For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Akshay Thakur " परब्रह्म "
  • 27, Male
  • Allahabad , Uttar Pradesh
  • India
Share

Akshay Thakur " परब्रह्म "'s Friends

  • Abhay Kant Jha Deepraaj
  • Azeez Belgaumi
  • Ekta Nahar
  • Lata R.Ojha
  • Shrddha
  • अशोक पुनमिया
  • GOPAL BAGHEL 'MADHU'
  • Roli Pathak
  • Sushil.Joshi
  • Anita Maurya
  • Sudhir Sharma
  • Ajay Singh
  • Abhinav Arun
  • Kanchan Jangra
  • Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह
 

Akshay Thakur " परब्रह्म "'s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Bangalore , Karnataka
Native Place
Allahabad
Profession
Software Engineer
About me
Myself ... 'A novel full of emotions,zeal of life, dedication,underlying thoughts,humour, with many pages left unturned and the mystery remains unsolved. 'बस थोड़ा बड़ा हो गया हूँ , अब खुद को समझने लगा हूँ ..

Akshay Thakur " परब्रह्म "'s Photos

  • Add Photos
  • View All

Akshay Thakur " परब्रह्म "'s Blog

" चुनावी मौसम "

दिल में फिर 
एक आस जगी है ,
चुनावी मौसम है
और प्यास बड़ी है |
नेता आयेंगे ,
नोट लायेंगे ,
हम तो हैं नालायक ;
फिर से नोट खायेंगे |
वोट करने भी जायेंगे
पर वापस आकर ,
बार बार चिल्लायेंगे
इसने तो कुछ किया नहीं |
अगली बार ,
दूसरे नेता को…
Continue

Posted on February 13, 2011 at 9:01am — 8 Comments

"हिम्मत"

कितनी बार कहा है तुमसे

रोना धोना बंद करो

हिम्मत करके तुम आगे बड़ो

अधिकारों के लिए अब खुद ही लड़ो

कभी हंसकर के जो तुमने

ये कुछ सपने संजोये थे

उन्हें साकार करने के लिए

तुम डटकर आज आगे बड़ो

हिम्मत ऐसी हो दिल में

कि हिम्मत खुद ही डर जाए

क्या हिम्मत दूसरों में फिर

जो तुझको रोकने आयें !



-अक्षय ठाकुर… Continue

Posted on November 25, 2010 at 11:29pm — 1 Comment

"रात अभी भी बाकी है ...!"

ये रात अभी भी बाकी है ,

कुछ काम अभी भी बाकी हैं |

ये बात बहुत है छोटी सी ,

और दुनिया बदलना बाकी है |

पर दुनिया कि क्या बात करें , अभी

खुद को ही बदलना बाकी है ;

हम खड़े तो थे इस पार मगर ,

मीलों तक चलना बाकी है ;

ये रस्ता बहुत है संकरा सा , मगर

दुनिया को दिखाना बाकी है

पर दुनिया कि क्या बात करें ,

खुद भी तो चलना बाकी है |

ये रात अभी भी बाकी है ,

दिन को भी निकलना बाकी है

सूरज का चमकना बाकी है , और

किरणों का बिखरना बाकी है… Continue

Posted on November 20, 2010 at 4:08pm — 2 Comments

" माँ की ममता "

अरे ओ नौजवानों ,

अब उठो और

खुद से ये पूछो |

दिया जिसने तुम्हे है सब कुछ

उसी के दिल -

-से आज तुम पूछो

कभी हमसे भी पूछो ,

और लोगों से भी पूछो |

किया तुमने है क्या

उस माँ की खातिर

जिसने तुम्हे ममता परोसी है |

आँचल से लिपटकर जिसके

दुनिया ये सोती है |

जिसका जीवन बना आदर्श

आज फिर , ममता वो रोई है |

जिसने सभी के चेहरों पर

मुस्कान है लायी ,

वो ममता आज फिर

खुद हंस-हंस के रोई है |

जिसने खुद जगकर

हमको… Continue

Posted on November 17, 2010 at 11:18am — 7 Comments

Comment Wall (7 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:38am on August 6, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें..

At 11:03am on August 6, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 5:37pm on November 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 12:05pm on November 17, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 11:58am on November 17, 2010, Admin said…

At 11:34am on November 17, 2010,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

At 11:25am on November 17, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
" आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई और मार्गदर्शन का…"
2 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212  /  1222  /  212  /  1222दुनिया के गुलिस्ताँ में फूल सब हसीं हैं परएक मुल्क ऐसा है जो बला का है…See More
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted blog posts
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post न इतने सवाल कर- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा साहिब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने, इस पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करें।…"
4 hours ago
Samar kabeer commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"ठीक है, एडिट कर दें ।"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......कितना बेतरतीब सा लगता है आसमान का वो हिस्सा जो बुना था हमने…See More
6 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

न इतने सवाल कर- ग़ज़ल

मापनी २२१२ १२१२ ११२२ १२१२  प्यारी सी ज़िंदगी से न इतने सवाल कर,जो भी मिला है प्यार से रख ले सँभाल…See More
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मगर हम स्वेद के गायें - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२२ × ४ कहीं पर भूख  पसरी  है  फटे कपड़े पुराने हैं भला मैं कैसे कह दूँ ये सभी के दिन सुहाने हैं।१।…See More
6 hours ago
सालिक गणवीर's blog post was featured

ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)

(221 2121 1221 212)जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी हँस,खेल,मुस्कुरा तू क़ज़ा से न डर अभीआयेंगे…See More
6 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद''s blog post was featured

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212  /  1222  /  212  /  1222दुनिया के गुलिस्ताँ में फूल सब हसीं हैं परएक मुल्क ऐसा है जो बला का है…See More
6 hours ago
Sushil Sarna's blog post was featured

550 वीं रचना मंच को सादर समर्पित : सावनी दोहे :

गौर वर्ण पर नाचती, सावन की बौछार। श्वेत वसन से झाँकता, रूप अनूप अपार।। १ चम चम चमके दामिनी, मेघ…See More
6 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post पीपल वाला गाँव नहीं है-ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार आपको, आपकी हौसलाअफजाई के लिए बेहद शुक्रगुजार हूँ, आप पारिवारिक…"
7 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service