चहके पाखियों सी ,
साहित्य के सदन में ;
शहनाई सी बजे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !

(मौलिक व् अप्रकाशित)

शिखा कौशिक 'नूतन'

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 13, 2015 at 7:59pm

तितली का मनचलापन ;
सुरभि लिए कुसुम की ,
आशाओं के गगन में ;
वो चहके पाखियों सी ,
साहित्य के सदन में ;
शहनाई सी बजे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !

वाह!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 13, 2015 at 5:28pm

एक अरसे बाद आपका मंच पर आना भला लगा है.

आपकी प्रस्तुति कविता-सी ही है, आदरणीया. .. :-))

हाँ, आप रेगुलर होतीं तो कुछेक विन्दु अबक स्पष्ट हो गये होते.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 12, 2015 at 4:26pm

सभी को रचना से बता दिया 

ऐसी लिखों कविता 

जैसी रची है ये रचना 

जो कविता  से  लगे | -  सुंदर  रचना के लिए बधाई  आदरणीया शिखा कौशिक जी 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 12, 2015 at 3:19pm

बस ऐसे ही लिखिए i कविता सी हे लग रही है i  आदरणीया i

Comment by gumnaam pithoragarhi on January 11, 2015 at 11:32am


हो मर्म भरी ऐसी ;
जो चीर दे उरों को ,
एक खलबली मचा दे ;
पिघला दे पत्थरों को ,
निर्मल ह्रदय जो कर दे ;
वो सुर लिए सधे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !

वाह बहुतखूब -- अच्छी रचना के लिए बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 11, 2015 at 4:56am

आदरणीया शिखा कौशिक जी इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 11, 2015 at 12:19am
बात जो दिल को छू जाए ,
मन में आ जाए , ठहर जाए ,
सरल शब्दों में सज जाए ,
होंठों पर आये ,दूर तक जाए ,
सुगंध बन तितली सी उड़ जाए ,
बस कविता बन जाए ।
बस कविता बन जाए ॥ ....... ढेरों शुभकामनाओं के साथ।
Comment by Hari Prakash Dubey on January 11, 2015 at 12:05am

वो चहके पाखियों सी ,
साहित्य के सदन में ;
शहनाई सी बजे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !..... सुन्दर रचना ,आपको हार्दिक बधाई आदरणीया शिखा कौशिक जी !

Comment by shalini kaushik on January 10, 2015 at 11:31pm

very nice expression 

Comment by shikha kaushik on January 10, 2015 at 11:12pm

सुन्दर प्रतिक्रिया हेतु आभार सोमेश कुमार जी 

कृपया ध्यान दे...

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