For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (19,174)

तब और अब



तब और अब

कुशल छेम पूछत रहे , दिल में राखी सनेह I


चले गए वे लोग सब, तजि मानुष के देह II

समय समय का खेल यह, भला बुरा न होय I

कारन सदा अदृश्य है, जानि  सके न कोय II

चला गया सो चला गया , वर्तमान को जान I

आगे क्या फिर आएगा , उसको भी पहचान…

Continue

Added by R N Tiwari on February 16, 2011 at 12:17pm — No Comments

उलझन

दीदार ए अजीमत से हम शर्माए बहुत हैं

बढ़ने से कदम मेरे घबराये बहुत हैं



गर भटक गया आदम तो चोंकना कैसा

जिंदगी रस्ते में तेरे दोराहे बहुत हैं



वो तो आसमां ही था जो नसीब ना हुआ

पिंजड़े में परिंदे फडफडाए बहुत हैं… Continue

Added by Bhasker Agrawal on February 15, 2011 at 9:30pm — No Comments

प्यार

हाँ प्यार मेने भी किया बचपन से ले कर आज तक ...हाँ मुझे पता है प्यार अँधा होता ,,एक मा अपने बेटे से प्यार करती है और फिर वही बेटा उसकी पत्नी से..फिर वही पत्नी उसके बेटे से...बड़ा अजीब लगता ह सुनने मे... चलो मे अब बात करता हूँ की प्यार क्या होता है:-प्यार मे एक दूसरे का सम्मान होता है, जिसे प्यार करो उसकी फ़िक्र  होती है, उसकी चिंता होती है , उसकी बहुत याद आती हाई ,प्यार को तो महसूस किया  जाता है , प्यार कभी भी एक तरफ प्यार नही होता ,सामने वाला भी आपसे उमीद करता की आप भी बदले मे उसे तोड़ा बहुत… Continue

Added by Rohit Singh Rajput on February 15, 2011 at 4:30pm — 3 Comments

एक मिश्रण

इक और गुज़रा दिन समेटा याद में इसको;

...दफ़न हो जाएँगी अब ये मेरे मन कि दराजों में;

जो आये वक़्त परिचित तब मिलेगी रूह फिर इनको;

नहीं तो सिलवटें पड़ती रहेंगी इन मजारों में.

-----------------------------------------------------------------------------------------

वेदना कुछ भी नहीं, तब ह्रदय इतना मौन क्यों है;

क्यों हम अब भी स्वप्नते हैं, स्मृतियाँ भूली भुलाई ;

आस भी है, प्यास भी है, रौशनी कुछ ख़ास भी है;

मन हैं इतने पास अपने, हाथ लेकिन दूर क्यों… Continue

Added by neeraj tripathi on February 15, 2011 at 4:07pm — No Comments

कुछ अहसास

कुछ अहसास हर अहसास से परे

 कुछ अरमान उम्मीदो से भरे

 गम है लिखे मुक्कदर में सभी

केमहबूब का साथ हर गम हरे



किताब की लिखावट तो नीरस

हैशब्दों की बनावट भी नीरस है

गुलाबों सा महकता महबूब का प्रेम पत्र

लिये जिंदगी का हर रस है  



दुनिया में अस्तित्व हीन हूँ

सनम ही मेरी दुनिया है

 उसी में डुबा रहूँ ताउम्र 

सनम ही मेरा अस्तित्व हैं

 

मिलन यामिनी में साथ बैंठे

खुला आसमा ताकते है

चाँद को…

Continue

Added by Mayank Sharma on February 15, 2011 at 3:30pm — No Comments

हर चेहरा लगता है पत्रकार !

यह बात सही है कि आज मीडिया का हर क्षेत्र में दखल है और शहर से लेकर गांवों तक मीडिया ने पहुंच बना ली है। इस तरह कहा जा सकता है कि मीडिया का भी समय के साथ विकेन्द्रीकरण हुआ है। पहले पिं्रट व इलेक्ट्रानिक मीडिया का संपर्क महानगरों के पाठकों व दर्शकों तक होता था, मगर आज हालात काफी बदल गए हैं। मीडिया का चाहे वह पिं्रट माध्यम हो या फिर इलेक्ट्रानिक मीडिया, किसी न किसी तरह से प्रत्येक घरों तक अपनी पैठ जमा ली है। जाहिर सी बात है कि जब मीडिया का प्रसार होगा तो रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, ऐसा हुआ भी है और… Continue

Added by rajkumar sahu on February 15, 2011 at 1:19am — No Comments

पिताजी की डायरी से..

पिताजी की डायरी से..…















Continue

Added by R N Tiwari on February 14, 2011 at 5:57pm — No Comments

एक और वैलेंटाइन डे ..



