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आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी साहब, मैं आपकी इस लघुकथा पर आपको हृदय की गहराइयों से धन्यवाद और बधाइयाँ कह रहा हूँ. हो सकता है, यह प्रस्तुति कतिपय पाठकों को तनिक उपदेशात्मक सी लगी हो. लेकिन इस कथा की अंतर्धारा अपने साथ बहुत कुछ बहा कर ले आती है. इन बहुत कुछ ने ही अबोले रह कर इस लघुकथा को अवश्य पठनीय बना दिया है.
शुभेच्छाएँ आदरणीय
बहुत खूब कहा आदरणीय उस्मानी साहब और खूबसूरत अंदाज़ में कहा मुबारकबाद आपको .....
बहुत सुंदर आदरणीय उस्मानी साहिब जीवन की ये छोटी छोटी बातें ज़हन को कितना सुकून देती हैं अगर ये समझ इंसान में आजये तो जीवन जन्नत हो जाए। बहुत सुंदर। ... हार्दिक बधाई।
हार्दिक बधाई शेख उस्मानी जी!बेहतरीन लघुकथा!सच कहा आपने यह भी एक इबादत का ही रूप है!
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