For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

SANDEEP KUMAR PATEL
Share on Facebook MySpace

SANDEEP KUMAR PATEL's Friends

  • जितेन्द्र पस्टारिया
  • शिज्जु "शकूर"
  • annapurna bajpai
  • कल्पना रामानी
  • Kedia Chhirag
  • अशोक कत्याल   "अश्क"
  • केवल प्रसाद 'सत्यम'
  • Savitri Rathore
  • बृजेश नीरज
  • वेदिका
  • Aarti Sharma
  • vijay nikore
  • anwar suhail
  • आशीष नैथानी 'सलिल'
  • MARKAND DAVE.
 

SANDEEP KUMAR PATEL's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
jabalpur
Native Place
Sihora, jabalpur (M.P.)
Profession
Lecturer
About me
i m a chemical engineer

SANDEEP KUMAR PATEL's Photos

  • Add Photos
  • View All

SANDEEP KUMAR PATEL's Blog

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

प्रिय सुनो तुम्हारी भूल नहीं

अवसाद नहीं रखना मन में

यह मौसम ही अनुकूल नहीं

 

चुप चुप रहना कुछ न कहना कैसे होगा

जब चीख रहीं होगीं लाखों जिज्ञासाएं

क्यूँ है? कैसे है? और रहेगा कब तक यूँ ?

बस बुरे ख्यालों के बादल घिर घिर छाएँ

अब ऐसा भी तो नहीं

के मेरे दिल में चुभता शूल नहीं

 

मैं कहीं रहूँ इस दुनिया में रहता तो हूँ

पर सच कहता हूँ मन का रहता ध्यान वहीँ

क्या हुई भूल आखिर क्या ऐसा बोल दिया

करता रहता…

Continue

Posted on December 29, 2017 at 6:17pm — 3 Comments

आज यों निर्लज्जता सरिता सी बहती जा रही है

आज यों निर्लज्जता सरिता सी बहती जा रही है  

द्वेष इर्षा और घृणा ले साथ बढती जा रही है

 

बिन परों के आसमाँ की सैर के सपने संजोते

पा रहे पंछी नए आयाम सब कुछ खोते खोते

 

लालसा भी कोयले पर स्वर्ण मढ़ती जा रही है

 

दिन गए वो खेल के जब खेलते थे सोते सोते  

अब गुजरता है लडकपन पुस्तकों का बोझ ढोते  

 

दौड़ है बस होड़ की जो क्या क्या गढ़ती जा रही है

 

काश के पंछी ही होते लौट आते शाम होते

कोसते भगवान् को…

Continue

Posted on July 28, 2014 at 1:00am — 3 Comments

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा



देख हताशा की मिट्टी मन में लिपटी है

स्वार्थ सिद्धि में लिप्त भावना भी सिमटी है

ले आओ तूफान के मिट्टी ये उड़ जाए

मन का दिव्य प्रकाश देख तम भी घबराए



कब तक अनुमानों के दुनिया मे खोएगा

चिर निद्रा से जाग युवा कब तक सोएगा





स्वाभिमान खो गया तुम्हारा क्यूँ ये बोलो

तनमन से नंगे होकर तुम जग भर डोलो  

संस्कार मर्यादाओं का भान नहीं है

यकीं मुझे आया के तू इंसान नहीं है

   

जन्म…

Continue

Posted on December 15, 2013 at 8:45pm — 4 Comments

हूँ प्यासा इक महीने से /ग़ज़ल/ संदीप पटेल "दीप"

हजज मुरब्बा सालिम

१२२२/१२२२

हूँ प्यासा इक महीने से

मुझे रोको न पीने से



पिला साकी  सदा आई

शराबी के दफीने से  



पिला बेहोश होने तक

हटे कुछ बोझ सीने से 



न लाना होश में यारो

नहीं अब रब्त जीने से 

 

उतर जाने दो रग रग में 

उड़े खुशबू पसीने से

जिसे हो डूबने का डर 

रखे दूरी सफीने से



हुनर आता है जीने का

है क्या लेना करीने से  



गिरा न अश्क उल्फत में

ये…

Continue

Posted on December 15, 2013 at 11:30am — 14 Comments

Comment Wall (27 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:13pm on November 28, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

