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सब कहते बेकार

सब कहते बेकार
 
सब कहते बेकार लिखा
क्या सब कुछ सब बेकार लिखा ?
वोह शे-र वोह ग़ज़ल वोह भजन वोह दोहे…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 20, 2012 at 12:32pm — 3 Comments

सब तरफ हो शांति !

सब तरफ हो शांति जले दीप न्याय का !
विरोध करें मिल कर हम सब अन्याय का !
भूखे तो सब जगे मगर भूखा सोयें न कोई !
खुशहाली हो चहूँ ओर खून के आंसू रोयें न कोई !
हर हाथ को काम मिलें बेरोजगार रहे न कोई !
सब को काम का पूरा दाम मिले बेगार सहे न कोई !
सब कोई हमें पुकारे सदैव भारतीय के नाम से
हिन्दू ,सिख,इसाई , मुसलमान कहें न कोई .

Added by Naval Kishor Soni on August 20, 2012 at 11:30am — No Comments

ईद मुबारक पर तीन कह-मुकरियां

ईद मुबारक

वो जब आये, धूम मचाये
आँगन आँगन ख़ुशियाँ लाये
सब कहते हैं  ख़ुश आमदीद
क्या सखि साजन ?
नहिं सखि ईद


तन नूरानी, मन नूरानी
सबके घर आँगन नूरानी
चमकदार है इसकी दीद
क्या सखि साजन ?
नहिं सखि ईद

उसकी आमद लगे सुहानी
झूमे नाना झूमे नानी
सारा आलम लगे खुर्शीद
क्या सखि बादल ?
नहीं सखि ईद

 

ईद मुबारक

-अलबेला खत्री 

Added by Albela Khatri on August 20, 2012 at 11:00am — 4 Comments

शीर्षक- प्रेम प्रस्ताव

पवन तुझसे है निवेदन

कर रहा सब कुछ मैं अर्पण

जा प्रिये के पास मेरी

कह सुना उसको कहानी

जो है मेरा हाल कहते

काँप
जाती है जुबानी

है तड़प मन में तेरी

मुस्कुराती यह जवानी

कह रही है बार-बार

तेरे बिना कुछ ना जवानी

क्या सफलता लिखूँ मैं

इतिहास के पन्ने कहेंगे

रो पड़ा जो प्रेयसी को

मर्द उसको ना कहेंगे

कह न पाया बात मन कि

रो पड़ी तुम उससे ही पहले

मै चाहता था बहुत कहना

स्वप्न जो देखे सुनहले

चाह है पाने की तुमको

पर…

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Added by अजय कुमार on August 20, 2012 at 10:00am — No Comments

कुछ कही कुछ अनकही (निजी डायरी के कुछ पन्ने)

मानव की प्रवृत्तियाँ क्या हैं? वह क्या चाहता है? क्या पसन्द है उसे? क्या नही पसन्द करता वो? ये सभी बातें उसी पर निर्भर हैं। किन्तु ये नही कहने वाला हूँ मै। कुछ और ही कहना चाहता हूँ।

कुछ लोगों को अच्छे लोग नही भाते बल्कि बुरे लोगो में दिलचस्पी हो जाती है। पता नही कैसा ये मन का रिश्ता है। क्या पता कब, कैसे, किससे जुड़ जाये। इसकी खबर भी नही लगती।

बात ये भी नही कहना चाहता मै लेकिन ये सभी घटनायें कभी न कभी अवश्य ही घटती हैं जीवन मे। इनके पीछे क्या होता है उस समय कोई नही जान सकता।…

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Added by आशीष यादव on August 20, 2012 at 10:00am — No Comments

एक हाइकु

नाराज़गी है।

किस बात की भला,

लो मैं तो चला।।।

                  सूबे सिंह सुजान

Added by सूबे सिंह सुजान on August 19, 2012 at 10:58pm — 1 Comment

सड़क बुलाती है

सड़क बुलाती है,

आओ...मेरा अनुसरण करो,
छोड़ो न कभी मुझे,
भटक जाओगे रास्ता,
मुश्किल हो जाएगा
मंजिल…
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Added by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 19, 2012 at 7:30pm — No Comments