कहते  तो हैं की इश्क है हमसे..
इश्क है क्या ये जानते ही नहीं..
यूं तो लेते हैं न जाने कितनी कसमें..
कसमों की कीमत है क्या जानते ही नहीं..
चाह…
Continue

Added by Lata R.Ojha on February 14, 2011 at 5:27pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल

एक ग़ज़ल 
 
बात मुझ से ये  कर  गया  पानी 
ये ना सोचो कि डर गया पानी
 
वो   हुनरमंद   है    ज़माने    में 
जिन की आँखों का मर गया पानी
 
हुई जो हक की बात महफ़िल में
जाने किस का उतर गया पानी
 
कल जो सैलाब था ज़माने पर 
अब समंदर के घर गया पानी
 
दौर  के  तौर  को  बदल  देगा 
जब भी सर से गुजर गया…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 13, 2011 at 2:30pm — 10 Comments

चुभती साँसें मत देखा कर

ख्वाब पुराने मत देखा कर,
धुंधली यादें मत देखा कर,

और भी दर्द उभर आयेंगे,
दिल के छाले मत देखा कर,

जीवन में पैबंद बहुत हैं,
मूँद ले आँखें मत देखा कर,

अपने घर कि बात अलग है,
घर औरों के मत देखा कर,

कहने वाले बस कहते हैं,
दिन में सपने मत देखा कर,

जीवन का जब जोग लिया है,
चुभती साँसें मत देखा कर,

- आकर्षण

Added by Aakarshan Kumar Giri on February 13, 2011 at 10:00am — 3 Comments

" चुनावी मौसम "

दिल में फिर 
एक आस जगी है ,
चुनावी मौसम है
और प्यास बड़ी है |
नेता आयेंगे ,
नोट लायेंगे ,
हम तो हैं नालायक ;
फिर से नोट खायेंगे |
वोट करने भी जायेंगे
पर वापस आकर ,
बार बार चिल्लायेंगे
इसने तो कुछ किया नहीं |
अगली बार ,
दूसरे नेता को…
Continue

Added by Akshay Thakur " परब्रह्म " on February 13, 2011 at 9:01am — 8 Comments

दो आंख

 

 

 …

Continue

Added by R N Tiwari on February 13, 2011 at 7:41am — No Comments

चिड़िया से

चिड़िया तुम चहचहाइ

पौ फटने पर 

तुम्हारे चहचहाने पर ही है 

दारोमदार पौ फटने का.

अँधेरे को फाड़ कर निकलता

सिन्दूरी सूरज का गोला 

चमत्कार है तुम्हारी ही आस्था का

तुम्हारी ही आस्था ने बिखेरे है

जीवन में रंग 

पेड़ों को पराग 

गेंहूँ को बाली

आदमी को भरा धान का कटोरा 

मिला है तुम्हारे ही गीतों से 

जानता हूँ आदमी आजकल 

धान का कटोरा नहीं 

बन्दूक की गोली लिये

ढूँढता है तुम्हे 

पर…

Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 12, 2011 at 10:30pm — No Comments

दुनियादारी (लघुकथा)



एक बार में ट्रेन में पुणे से मथुरा आ रहा था

जैसा की ज्यादातर यात्री करते हैं हम कुछ लोग भी एक मुद्दे पे बातचीत करके अपना समय काटने की कोशिश कर रहे थे

बात चल रही थी कश्मीर के हालातों पर .सब कश्मीर मुद्दे पे अपनी राय एक दूसरे को बता रहे थे

जैसा की हमेशा होता है मेरी राय ओरों से कुछ अलग ही थी और लोग उसपे सहमती नहीं दिखा रहे थे…

Continue

Added by Bhasker Agrawal on February 12, 2011 at 7:47pm — No Comments

ग़ज़ल...



तेरी आहट मेरे कानों को लगती है ग़ज़ल..

तेरी खुशबु मेरी साँसों में महकती सी ग़ज़ल..

तेरी बातों का सुकूँ रूह में बसती सी ग़ज़ल..

तेरा यकीं मुझे रौशनी देती सी…

Continue

Added by Lata R.Ojha on February 12, 2011 at 7:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल :- कितने गडबड झाले हैं

ग़ज़ल :- कितने गडबड झाले हैं

कितने गडबड झाले हैं ,

और हम बैठे ठाले हैं |

 

तेल खेल ताबूत तोप में ,

घोटाले घोटाले हैं |

 

राजनीति अब शिवबरात है ,

नेताजी मतवाले हैं |

 

कलम की पैनी धार कुंद है ,

बाजारू रिसाले हैं |

 

बिकता नहीं साहित्य आजकल…

Continue

Added by Abhinav Arun on February 12, 2011 at 7:30am — 5 Comments

चैनलों में श्रेय लेने की होड़

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के धौड़ाई के पास माहराबेड़ा से यात्री बस को रोककर गणतंत्र दिवस के ठीक, एक दिन पहले 25 जनवरी को 5 जवानों तथा एक स्थानीय युवक को मुखबिरी के शक में नक्सली अगवा कर ले गए थे। बाद में युवक को नक्सलियों ने छोड़ दिया। इसके बाद अगवा किए गए जवानों के परिजन, नक्सलियों से लगातार गुहार लगा रहे थे, लेकिन नक्सली अपनी कुछ मांगों पर अड़े रहे। इस बीच मीडिया द्वारा मामले को कव्हरेज दिया जाता रहा। यहां बताना यह आवश्यक है कि जब से जवान अगवा किए गए थे, उसके बाद विपक्ष भी सरकार पर दबाव बनाया…

Continue

Added by rajkumar sahu on February 11, 2011 at 11:48pm — No Comments

andhere ki chikh se

अँधेरे की चीख से 
 
रोटियों से यहाँ भली गोली 
इसलिये है नहीं टली गोली
 
ग़ज़ब कि आप को लगी कैसे 
ये हवाओं में थी चली गोली
 
अमन औ चैन बरक़रार रहा 
आप को किसलिये खली गोली
 
आजकल वादियों में गूंजे है
बूट, खाली गली , गोली
 
आपका हक बड़ा जो हक में है
सिर्फ बन्दूक क़ी नली गोली
 
गंध बारूद क़ी है…
Continue

Added by ASHVANI KUMAR SHARMA on February 11, 2011 at 10:39pm — No Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
14 hours ago
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service