पटेल जी

आपके विचारो का  स्वागत है  i  मैंने  और भी ऐसे छंद लिखे है पर सब अतुकांत ही लिखे पर आपकी अभिलाषा जरूर पूरी करूंगा यदि माँ सरस्वती की कृपा रही i  क्योंकि ऐसे कठिन  छंदों  में वे ही मार्ग दिखाती  है i माँ शारदे को प्रणाम i  आपका आभार i

At 9:09pm on September 23, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 1:42pm on September 23, 2013, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिवस की हार्दिक मंगल कामनाए भाई श्री संदीप कुमार पटेल जी | प्रभु आपको निरंतर प्रगति की और अग्रसर होने में मदद करे | आपका और हाम्रारा स्नेह बना रहे | शुभ शुभ 

At 1:06am on September 23, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…

" जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें " आदरणीय संदीप जी

At 2:38am on August 16, 2013, vijay nikore said…

प्रिय मित्र संदीप जी:

आपका हार्दिक धन्यवाद।

आपके परिवार के लिए शुभकामनाओं सहित।

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर

At 9:02pm on July 23, 2013, Albela Khatri said…

aapke prem ke liye aabhari hun bahut bahut aabhaar evm dhnyavaad आपका स्नेह, दुलार, आशीष एवं आत्मीयता की सुगंध का झोंका मेरे जीवन में नया उजाला लाएगा ...ऐसा मुझे भरोसा है ........आपकी कृपादृष्टि के लिए कृतज्ञ हूँ

सादर

At 7:38pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 9:23am on April 19, 2013, डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा said…

संदीपजी,

कभी कभी सुझाव भी दिया करिये, मार्ग दर्शन होता रहे तो मुझे आसानी होगी. वैसे सोने के काजल की कल्पना ही बेतुकी लगती है, पर कर ली. सन्दर्भ था स्वतन्त्रता की स्वर्ण जयंती- उस समय लिखी रचना  पुनरन्कित कर प्रस्तुत की है.

At 4:43pm on April 16, 2013, annapurna bajpai said…

संदीप जी आपकी सभी कवितायें बहुत अच्छी एवं सुरुचि पूर्ण है मन को प्रसन्न करने वाली

At 7:56am on January 6, 2013, Abhinav Arun said…

श्री संदीप जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका !

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"बहुत बहुत शुक्रिया आ ममता जी ज़र्रा नवाज़ी का"
5 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"बहुत बहुत शुक्रिया ज़र्रा नवाज़ी का आ जयनित जी"
5 hours ago
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल : मिज़ाज़-ए-दश्त पता है न नक़्श-ए-पा मालूम
"ग़ज़ल तक आने व इस्लाह करने के लिए सहृदय शुक्रिया आ समर गुरु जी मक़्ता दुरुस्त करने की कोशिश करता…"
5 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . . गिरगिट
"//सोचें पर असहमत//  अगर "सोचें" पर असहमत हैं तो 'करें' की जगह…"
7 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . . गिरगिट
"आदरणीय समीर कबीर साहब , आदाब, सर सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय । 'हुए'…"
8 hours ago
Samar kabeer and Mamta gupta are now friends
9 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Ashok Kumar Raktale's blog post गीत - पर घटाओं से ही मैं उलझता रहा
"वाह वाह वाह वाह वाह  आदरणीय अशोक रक्ताले जी, वाह क्या ही मनमोहक गीत लिखा है आपने। गुनगुनाते…"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . . गिरगिट
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें । 'गिरगिट सोचे क्या…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक आभार आपका।"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"सही कहा आपने "
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय आप और हम आदरणीय हरिओम जी के दोहा छंद के विधान अनुरूप प्रतिक्रिया से लाभान्वित हुए। सादर"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 157 in the group चित्र से काव्य तक
"सही सुझाव "
yesterday

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service