मेरी चाहत

कब से थी दिल कि एक चाहत
ना जाने कब मिलेगी इसे राहत
हमेशा सोचा करते हैं कुछ बातें
सोचते सोचते गुजर जाती है रातें
पता नहीं किस हाल में होगी वह बेवफा
दुनियां से लड़ करता रहा उससे मैं वफ़ा
मुझे जिस पर नाज़ था कि सबसे ज्यादा
शतरंज कि बिसात पर बना दिया एक प्यादा
आज भी मैं यही सोचता हूँ कि आखिर क्या थी गलती
क्यों ज़माने में मोहब्बत के बदले मोहब्बत नहीं मिलती...?

नीलकमल वैष्णव"अनिश"
१९/०८/२०१२

Added by Neelkamal Vaishnaw on August 19, 2012 at 6:00pm — No Comments

अब आ भी जा

हर मोड़ हर किनारे.

जब दिल धडके, तुमको पुकारे.
सुनकर अरदास मेरी, तू आ भी जा,
तू कदम, अब तू ही सहारे..
आरजू अब बस मिलने की..
बाहों में तेरे पिघलने की.
चोट खाए दिल को, 
हाथो से सिलने की..
तरसे ये आंखे देखने को नज़ारे.
तू कदम, अब तू ही सहारे..
सुनकर अरदास मेरी, तू आ भी जा,
बिना चाँद अब क्या करे…
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Added by Pradeep Kumar Kesarwani on August 19, 2012 at 1:41pm — No Comments

मौका कहां पाएगा

जब मेरे जीवन की बाती

फफक-फफक बुझने लगे

और मोह छनकर हृदय से

प्राण को दलने लगे



लोचन मेरे जब नीर लेकर

मन के कलुष धोने लगे

और पाप नभ सा मेरा वो

प्रलय-नाद करने लगे



रुग्‍ण सा बिस्‍तर मेरा वो

आह अधिक भरने लगे

और द्वार शंकित नयन से

अदृश्‍य दूत तकने लगे



हे अधर अपनी धरा को

क्षणभर सनातन साज देना

दूर तारों में छिपा…
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Added by राजेश 'मृदु' on August 19, 2012 at 1:19am — 2 Comments

साँसों का क़र्ज़ लेकर तुझे प्यार कर रहा हूं ........

तेरा इश्क कितना मुश्किल ये तूँ भला क्या जाने

कबसे संभल संभल कर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!

*********************************

तेरी राह कितनी मुश्किल ये मै ही जानता हूँ

पगडंडियों से चल कर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!

*********************************

कबसे टहल रही हो इस फुल जैसे दिल पर

कांटो पे टहल कर मै तुझे प्यार कर रहा हूँ !!

******************************

कहती हो आओ मिल लो नज़रें उतार लूंगी

दिल में उतर कर मै तो तुझे प्यार कर रहा हूँ…

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Added by शिवानन्द द्विवेदी सहर on August 18, 2012 at 11:00pm — No Comments

अब सब छूटा जाए

अब सब छूटा जाए
मोहे मिला था सब कुछ जग में,अब सब छूटा जाए
याद तिहारी भूल न पाएँ-2 याद बहुत आए
मोहे मिला  था सब  ..........
(1 )'दीपक'थे जले दीप से हर पल,सबनें ही तो जलाया
नीर बहे न आँखों से पर,अपनों नें तो रुलाया
इस दुनियाँ की रीत निराली-2,समझ नहीं पाए
याद बहुत आए.........
मोहे मिला  था सब ..........
(2) नादाँ थे हम नादाँ है और अब का…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on August 18, 2012 at 2:46pm — No Comments

हवा की कोई आवाज नहीं होती।

हवा की कोई आवाज नहीं होती,

आवाज तो पेड-पौधों के पत्तों की होती है।

हवा तो चलती है

सब से मिलती है

सबसे बात भी करती है

फिर भी बोलती नहीं

सबको गुदगुदाती है,

हंसाती है,

और थपथपा कर दौड जाती है।

अकेली हो कर भी सबकी हो जाती है।

अगर तुम नाराज़ भी हो जाओ

तुम्हें झट से मना लेती है

और तुम तपाक से मान जाते हो।

लेकिन फिर भी हवा की कोई आवाज नहीं होती

आवाज आपकी होती है।

नाम आपका होता है।

काम हवा…

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Added by सूबे सिंह सुजान on August 17, 2012 at 10:22pm — 2 Comments

जय हो देव जय हो

घर घर से आने का होता आह्वान

गली गली बड़े बड़े चित्रों से

सुसज्जित

नीचे लिखे पूजा कर्म विधान

स्थान सुनिश्चित

प्रभु के कामों में न हो व्यवधान

इन सब बातों का रखता है हर एक

पुजारी ध्यान

गलती में कोई खींचे न उनके कान

होती रहे कृपा मिलता रहे धन

धान

बड़े बड़े लाउड स्पीकर से

प्रारम्भ हुआ प्रभु का यशोगान

कुछ निर्धारित समय में बिलम्ब के

बाद

अवतरित हुए

नवनिर्मित अस्थायी मंदिर में

भगवान्

आराधन में नतमस्तक

खड़ी… Continue

Added by SANDEEP KUMAR PATEL on August 17, 2012 at 9:13pm — 2 Comments

रोला छंद -एक प्रयास

रोला छंद -एक प्रयास 
 याद शाम सवेरे ,राधिका को  है आये |
मनभावन कान्हा ,धुन मुरली की बजाये |
गोकुल के गोपाल ,सभी के मन को भाये |
चितचोर मनमोहन ,दिल सबका है चुराये|

Added by Rekha Joshi on August 17, 2012 at 9:06pm — No Comments


सदस्य टीम प्रबंधन
नेताजी (कुण्डलिया-४)

 
नेताजी के मन बसा, चटकीला  शृंगार
नेतानी जी सुरसती, सौम्य  रूप  अवतार…
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Added by Dr.Prachi Singh on August 17, 2012 at 7:14pm — 6 Comments

कविता--जीवन नहीं बीतता।

सांस चली जाती है।

क्योंकि सांस चलती है।

आत्मा चहुँ ओर व्याप्त है।

आत्मा नहीं मरती।

जीवन भी नहीं मरता।

जीवन चलता रहता है।

जीवन नहीं मरता।

जीवन नहीं बीतता।

मैं मर गया,तो जीवन थोडे ही मर जाएगा।

जीवन आत्मा स्वरूप है।

दुबारा कहूँ तो

परमात्मा स्वरूप है।

जीवन नहीं बीतता।

-----------------सूबे सिंह सुजान..............

Added by सूबे सिंह सुजान on August 17, 2012 at 5:51pm — 3 Comments

जीवन नहीं बीतता।

Added by सूबे सिंह सुजान on August 17, 2012 at 5:33pm — No Comments

हिमालय

हिमालय की मौन आँखों में

शान्त माहौल के परिवेश में

कुछ प्रश्नों को देखा है मैंने ।



खड़ा तो है अडिग पर

उसके माथे की सलवटों पर

थकावट के अंशों को देखा है मैंने ।



प्रताड़ित होता है वो तो क्यों ?

नहीं समझते हो तुम

क्रोधित हो वो कैसे हिला दे

धरती को ये देखा है मैंने ।



जब बहती हुयी पवन कुछ

कहकर पैगाम सुनाती है तो

पैगाम -ए - दर्द को छलकते

धरती पर बहते देखा है मैंने ।



कभी ज्वाला सा जल जाता है …

Continue

Added by deepti sharma on August 17, 2012 at 2:00pm — 9 Comments

देश जवाब मांगता है !

जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है ,

गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है !

पूछता है क्यों सत्य का गला रुंध है ?

क्यों न्याय पर छा रही अन्याय की धुंध है ?

क्यों लुटती नारी आज यहाँ ,क्यों पौरुष खाक छानता है ?

जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है ,

गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है !

क्यों कन्या भ्रूण हत्याएं होती है ?

क्यों अबलायें रोती है ?

क्यों पग पग पर मौत की घाटी है ?

क्यों सत्य अहिंसा पर मिलती लाठी है ?

लोकतंत्र का प्रहरी क्यों दर दर…

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Added by Naval Kishor Soni on August 17, 2012 at 1:30pm — 6 Comments

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